

दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दो अहम मामलों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का सख्त रुख साफ संकेत देता है कि अब पर्यावरणीय लापरवाही और प्रशासनिक ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एक ओर राजधानी के ‘फेफड़ों’ कहे जाने वाले दिल्ली रिज क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एनजीटी ने दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (डीआरएमबी) के गठन में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए इसे जल्द से जल्द अस्तित्व में लाने का निर्देश दिया है।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि रिज क्षेत्र का संरक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दिल्ली के पर्यावरणीय संतुलन, हरियाली और जैव विविधता को बचाने की अनिवार्य जिम्मेदारी है।
वहीं दूसरी ओर शाहदरा में कथित अवैध वॉटर बॉटलिंग प्लांट के मामले में एनजीटी ने भूजल के अंधाधुंध दोहन पर गंभीर चिंता जताते हुए दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड, एमसीडी और केंद्रीय भूजल प्राधिकरण समेत कई एजेंसियों से जवाब मांगा है।
यह मामला प्रशासनिक निष्क्रियता और लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने को भी उजागर करता है। दोनों मामलों में एनजीटी का रुख इस बात का संकेत है कि पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर अदालत अब जवाबदेही तय करने के मूड में है।
दिल्ली की हरियाली और जैव विविधता की रक्षा से जुड़े अहम मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है।
एनजीटी ने दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (डीआरएमबी) के गठन में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए 18 मई 2026 को निर्देश दिया कि 'दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड' (डीआरएमबी) का गठन बिना किसी देरी के जल्द से जल्द किया जाए। साथ ही उसे सौंपे गए कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड की ओर से पेश वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि बोर्ड के गठन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, हालांकि सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड के गठन के बाद इसकी पहली बैठक आयोजित की जाएगी। हालांकि, वकील बोर्ड गठन की कोई निश्चित समय-सीमा पेश नहीं कर पाए।
रिज को बचाने की कवायद तेज
इस पर एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड का गठन बिना किसी और देरी के जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए और इसे सौंपे गए कार्यों को पूरी तत्परता और तेजी के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान वन विभाग की ओर से बताया गया कि सेंट्रल रिज के फेज-1 से संबंधित अधिसूचना तैयार कर ली गई है और इसे जल्द ही प्रकाशित किए जाने की उम्मीद है। इस पर ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि अधिसूचना प्रकाशित होते ही उसे रिकॉर्ड पर पेश किया जाए। इसके अलावा, एनजीटी ने संबंधित पक्षों और डीआरएमबी को दक्षिणी रिज के फेज-2 से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट जल्द से जल्द दाखिल करने का भी निर्देश दिया।
गौरतलब है कि दिल्ली रिज क्षेत्र राजधानी के 'फेफड़ों'” के रूप में जाना जाता है। यह क्षेत्र न केवल दिल्ली की हरियाली और वन्य जीवन को बचाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, बल्कि प्रदूषण और बढ़ते तापमान के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
ऐसे में रिज क्षेत्र के संरक्षण और प्रबंधन के लिए दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड का गठन लंबे समय से एक महत्वपूर्ण आवश्यकता माना जा रहा है।
दिल्ली में अवैध वॉटर बॉटलिंग प्लांट पर एनजीटी सख्त: दिल्ली सरकार, डीजेबी समेत कई विभागों को नोटिस
दिल्ली के शाहदरा इलाके में चल रहे कथित अवैध वॉटर बॉटलिंग प्लांट को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। 18 मई 2026 को हुई सुनवाई में एनजीटी ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) समेत दिल्ली सरकार के कई अन्य विभागों से जवाब तलब किया है।
एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के उपायुक्त और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) सहित अन्य संबंधित एजेंसियों से भी जवाब मांगा है।
कागजों में शिकायत, जमीन पर कार्रवाई शून्य
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बॉटलिंग प्लांट का मालिक बिना किसी वैध अनुमति के अवैध रूप से भूजल का दोहन कर रहा है। इससे इलाके में भूजल संकट और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
आवेदक के वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि इस मामले में पहले भी कई विभागों खासकर दिल्ली जल बोर्ड से शिकायत की गई थी। इसके बाद दिल्ली जल बोर्ड ने 7 जनवरी 2026 को शाहदरा के एसडीएम को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
हालांकि दिल्ली जल बोर्ड के पत्र के महीनों बाद भी स्थानीय प्रशासन द्वारा जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद मामला एनजीटी तक पहुंच गया है। अब देखना यह है कि अदालत के कड़े रुख के बाद जिम्मेदार विभाग क्या कदम उठाते हैं।