एनजीटी ने पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट को बताया ‘अस्पष्ट’, क्या है पूरा मामला

मामला पश्चिम बर्द्धमान में स्थित स्पॉन्ज आयरन उद्योग से जुड़ा है, जिसे बिना आवश्यक मंजूरी के गैरकानूनी रूप से बढ़ाया गया है।
फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट को अस्पष्ट बताते हुए कड़ी टिप्पणी की है।

  • न्यायाधीश अरुण कुमार त्यागी की बेंच ने इस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद इसे अस्पष्ट बताया और कहा कि इसमें केवल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की "कानूनी जिम्मेदारियों को निभाने में निष्क्रियता" ही दिखती है, जिसके कारण बोर्ड के खिलाफ उचित कार्रवाई की आवश्यकता है।

  • एनजीटी ने बोर्ड को वास्तविक स्थिति की जांच करने और छह हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

  • याचिकाकर्ता का आरोप है कि उद्योग ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया है और स्पॉन्ज आयरन का अत्यधिक प्रदूषक उपउत्पाद ‘डोलोचार’ खुले में जमा किया जा रहा है। यह डंपिंग यूनिट की सीमा के बाहर हो रही है। इस डंपिंग के चलते आसपास के इलाके की पर्यावरणीय स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 8 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एमबी स्पॉन्ज एंड पावर लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई रिपोर्ट को अस्पष्ट बताते हुए कड़ी टिप्पणी की है।

गौरतलब है कि एनजीटी के 9 सितंबर और 10 दिसंबर 2025 के आदेशों के पालन में पश्चिम बंगाल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल की थी। न्यायाधीश अरुण कुमार त्यागी की बेंच ने इस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद इसे अस्पष्ट बताया और कहा कि इसमें केवल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की "कानूनी जिम्मेदारियों को निभाने में निष्क्रियता" ही दिखती है, जिसके कारण बोर्ड के खिलाफ उचित कार्रवाई की आवश्यकता है।

एनजीटी ने बोर्ड को एक और मौका दिया है कि वह वास्तविक स्थिति की जांच करे, आवश्यक रोकथाम, दंडात्मक और सुधारात्मक कदम उठाए और छह हफ्ते के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसके अलावा, एमबी स्पॉन्ज एंड पावर लिमिटेड और पश्चिम बर्द्धमान के जिला मजिस्ट्रेट व कलेक्टर को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला पीओ हिजालगोरा, जिला पश्चिम बर्द्धमान में स्थित स्पॉन्ज आयरन उद्योग से जुड़ा है, जिसे बिना आवश्यक मंजूरी के गैरकानूनी रूप से बढ़ाया गया है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि उद्योग ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया है और स्पॉन्ज आयरन का अत्यधिक प्रदूषक उपउत्पाद ‘डोलोचार’ खुले में जमा किया जा रहा है। यह डंपिंग यूनिट की सीमा के बाहर हो रही है। इस डंपिंग के चलते आसपास के इलाके की पर्यावरणीय स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।

यद्यपि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यूनिट को बंद करने के आदेश जारी किए थे, फिर भी यह नियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रही है। एनजीटी की सख्त टिप्पणी और बोर्ड को दिए गए निर्देशों से यह स्पष्ट है कि पर्यावरणीय उल्लंघनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में अब कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एनजीटी के आदेश पर बिहार सरकार अब भी बेपरवाह, वैशाली के कचरा संयंत्र पर मांगा और वक्त

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बिहार सरकार ने वैशाली जिले की लक्ष्मीपुर ग्राम पंचायत में स्थापित कचरा प्रसंस्करण इकाई को हटाने के मामले में अब तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है।

24 अप्रैल 2025 को दिए आदेश पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए राज्य सरकार ने 7 जनवरी 2026 को एनजीटी से अतिरिक्त समय मांगा है। मामला बिहार में वैशाली जिले के जंदाहा प्रखंड, ग्राम पंचायत राज लक्ष्मीपुर, ब्रह्मबट्टा में मौजूद कचरा प्रसंस्करण इकाई से जुड़ा है। एनजीटी की पूर्वी पीठ ने इस प्रकरण में आगे की सुनवाई के लिए 29 जनवरी 2026 की तारीख तय की है।

याचिकाकर्ता ने इस मामले में शिकायत की थी कि बाया नदी के 100 से 200 मीटर के प्रतिबंधित बाढ़ क्षेत्र में पंचायत भवन का निर्माण किया गया है और खसरा नंबर 619 और 620 पर कचरा डंप किया जा रहा है। इस पर एनजीटी ने 24 अप्रैल 2025 को मामले का निपटारा करते हुए सख्त आदेश जारी किए थे।

अधिकरण ने वैशाली के जिलाधिकारी को निर्देश दिया था कि ग्राम पंचायत राज लक्ष्मीपुर में स्थापित कचरा प्रसंस्करण इकाई को 10 दिनों के भीतर हटाया जाए, पूरे क्षेत्र से मलबा साफ किया जाए और जमीन को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए। साथ ही आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि ग्राम पंचायत फिर से कचरा प्रसंस्करण इकाई स्थापित करना चाहती है, तो उसे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत निर्धारित साइटिंग मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।

एनजीटी ने जिलाधिकारी को 20 मई 2025 तक अनुपालन हलफनामा पूर्वी क्षेत्रीय पीठ के रजिस्ट्रार के समक्ष दाखिल करने का भी निर्देश दिया था।

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