हिमालय की सुरक्षा पर केंद्र गंभीर, राज्यों को दिए वैज्ञानिक अध्ययन के सुझाव

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एनजीटी में दाखिल जवाब में कहा है, हिमाचल और उत्तराखंड ने उच्च हिमालय क्षेत्र के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं
हिमालय की सुरक्षा पर केंद्र गंभीर, राज्यों को दिए वैज्ञानिक अध्ययन के सुझाव
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सारांश
  • पर्यावरण मंत्रालय ने एनजीटी में हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण पर जोर देते हुए राज्यों को तलछट परिवहन और निकासी पर वैज्ञानिक अध्ययन कराने की सलाह दी है।

  • मंत्रालय ने एनजीटी को जानकारी दी है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारें पहले ही अपने जवाब दाखिल कर चुकी हैं, जिनमें उन्होंने उच्च हिमालय की रक्षा और संरक्षण के लिए उठाए जा रहे प्रभावी कदमों का विवरण दिया है।

  • विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से बाढ़ के कारणों और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान होगी।

  • मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भूमि राज्य का विषय है, इसलिए इन शोधों के नतीजों के आधार पर नीतियां संबंधित राज्य सरकारों के साथ परामर्श करके ही बनाई जानी चाहिए।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 नवंबर 2025 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अपना पक्ष रखते हुए उच्च हिमालयी क्षेत्र के संरक्षण पर विस्तृत जानकारी दी है।

मंत्रालय ने बताया है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारें पहले ही अपने जवाब दाखिल कर चुकी हैं, जिनमें उन्होंने उच्च हिमालय की रक्षा और संरक्षण के लिए उठाए जा रहे प्रभावी कदमों का विवरण दिया है।

पर्यावरण मंत्रालय का कहना है कि तलछट के परिवहन और उसकी निकासी से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन राज्य सरकारें खुद करा सकती हैं।

इसके लिए वे जरूरत पड़ने पर वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, रुड़की और जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान जैसे देश के प्रमुख विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ले सकती हैं।

इन अध्ययनों से भीषण बाढ़ के कारणों को समझने और सबसे अधिक जोखिम वाले कैचमेंट क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

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मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भूमि राज्य का विषय है, इसलिए इन शोधों के नतीजों के आधार पर नीतियां संबंधित राज्य सरकारों के साथ परामर्श करके ही बनाई जानी चाहिए।

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गुरुग्राम के गढ़ी हरसारू से हटाया गया कचरा, डंपिंग पर पूरी तरह रोक: एचएसपीसीबी रिपोर्ट

गुरुग्राम के गढ़ी हरसारू गांव में ठोस कचरे की डंपिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और पूरे इलाके को साफ कर दिया गया है। यह जानकारी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने 27 नवंबर 2025 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल अपनी रिपोर्ट में दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक मानेसर नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 24 दिसंबर 2020 को हरियाणा सरकार की अधिसूचना के बाद 30 गांवों को मिलाकर मानेसर नगर निगम बनाया गया था।

निगम बनने के बाद से ही मानेसर का ठोस कचरा सेक्टर-8, आईएमटी मानेसर स्थित साइट पर डाला जाता रहा है।

हालांकि जून 2023 के बाद कचरा प्रोसेसिंग का ठेका खत्म हो गया। इसके बावजूद रोजाना कचरा सेक्टर-8 साइट पर ही जमा होता रहा, जिससे वहां भारी मात्रा में कचरा जमा हो गया। निगम ने गढ़ी हरसारू, वजीरपुर और भंगरोला जैसी जगहों पर नई साइट खोजने की कई कोशिशें की, लेकिन हर जगह स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के कारण कोई भी स्थान मंजूर नहीं हो पाया।

विकल्प न होने के कारण मानेसर नगर निगम को मजबूरन अस्थाई रूप से गढ़ी हरसारू गांव के पास कचरा डालना पड़ा। लेकिन रिपोर्ट में बताया गया है कि अब सेक्टर-8, आईएमटी मानेसर में फिर से कचरा प्रोसेसिंग शुरू हो चुकी है। इसी वजह से गढ़ी हरसारू में डंपिंग को पूरी तरह रोक दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नगर निगम ने गढ़ी हरसारू साइट से सारा कचरा उठाकर वापस सेक्टर-8 की प्रोसेसिंग साइट पर भेज दिया है।

क्षेत्र की ताजा तस्वीरें और गूगल लोकेशन भी एनजीटी को साक्ष्य के रूप में सौंपे गए हैं, जिनमें साइट को पूरी तरह खाली दिखाया गया है। देखा जाए तो यह कदम न केवल गांव के आसपास के पर्यावरण के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि स्थानीय लोगों की शिकायतों को भी दूर करता है।

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