

कोरल रीफ मछली आबादी को बहाल करने से सतत उत्पादन लगभग 50 फीसदी बढ़ सकता है।
भूख और पोषण में सुधार : रीफ मछलियों की बहाली से भूख और पोषण की कमी वाले देशों में लाखों लोगों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध होगा।
वैश्विक आंकड़ों का विश्लेषण : अध्ययन में डोमिनिकन रिपब्लिक, पनामा, जमैका, केन्या, इंडोनेशिया समेत दुनिया भर के रीफ डेटा का विश्लेषण किया गया।
बहाली में समय और प्रबंधन: रीफ मछलियों की आबादी को पूरी तरह बहाल करने में छह से 50 साल का समय लग सकता, साथ ही मजबूत प्रबंधन आवश्यक।
पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा का लाभ: मछलियों की आबादी की बहाली से सिर्फ पारिस्थितिकी सुरक्षित नहीं होगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा, पोषण और मानव स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।
दुनिया की आबादी अब लगभग 8.3 अरब तक पहुंच गई है। इनमें से कई लोगों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक अब भूमि तक सीमित समाधान के बजाय सागर की ओर देख रहे हैं।
हाल ही में पनामा में स्थित स्मिथसोनियन ट्रॉपिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसटीआरआई) के वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बताया कि कोरल रीफ यानी प्रवाल भित्तियों में मछली की आबादी को पुनर्जीवित करने से सतत रूप से खाद्य उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इसका मतलब है कि यह समाधान लाखों लोगों के लिए भोजन उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
अत्यधिक मछली पकड़ने की समस्या
प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, दुनिया के कई कोरल रीफ वाले इलाकों में मछलियों की आबादी गंभीर रूप से घट गई है। इसका मुख्य कारण है अत्यधिक मछली पकड़ना। जब मछलियां लगातार पकड़ी जाती हैं, तो उनका उत्पादन और संख्या घट जाती है और ये क्षेत्र अपने प्राकृतिक उत्पादन स्तर तक नहीं पहुंच पाते।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि अध्ययन ने यह मापने की कोशिश की कि अत्यधिक मछली पकड़ने से कितनी खाद्य सामग्री की बर्बादी हो रही है और अगर मछली की आबादी को फिर से बढ़ाया जाए तो कितना फायदा हो सकता है।
सतत मछली उत्पादन में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी
अध्ययन में पाया गया कि यदि मछली की संख्या को फिर से बहाल किया जाए, तो कोरल रीफ मछली उत्पादन में लगभग 50 फीसदी की वृद्धि कर सकते हैं। इसका मतलब है कि प्रत्येक देश में 20,000 से 1.62 करोड़ तक अतिरिक्त मछलियां सालाना उपलब्ध हो सकती हैं।
सप्ताह में प्रति व्यक्ति आठ औंस मछली खाने की सलाह को ध्यान में रखते हुए यह वृद्धि लाखों लोगों की पोषण आवश्यकता पूरी कर सकती है।
सबसे बड़ा फायदा उन्हें होंगे जो पहले से भूख और पोषण की कमी से जूझ रहे हैं। खासकर अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश इस से सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे। अध्ययन के अनुसार इंडोनेशिया में सबसे अधिक संभावित वृद्धि देखने को मिल सकती है।
भूख और रीफ की बहाली का संबंध
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जहां भूख ज्यादा है, वहां मछली आबादी की बहाली से सबसे अधिक फायदा मिलेगा। शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि उन देशों में मछली की संख्या बढ़ाने पर अधिक मछली उपलब्ध हो सकती है, जहां पोषण की भारी कमी है।
इसका मतलब है कि रीफ मछली की बहाली सीधे तौर पर वहां के लोगों के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार ला सकती है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
रीफ मछली आबादी का अनुमान कैसे लगाया गया
वैज्ञानिकों ने दुनिया के अलग-अलग कोरल रीफ क्षेत्रों के आंकड़ों को इकट्ठा किया गया। अध्ययन में देशों जैसे डोमिनिकन रिपब्लिक, पनामा, जमैका, केन्या, मॉरीशस, ओमान, मेडागास्कर, फिलीपींस और इंडोनेशिया शामिल थे।
उन आंकड़ों के आधार पर सांख्यिकीय मॉडल बनाकर यह अनुमान लगाया गया कि वर्तमान में मछलियां कितनी हैं और अगर उनका सही प्रबंधन किया जाए तो उनकी संख्या कितनी बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी गणना की कि मछलियों को अधिकतम सतत उत्पादन स्तर पर पहुंचाने में कितना समय लगेगा। अनुमान के अनुसार यह समय छह साल से लेकर 50 साल तक हो सकता है, यह निर्भर करता है कि मछलियां कितनी कम हैं और मछली पकड़ने पर कितनी रोक लगाई गई है।
सतत प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा
रिपोर्ट में कहा गया है कि रीफ मछलियों की आबादी की बहाली केवल पर्यावरण संरक्षण का मामला नहीं है, बल्कि भूख और पोषण सुधारने का अवसर भी है। इसके लिए जरूरी है:
मछली पकड़ने के सख्त नियम और प्रबंधन
मछुआरों के लिए वैकल्पिक रोजगार
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समर्थन
यदि इन उपायों को अपनाया जाए, तो समुद्री मछली के प्राकृतिक संसाधनों का सतत लाभ उठाया जा सकता है।
इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि कोरल रीफ की मछलियों की बहाली से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ बनेगी। सतत रूप से मछली उत्पादन बढ़ाएगी।
लाखों लोगों की भूख और पोषण की समस्या को हल कर सकती है।
यह साबित करता है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और उचित प्रबंधन केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।