

ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में उद्योगों की स्थापना, विस्तार और स्थानांतरण से जुड़े 410 लंबित आवेदनों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनकी समीक्षा और निपटान का रास्ता खोल दिया है।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रदूषण न फैलाने वाले उद्योगों को ही मंजूरी मिलेगी और पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी तथा पारदर्शी व्यवस्था के तहत होगी।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि टीटीजेड प्राधिकरण की प्रत्येक बैठक में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) और नीरी के विशेषज्ञों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। यदि किसी विशेषज्ञ को किसी उद्योग के प्रदूषणकारी होने पर आपत्ति होगी, तो उस आवेदन पर अदालत की अनुमति के बिना निर्णय नहीं लिया जा सकेगा।
जिन मामलों में सभी पक्षों की सर्वसम्मति होगी, उनका निपटारा सीधे कानून के अनुसार किया जाएगा, जबकि सभी फैसलों को सार्वजनिक कर नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाएंगी।
साथ ही, अदालत ने पेड़ों की कटाई से जुड़े दो प्रस्तावों—एनएचएआई के 5,812 और उत्तर प्रदेश पीडब्ल्यूडी के 188 पेड़ों—पर अंतिम निर्णय से पहले सीईसी से विशेषज्ञ राय लेने का निर्देश दिया है।
यह फैसला विकास और ताजमहल के पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में उद्योगों के विस्तार, स्थापना और स्थानांतरण से जुड़े मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और संतुलित फैसला सुनाया है।
शीर्ष अदालत ने ताज ट्रेपेजियम जोन प्राधिकरण को क्षेत्र के भीतर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के 400 से अधिक लंबित आवेदनों की समीक्षा और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। गौरतलब है कि इनमें से अधिकांश आवेदन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों द्वारा नए उद्योग स्थापित करने, मौजूदा इकाइयों के विस्तार या उनके स्थानांतरण की अनुमति के लिए किए गए हैं।
हालांकि साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल प्रदूषण न फैलाने वाले उद्योगों को ही मंजूरी दी जा सकेगी और पूरी प्रक्रिया पर्यावरणीय सुरक्षा के कड़े मानकों के तहत होगी। इस फैसले से जहां एक ओर स्थानीय उद्योगों और विकास को गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ताजमहल के पर्यावरण और ताज जोन की सुरक्षा के लिए बेहद कड़े नियम भी तय किए गए हैं।
विशेषज्ञों की निगरानी में होंगे फैसले
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि ताज ट्रेपेजियम जोन प्राधिकरण की हर बैठक में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) और नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) के एक-एक विशेषज्ञ की मौजूदगी अनिवार्य होगी। दोनों विशेषज्ञों की अनुपस्थिति में बैठक नहीं होगी।
यदि किसी आवेदन को लेकर दोनों में से कोई भी विशेषज्ञ यह राय देता है कि उद्योग 'दूषित या प्रदूषण फैलाने वाला' है, तो ऐसे आवेदन पर अदालत की विशेष अनुमति के बिना फैसला नहीं लिया जा सकेगा।
अदालत ने यह भी कहा कि जिन मामलों में टीटीजेड प्राधिकरण, सीईसी और नीरी के विशेषज्ञों की सर्वसम्मति होगी, उन्हें कानून के अनुसार सीधे मंजूरी दी जा सकती है और ऐसे मामले में अदालत से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
हालांकि, ऐसे सभी निर्णय सीईसी की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएंगे ताकि इच्छुक नागरिक अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज करा सकें। इन आपत्तियों पर ताज ट्रेपेजियम जोन प्राधिकरण, सीईसी और नीरी के विशेषज्ञ मिलकर विचार करेंगे।
पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि यह ताज ट्रेपेजियम जोन प्राधिकरण की जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक उद्योग से संबंधित सभी दस्तावेज, भौतिक रूप से सत्यापित रिपोर्ट और अन्य जरूरी जानकारी बैठक से पहले ही सीईसी और नीरी के विशेषज्ञों को उपलब्ध कराए।
साथ ही, हर अंतिम निर्णय की जानकारी पहले से एमिकस क्यूरी को भी दी जाएगी। यदि उन्हें किसी निर्णय पर न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता लगे तो मामला फिर से अदालत के समक्ष लाया जा सकेगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक टीटीजेड का विजन डॉक्यूमेंट, क्यूमुलेटिव इम्पैक्ट असेसमेंट और प्रदूषण न फैलाने वाले उद्योगों की अंतिम सूची तैयार नहीं हो जाती।
410 लंबित मामलों पर खुला रास्ता
बता दें कि ताज ट्रेपेजियम जोन प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट से 14 अक्टूबर 2024 को दिए आदेश (डब्ल्यूपी (सी) 13381/1984) के पैरा 27 में संशोधन या उसे वापस लेने की मांग की थी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में दिए अपने इस आदेश के पैरा 27 में कहा था कि अगले आदेश तक प्राधिकरण अदालत की अनुमति के बिना नए उद्योगों को लगाने या मौजूदा उद्योगों के विस्तार की अनुमति नहीं देगा।
प्राधिकरण ने अदालत को बताया था कि इस आदेश के कारण 410 आवेदन, जिनमें अधिकांश छोटे और मध्यम उद्यमों से जुड़े हैं, लंबे समय से लंबित पड़े हैं और उन पर प्राधिकरण कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त राहत प्रदान की है।
पेड़ों को काटे जाने के दो मामलों में अदालत ने सीईसी से मांगी राय
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों को काटे जाने से जुड़े दो आवेदनों पर भी विचार किया। इनमें पहला आवेदन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का था, जिसमें भरतपुर स्थित एनएच-21 (आगरा-भरतपुर-महुआ मार्ग) पर सड़क दुर्घटना संभावित आठ ब्लैक स्पॉट सुधारने के लिए 5,812 पेड़ों को काटे जाने की अनुमति मांगी गई है।
दूसरा आवेदन उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का था, जिसमें ताज ट्रेपेजियम जोन के भीतर स्थित एनएच-3 डिग्नेर नहर पटरी-गुटिला-गंगराऊआ मार्ग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 188 पेड़ों को काटे जाने और हटाने की अनुमति मांगी गई। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों मामलों में अंतिम निर्णय लेने से पहले इन आवेदनों को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) को भेजते हुए उसके विशेषज्ञों की राय मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र में लंबे समय से लंबित औद्योगिक आवेदनों की समीक्षा और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मार्ग खुल गया है।
हालांकि, अपने आदेश में अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ताजमहल और आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। विशेषज्ञों की निगरानी, सार्वजनिक आपत्तियों और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है।