अमेरिका में बर्ड फ्लू का कहर: 'मशहूर गंजे सिर वाली चील जैकी' की हुई मौत

बिग बीयर वैली की मशहूर गंजे सिर वाली चील जैकी की मौत पर जांच रिपोर्ट में उसकी मौत की मुख्य वजह अत्यधिक संक्रामक बर्ड फ्लू बताया गया।
गंजे सिर वाली चील 'जैकी' की मौत की वजह बर्ड फ्लू, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, संक्रमण से पेट में गंभीर घाव और अंदरूनी रक्तस्राव हुआ।
गंजे सिर वाली चील 'जैकी' की मौत की वजह बर्ड फ्लू, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, संक्रमण से पेट में गंभीर घाव और अंदरूनी रक्तस्राव हुआ।फोटो साभार: कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ फिश एंड वाइल्डलाइफ
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सारांश
  • जैकी की मौत की वजह बर्ड फ्लू: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, संक्रमण से पेट में गंभीर घाव और अंदरूनी रक्तस्राव हुआ।

  • जैकी के शरीर में मिला चूहे मारने का जहर: लिवर में ब्रोडिफाकम मिला, लेकिन मौत की मुख्य वजह नहीं माना गया।

  • बर्ड फ्लू से बिगड़ी जैकी की हालत: पेट में घाव, खून की कमी और गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण ने बढ़ाई परेशानी।

  • शैडो और बच्चों में बीमारी के संकेत नहीं: कैमरों से मिले फुटेज में बिग बीयर वैली के चील परिवार के सदस्य स्वस्थ दिखे।

  • जैकी की मौत से वन्यजीव प्रेमी दुखी: जांच से मिली जानकारी भविष्य में दूसरे चीलों के इलाज में मददगार साबित हो सकती है।

अमेरिका की बिग बीयर वैली में अपने साथी शैडो के साथ रहने वाली मशहूर बाल्ड ईगल (गंजे सिर वाली चील) जैकी अब इस दुनिया में नहीं रही। उसकी मौत से जुड़े रहस्य से पर्दा उठ गया है।

कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ फिश एंड वाइल्डलाइफ (सीडीएफडब्ल्यू), सैन डिएगो जू वाइल्डलाइफ एलायंस और ओजाई रैप्टर सेंटर की संयुक्त जांच में सामने आया है कि जैकी की हालत बिगड़ने और उसकी मौत की मुख्य वजह अत्यधिक संक्रामक बर्ड फ्लू था। इस संक्रमण ने उसके पेट में गंभीर घाव पैदा कर दिया था, जिससे लगातार अंदरूनी रक्तस्राव होता रहा।

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कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ फिश एंड वाइल्डलाइफ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, जैकी की जिंदगी पर नजर रखने वाले हजारों लोगों के लिए यह खबर भावुक करने वाली है। वह सिर्फ एक जंगली पक्षी नहीं थी, बल्कि अपनी अनोखी कहानी और साथी शैडो के साथ रिश्ते के कारण दुनियाभर के प्रकृति प्रेमियों के दिलों में खास जगह बना चुकी थी।

पेट में बना गंभीर घाव, शरीर में खून की कमी

सैन डिएगो जू वाइल्डलाइफ एलायंस के पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने जैकी के शव का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद कई प्रयोगशालाओं में अतिरिक्त जांच और टॉक्सिकोलॉजी परीक्षण किए गए। इन जांचों से पता चला कि बर्ड फ्लू के संक्रमण ने उसके वेंट्रिकुलस यानी गिजार्ड (पक्षियों के पेट का मांसपेशियों वाला हिस्सा) को गंभीर रूप से प्रभावित किया था।

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इस हिस्से में बने घाव के कारण जैकी के शरीर के भीतर लगातार खून बहता रहा। नतीजतन, उसके शरीर में खून की भारी कमी हो गई और वह गंभीर एनीमिया से जूझने लगी। लगातार बिगड़ती शारीरिक हालत ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दीं।

दूसरे संक्रमण ने बढ़ाई परेशानी

जांच में यह भी सामने आया कि पेट के क्षतिग्रस्त ऊतकों के कारण बैक्टीरिया को शरीर में प्रवेश करने का रास्ता मिल गया था। इससे जैकी को गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण हुआ, जिसे सेप्सिस कहा जाता है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।

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इसके अलावा, उसके दिल और शरीर की कई प्रमुख रक्त वाहिकाओं में गंभीर सूजन और खून के थक्के बनने के प्रमाण मिले। आगे की जांच में उसके शरीर के कई ऊतकों में बर्ड फ्लू वायरस की आनुवंशिक सामग्री भी पाई गई। इनमें पेट का वह हिस्सा भी शामिल था, जहां गंभीर घाव बना था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जैकी की मौत किसी एक समस्या का नतीजा नहीं थी। संक्रमण, अंदरूनी रक्तस्राव, खून की कमी और बैक्टीरियल सेप्सिस जैसी कई गंभीर स्थितियां एक-दूसरे से जुड़कर उसकी हालत बिगाड़ती चली गईं।

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शरीर में मिला चूहे मारने वाले जहर का अंश

जांच के दौरान जैकी के लिवर में ब्रोडिफाकम नामक एंटीकोएगुलेंट रैटिसाइड (खून का थक्का बनने से रोकने वाला चूहे मारने का जहर) भी पाया गया। हालांकि, विशेषज्ञों को उस तरह का अनियंत्रित रक्तस्राव नहीं मिला, जो आमतौर पर इस जहर के गंभीर प्रभाव से जुड़ा होता है। इसलिए इसे उसकी बीमारी या मौत की मुख्य वजह नहीं माना गया।

जैकी की जांच में वेस्ट नाइल वायरस का संक्रमण नहीं मिला। सीसा समेत भारी धातुओं का स्तर भी स्वीकार्य सीमा में था और उन्हें बीमारी की वजह नहीं माना गया।

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शैडो और बच्चों पर टिकी निगाहें

जैकी की मौत के बाद अब सबकी निगाहें उसके साथी शैडो और उनके बच्चों पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कैमरों से मिले वीडियो और तस्वीरों में शैडो या बच्चों के बीमार होने के कोई संकेत नहीं मिले। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि संक्रमण की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है।

बर्ड फ्लू मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करने वाला संक्रामक रोग है। जंगली जलपक्षियों और समुद्रतटीय पक्षियों में इसके वायरस पाए जा सकते हैं। चील जैसे शिकारी पक्षी संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने या उन्हें खाने से इसकी चपेट में आ सकते हैं।

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संक्रमण फैलने के खतरे को देखते हुए जैकी के अवशेषों को अमेरिकी फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस के नेशनल ईगल रिपॉजिटरी की निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंतिम रूप से नष्ट किया गया।

जैकी की कहानी ने दुनिया के लाखों लोगों को वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण से जोड़ा। उसकी मौत दुखद जरूर है, लेकिन उससे मिली वैज्ञानिक जानकारी भविष्य में दूसरे चीलों और जंगली पक्षियों के इलाज में मददगार हो सकती है। बिग बीयर वैली के आसमान में अब जैकी की उड़ान भले ही दिखाई न दे, लेकिन प्रकृति प्रेमियों की यादों में उसकी कहानी लंबे समय तक जिंदा रहेगी।

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