

पश्चिम बंगाल के बाराबनी में ईंट-भट्ठों के संचालन को लेकर उठे सवालों के बीच राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) ने स्पष्ट किया है कि स्वतंत्र रूप से संचालित ईंट-भट्ठों की स्थापना या संचालन के लिए पूर्व पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य नहीं है।
प्राधिकरण ने 14 अक्टूबर 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल हलफनामे में कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के तहत ऐसी इकाइयों के लिए मंजूरी का प्रावधान नहीं है।
यह स्पष्टीकरण पश्चिम बर्धमान जिले के बाराबनी में कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन कर रहे ईंट-भट्ठों को बंद कराने की मांग से जुड़े मामले में सामने आया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ भट्ठे आवश्यक पर्यावरण मंजूरी के बिना और पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संचालन संबंधी सहमति प्राप्त किए बगैर चल रहे हैं।
हालांकि, पूर्व पर्यावरण मंजूरी से छूट का अर्थ नियमों से पूरी तरह मुक्ति नहीं है। ईंट-भट्ठों को लागू प्रदूषण नियंत्रण मानकों और अन्य पर्यावरणीय नियमों का पालन करना होगा। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बाराबनी की संबंधित इकाइयां इन नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं।
एसईआईएए के स्पष्टीकरण के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आरोपों की जांच और आवश्यक कार्रवाई का मुद्दा बना हुआ है।
पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र रूप से चलने वाले ईंट भट्ठों (स्टैंड-अलोन ब्रिक फील्ड) को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक स्पष्टीकरण सामने आया है। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए), पश्चिम बंगाल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष यह साफ कर दिया है कि ऐसे ईंट भट्ठों की स्थापना या संचालन के लिए एसईआईएए से पूर्व पर्यावरण मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं है।
गौरतलब है कि यह हलफनामा 14 अक्टूबर 2026 को एनजीटी के उस आदेश के पालन में दाखिल किया गया है, जो 19 अगस्त 2026 को पश्चिम बर्धमान जिले के बाराबनी इलाके में स्थित ईंट भट्ठों को लेकर जारी किया गया था।
राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) के मुताबिक, पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के तहत केवल उन्हीं परियोजनाओं और गतिविधियों के लिए पहले से पर्यावरणीय मंजूरी लेना जरूरी है, जिन्हें अधिसूचना में सूचीबद्ध किया गया है।
चूंकि इस सूची में स्वतंत्र रूप से संचालित ईंट-भट्ठे शामिल नहीं हैं, इसलिए इनके लिए एसईआईएए से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं है।
बाराबनी क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध और नियमों का पालन नहीं करने वाले ईंट-भट्ठों को बंद कराने की मांग को लेकर एनजीटी में आवेदन दाखिल किया गया था। आवेदन में आरोप लगाया गया कि क्षेत्र में कुछ ईंट-भट्ठे आवश्यक पर्यावरण मंजूरी प्राप्त किए बिना और पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संचालन की सहमति लिए बिना चल रहे हैं।
ऐसे में एसईआईएए का हलफनामा मुख्य रूप से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी की अनिवार्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करता है।
हालांकि, ईंट-भट्ठों के लिए राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से पूर्व मंजूरी जरूरी न होने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े दूसरे नियमों का पालन नहीं करना होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति से संबंधित आरोप इस मामले का अलग पहलू हैं।
बाराबनी में ईंट-भट्ठों के संचालन को लेकर उठे सवाल ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं, जब औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण और स्थानीय पर्यावरण पर उनके प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
अब इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित ईंट-भट्ठे लागू पर्यावरणीय और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।