कांगो में इबोला के खतरे के बीच बड़े जमावड़ों पर रोक, इसको लेकर विवाद भी तेज

कांगो में इबोला फैलाव रोकने के लिए किंशासा में बड़े जमावड़ों पर प्रतिबंध, पूर्वी प्रांतों में बढ़ते मामलों से 360 मौतें, राजनीतिक विवाद तेज।
पूर्वी कांगो के इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों में इबोला तेजी से फैलकर हजार से अधिक मामले दर्ज हुए।
पूर्वी कांगो के इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों में इबोला तेजी से फैलकर हजार से अधिक मामले दर्ज हुए।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • कांगो में इबोला संक्रमण रोकने के लिए किंशासा सहित कई क्षेत्रों में बड़े सार्वजनिक जमावड़ों पर सरकार ने कड़े प्रतिबंध लगाए।

  • पूर्वी कांगो के इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों में इबोला तेजी से फैलकर हजार से अधिक मामले दर्ज हुए।

  • अब तक इबोला संक्रमण से 360 लोगों की मौत, स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्थिति को अत्यंत गंभीर और नियंत्रण से बाहर मान रहे।

  • पड़ोसी देश युगांडा में भी इबोला के मामले सामने आने से क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और सीमा नियंत्रण पर चिंता बढ़ी।

  • सरकार के जमावड़ा प्रतिबंध को विपक्ष ने राजनीतिक बताया, जबकि डब्ल्यूएचओ और अफ्रीका सीडीसी ने प्रकोप को लेकर चेतावनी।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की सरकार ने राजधानी किंशासा और कुछ अन्य क्षेत्रों में बड़े सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम इबोला वायरस के फैलाव को रोकने के लिए उठाया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि यह जानलेवा बीमारी राजधानी जैसे घनी आबादी वाले शहर तक न पहुंच सके।

किंशासा एक बहुत बड़ा शहर है, जहां लगभग 1.8 करोड़ लोग रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि अगर यह वायरस यहां फैल गया तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

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पूर्वी प्रांतों में पहले से फैला हुआ है संक्रमण

अभी तक इबोला के मामले देश के पूर्वी हिस्से में पाए गए हैं, जो राजधानी से लगभग 1800 किलोमीटर दूर है। संक्रमण मुख्य रूप से इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों में सामने आया है।

सरकारी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इटुरी सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है, जहां 90 प्रतिशत से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। हाल ही में एक ही दिन में 47 नए मामलों की पुष्टि के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 1274 तक पहुंच गई है। अब तक 360 लोगों की मौत हो चुकी है, जो इस बीमारी की गंभीरता को दिखाता है।

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पड़ोसी देशों तक पहुंचा वायरस

इबोला अब केवल कांगो तक सीमित नहीं रहा है। पड़ोसी देश युगांडा में भी संक्रमण के मामले सामने आए हैं। वहां अब तक लगभग 20 लोग संक्रमित पाए गए हैं और दो लोगों की मौत हो चुकी है।

यह स्थिति क्षेत्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा रही है, क्योंकि सीमाएं खुली होने के कारण वायरस के फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।

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डॉक्टर के मामले से बढ़ी चिंता

एक और गंभीर घटना ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। एक डॉक्टर, जो इबोला उपचार केंद्र में काम कर रहा था, अफ्रीका से लौटते समय किंशासा से होकर फ्रांस गया, जहां उसकी जांच में इबोला की पुष्टि हुई। हालांकि वह यात्रा के दौरान पहले ही संक्रमित हो चुका था या बाद में पता चला, लेकिन इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संक्रमण अन्य क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।

इसके बाद सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए प्रभावित इलाकों से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए 21 दिनों की क्वारंटीन व्यवस्था लागू कर दी है।

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राजनीतिक विवाद भी शुरू

सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह कदम स्वास्थ्य कारणों से कम और राजनीतिक कारणों से ज्यादा लिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आठ जुलाई को होने वाले एक विरोध मार्च को रोकने के लिए यह प्रतिबंध लगा रही है।

विपक्षी गठबंधन लामुका के प्रवक्ता ने कहा कि राजधानी में अभी तक इबोला का कोई मामला नहीं है, इसलिए वहां जमावड़े पर रोक उचित नहीं है। एक अन्य विपक्षी पार्टी ने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रतिबंध को न मानें और प्रदर्शन में शामिल हों। सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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वायरस की प्रकृति और वैश्विक चिंता

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह इबोला वायरस का बुंडिबुग्यो स्ट्रेन है, जिसके लिए अभी कोई पूरी तरह स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ जैसे खून, उल्टी या अन्य संपर्क से फैलता है, जिससे यह बेहद खतरनाक हो जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने चेतावनी दी है कि यह प्रकोप अब तक के सबसे बड़े प्रकोपों में से एक बन सकता है। कारण यह है कि शुरुआत में इसकी पहचान देर से हुई, जिससे यह कई हफ्तों तक बिना नियंत्रण के फैलता रहा।

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संघर्षग्रस्त इलाकों में मुश्किलें

पूर्वी कांगो के कुछ हिस्सों में सुरक्षा स्थिति भी बेहद खराब है। यहां एम23 नामक विद्रोही समूह का नियंत्रण कई क्षेत्रों पर है। संघर्ष और अस्थिरता के कारण स्वास्थ्य टीमों के लिए राहत और इलाज कार्य चलाना मुश्किल हो रहा है।

आगे की चुनौती

हालांकि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य एजेंसियां नई दवाओं और एंटीवायरल उपचारों पर तेजी से काम कर रही हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति गंभीर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी दौरान यह तय होगा कि यह प्रकोप नियंत्रण में आता है या और फैलता है।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य निर्देशों का पालन करें और भीड़-भाड़ वाले स्थानों से दूर रहें, ताकि इस खतरनाक बीमारी को रोका जा सके।

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