चित्तौड़गढ़: आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध निर्माण पर एनजीटी सख्त, कार्रवाई के दिए निर्देश

एनजीटी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण नहीं होना चाहिए
चित्तौड़गढ़: आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध निर्माण पर एनजीटी सख्त, कार्रवाई के दिए निर्देश
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सारांश
  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में बड़ा मगरा-गंगरार आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध निर्माण के मामले में एनजीटी ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

  • एनजीटी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन को आदेश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि प्रतिबंधित क्षेत्र में कोई निर्माण न हो और अवैध निर्माण पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

  • मामला बड़ा मगरा-गंगरार आरक्षित वन के बफर क्षेत्र में रेड कैटेगरी उद्योग ‘ईशान कॉपर इंडस्ट्रीज’ की कथित अवैध स्थापना से जुड़ा है।

  • आवेदक के वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि समिति की जांच में सामने आया है कि संबंधित औद्योगिक इकाई पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन कर रही है और प्रतिबंधित क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण किया जा रहा है।

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित बड़ा मगरा-गंगरार आरक्षित वन क्षेत्र के प्रतिबंधित बफर जोन में किसी भी तरह का निर्माण कार्य होना चाहिए। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की केंद्रीय पीठ ने 12 जनवरी 2026 को यह सख्त निर्देश जारी किया है।

एनजीटी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण न हो। यदि जांच में अवैध निर्माण पाया जाता है, तो नियमों के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए। ट्रिब्यूनल ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला बड़ा मगरा-गंगरार आरक्षित वन के बफर क्षेत्र में रेड कैटेगरी उद्योग ‘ईशान कॉपर इंडस्ट्रीज’ की कथित अवैध स्थापना से जुड़ा है। शिकायतों के बाद जिला कलेक्टर और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति गठित की गई थी।

इस समिति से सामने आए तथ्यों के साथ क्या कार्रवाई की गई इसपर एक रिपोर्ट सबमिट करने को कहा गया था। आवेदक के वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि समिति की जांच में सामने आया है कि संबंधित औद्योगिक इकाई पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन कर रही है और प्रतिबंधित क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण किया जा रहा है।

एनजीटी के इस आदेश को वन संरक्षण और पर्यावरण कानूनों के सख्त पालन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

बालाघाट राइस मिल प्रदूषण मामला: एनजीटी ने जांच के लिए गठित की संयुक्त समिति

मध्य प्रदेश में बालाघाट जिले के टेकरी गांव में स्थित प्रदूषण फैलाने वाली एक राइस मिल के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।

12 जनवरी 2026 को एनजीटी ने इस मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय संयुक्त समिति के गठन का निर्देश दिया। इस समिति में बालाघाट के कलेक्टर और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति को साइट का निरीक्षण कर चार सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और की गई कार्रवाई की जानकारी एनजीटी को सौंपनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया के समन्वय और लॉजिस्टिक सहयोग की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी गई है।

आवेदक की शिकायत हर्ष इंडस्ट्रीज एंड राइस मिल के मालिक के खिलाफ है। आरोप है कि टेकरी गांव में हाईवे के पास मौजूद यह राइस मिल आसपास के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है।

शिकायत के मुताबिक राइस मिल की स्थापना के दौरान बिना अनुमति पेड़ों को काटा गया, जमीन समतल करने के लिए अवैध खुदाई की गई और सरकारी भूमि पर स्थित आरक्षित वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया गया। इसका सीधा असर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर पड़ा है।

आरोप है कि मिल संचालन से निकलने वाला कचरा पास की नदी को भी प्रदूषित कर रहा है। बताया गया है कि गांगुलपुरा बांध से निकलने वाली नदी में औद्योगिक अपशिष्ट डाला जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है। इसके अलावा राइस मिल स्टेट हाईवे के बेहद करीब चल रही है। ऐसे में मिलिंग प्रक्रिया के दौरान उड़ने वाली धूल से सड़क से गुजरने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

यह भी आरोप है कि राइस मिल ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी और सहमतियां नहीं ली हैं। न ही इन नियमों का पालन किया जा रहा है। ऐसे में इस इकाई का संचालन कानूनन अवैध है।

अब एनजीटी द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।

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