अक्षय ऊर्जा ने लगाई रिकॉर्ड 693 गीगावाट की छलांग, फिर भी लक्ष्य के लिए दोगुनी करनी होगी रफ्तार: रिपोर्ट

2025 में दुनिया ने रिकॉर्ड 693 गीगावाट नई अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, लेकिन 2030 तक वैश्विक क्षमता को तीन गुना करने के लिए हर साल औसतन 1,200 गीगावाट नई क्षमता जोड़ने की आवश्यकता है।
अक्षय ऊर्जा ने लगाई रिकॉर्ड 693 गीगावाट की छलांग, फिर भी लक्ष्य के लिए दोगुनी करनी होगी रफ्तार: रिपोर्ट
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सारांश
  • दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रही है, लेकिन 2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए मौजूदा रफ्तार पर्याप्त नहीं है।

  • नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया ने रिकॉर्ड 693 गीगावाट नई अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी और साल के अंत तक कुल स्थापित क्षमता 5.15 टेरावाट पहुंच गई। इसके बावजूद 2030 के 11.2 टेरावाट के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 2026 से 2030 के बीच हर साल औसतन करीब 1,204 गीगावाट नई क्षमता जोड़नी होगी।

  • रिपोर्ट में ऊर्जा दक्षता की धीमी प्रगति को भी चिंता का कारण बताया गया है। 2025 में वैश्विक ऊर्जा तीव्रता में करीब 2 फीसदी सुधार हुआ, जबकि लक्ष्य हासिल करने के लिए सालाना करीब 4 फीसदी सुधार जरूरी है।

  • दूसरी बड़ी चुनौती बिजली ग्रिड की है। 2026 से 2030 के बीच ग्रिड में हर साल करीब 1 लाख करोड़ डॉलर निवेश की जरूरत होगी।

  • हालांकि सौर-पवन ऊर्जा की लागत प्रतिस्पर्धी हो रही है और बैटरी भंडारण की लागत 2010 के मुकाबले 95 फीसदी घट चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक सौर और पवन की हिस्सेदारी कुल स्थापित बिजली क्षमता में करीब 62 फीसदी हो सकती है।

  • ऐसे में स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए केवल नई परियोजनाएं नहीं, बल्कि मजबूत ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, विद्युतीकरण और तेज निवेश भी जरूरी होगा।

दुनिया में स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। सौर और पवन ऊर्जा लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं और बैटरी भंडारण की लागत भी तेजी से घट रही है। इसके बावजूद 2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने का वैश्विक लक्ष्य अभी भी काफी दूर है।

एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि 2025 में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बने हैं, लेकिन धरती के बढ़ते तापमान को थामने के लिए हमें अपनी रफ्तार को और कई गुना तेज करना होगा।

अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए), कॉप31 की अध्यक्षता कर रहे तुर्की और ग्लोबल रिन्यूएबल्स अलायंस (जीआरए) द्वारा जारी नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत तक दुनिया में कुल 5.15 टेरावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी थी। अकेले 2025 में इसमें रिकॉर्ड 693 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी गई है।

हालांकि 2030 तक वैश्विक अक्षय ऊर्जा क्षमता को 11.2 टेरावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो अभी भी काफी दूर है। यानी अगले चार वर्षों में दुनिया को न केवल मौजूदा रफ्तार बनाए रखनी होगी, बल्कि इसमें तेजी भी लानी होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2026 से 2030 के बीच हर साल औसतन करीब 1,204 गीगावाट नई अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ने की जरूरत है।

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बता दें कि यह लक्ष्य कॉप28 में हुई आम सहमति (यूएई कंसेंसस) का हिस्सा है, जिसमें 100 से अधिक देशों ने 2030 तक वैश्विक अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने और ऊर्जा दक्षता में सुधार की रफ्तार को दोगुना करने का संकल्प लिया था।

ऊर्जा दक्षता भी लक्ष्य से पीछे

यह रिपोर्ट सिर्फ अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की चुनौती को उजागर नहीं करती, बल्कि दुनिया की बढ़ती ऊर्जा मांग और ऊर्जा दक्षता में सुस्त सुधार की ओर भी संकेत देती है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में वैश्विक ऊर्जा तीव्रता में करीब 2 फीसदी सुधार हुआ। लेकिन 2030 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए इस रफ्तार को दोगुना करते हुए हर साल करीब 4 फीसदी सुधार करना होगा। यानी एक तरफ दुनिया को पहले से ज्यादा साफ-स्वच्छ बिजली पैदा करनी होगी, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा की बर्बादी कम करते हुए कम ऊर्जा में अधिक काम करने की क्षमता भी बढ़ानी होगी।

ग्रिड बने रहे बड़ी चुनौती

यह सही है कि सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें बिजली व्यवस्था से जोड़ने के लिए जरूरी ग्रिड उसी गति से नहीं बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि रिपोर्ट ने बिजली ग्रिड में निवेश को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 से 2030 के बीच दुनिया को हर साल करीब एक लाख करोड़ डॉलर ग्रिड में निवेश करने की जरूरत होगी। यह 2025 में हुए करीब 52,500 करोड़ डॉलर के निवेश के दोगुने के बराबर है।

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ग्रिड के साथ-साथ बैटरी, ऊर्जा भंडारण और बिजली व्यवस्था में लचीलेपन को बढ़ाना भी जरूरी होगा, ताकि सूरज न निकलने या हवा कम चलने के समय भी लोगों और उद्योगों को भरोसेमंद बिजली मिलती रहे।

सौर ऊर्जा बन रही बदलाव की रीढ़

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि 2025 में अधिकांश बाजारों में नई बिजली क्षमता के लिए अक्षय ऊर्जा सबसे अधिक लागत-प्रतिस्पर्धी विकल्प रही। इनमें सौर ऊर्जा सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है और लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है।

यही वजह है कि 2030 तक सौर और पवन जैसी परिवर्तनशील अक्षय ऊर्जा स्रोतों की कुल स्थापित क्षमता जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता से अधिक होने का अनुमान है। इनका हिस्सा कुल स्थापित बिजली क्षमता में करीब 62 फीसदी तक पहुंच सकता है, जो 2025 में करीब 35 फीसदी दर्ज किया गया था।

सच कहें तो इस बदलाव का मतलब केवल ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन नहीं है। साफ-सुथरी बिजली का बढ़ता इस्तेमाल परिवहन, घरों और उद्योगों में जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने का रास्ता भी खोल सकता है।

सस्ती होती बैटरियां दे रहीं उम्मीद

अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से 2025 के बीच बैटरी भंडारण की लागत में करीब 30 फीसदी कमी आई। 2010 के मुकाबले यह गिरावट करीब 95 फीसदी रही है। सस्ती बैटरियों के कारण सौर ऊर्जा को दिन-रात उपलब्ध बिजली में बदलना आसान हो रहा है।

रुझान दर्शाते हैं कि 2025 में दुनिया में बड़े स्तर पर स्थापित की गई सौर परियोजनाओं में करीब एक-चौथाई परियोजनाएं सौर ऊर्जा के साथ भंडारण को जोड़कर बनाई गईं।

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इससे यह संभावना भी मजबूत हो रही है कि भविष्य की बिजली व्यवस्था में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी भंडारण मिलकर चौबीसों घंटे भरोसेमंद बिजली उपलब्ध करा सकें।

बिजली की मांग बढ़ रही, बदलाव की रफ्तार भी बढ़ानी होगी

रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली की मांग अनुमान से अधिक तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में केवल नई अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं लगाना पर्याप्त नहीं होगा। बिजली की बढ़ती मांग को स्वच्छ ऊर्जा से पूरा करने के लिए ग्रिड, भंडारण और विद्युतीकरण पर एक साथ काम करना होगा।

इसके लिए डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल भी बढ़ाने की जरूरत रिपोर्ट में बताई गई है, ताकि बिजली की मांग और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का इस बारे में प्रेस विज्ञप्ति में कहना है, "अक्षय ऊर्जा हर साल नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन स्वच्छ ऊर्जा बदलाव की राह में मौजूद बाधाओं को दूर करने के लिए दुनिया को और तेजी से काम करना होगा।"

उनके मुताबिक, विकासशील देशों में निवेश बढ़ाना और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना इस बदलाव के लिए जरूरी है।

अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक फ्रांसेस्को ला कैमरा का कहना है, 2030 का लक्ष्य अभी हासिल किया जा सकता है, लेकिन ऊर्जा दक्षता पीछे रह रही है, बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है और ग्रिड का विस्तार अक्षय ऊर्जा की रफ्तार के साथ नहीं हो पाया है।

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2030 के बाद भी ऊर्जा बदलाव की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत होगी। कॉप31 के एजेंडे में 2035 तक वैश्विक अंतिम ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 35 फीसदी तक बढ़ाने के लक्ष्य पर चर्चा हो रही है। इसके लिए घरों, परिवहन और उद्योगों में विद्युतीकरण को तेज करना होगा। साथ ही ऐसी बिजली व्यवस्था तैयार करनी होगी जो सस्ती, भरोसेमंद और अक्षय ऊर्जा पर आधारित हो।

ऐसे में यह सही है कि दुनिया ने 2025 में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी छलांग लगाई है। लेकिन 2030 का लक्ष्य अब केवल नई परियोजनाएं लगाने का सवाल नहीं है।

यह इस बात की भी परीक्षा है कि क्या दुनिया सौर पैनलों और पवन टर्बाइनों से लेकर बिजली के तारों, बैटरियों, घरों और वाहनों तक पूरी ऊर्जा व्यवस्था को उतनी ही तेजी से बदल सकती है, जितनी तेजी से जलवायु संकट बढ़ रहा है।

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