

भारत ने 2026 की पहली छमाही में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 26 गीगावाट सौर और 2.9 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। इसके साथ ही देश की कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़कर 288 गीगावाट पहुंच गई, जिसमें अकेले सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 56 फीसदी है।
जेएमके रिसर्च के अनुसार, केवल छह महीनों में जुड़ी सौर क्षमता, पूरे 2025 में हुई कुल सौर स्थापना के करीब 70 फीसदी के बराबर है, जबकि सालाना आधार पर इसमें 43 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
इस उपलब्धि में 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' की बड़ी भूमिका रही, जिसके चलते रूफटॉप सोलर क्षमता 104 फीसदी बढ़कर 6.4 गीगावाट तक पहुंच गई और लाखों परिवार स्वच्छ ऊर्जा आंदोलन का हिस्सा बने।
गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य इस परिवर्तन के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक भारत 47 गीगावाट नई सौर और पवन क्षमता जोड़ सकता है। यह रफ्तार न केवल 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने का भरोसा बढ़ाती है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता, प्रदूषण में कमी और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की दिशा में भी भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। ऐसा ही कुछ 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में देखने को मिला, जब देश ने करीब 26 गीगावाट नई सौर ऊर्जा और करीब 3 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़कर नया रिकॉर्ड बनाया है।
यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देने के साथ-साथ प्रदूषण कम करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने और आने वाली पीढ़ियों को साफ, सुरक्षित व बेहतर पर्यावरण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
रिकॉर्ड रफ्तार से बढ़ी सौर ऊर्जा
इस बारे में जेएमके रिसर्च द्वारा किए नए विश्लेषण से पता चला है कि 2026 के पहले छह महीनों में ही देश में जितनी सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है, वह 2025 में जुड़ी कुल सौर क्षमता के करीब 70 फीसदी के बराबर है।
पिछले साल के मुकाबले सोलर क्षमता में 43 फीसदी की शानदार बढ़त देखी गई है, हालांकि पवन ऊर्जा की रफ्तार में पिछले साल से 16 फीसदी की कमी आई है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा जारी रुझानों के मुताबिक जून 2026 तक भारत की कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 288 गीगावाट तक पहुंच गई है। इसमें सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का है, जिसकी कुल अक्षय ऊर्जा में हिस्सेदारी करीब 56 फीसदी है।
इसके बाद 20 फीसदी के साथ पवन ऊर्जा दूसरे स्थान पर है, जबकि बड़ी पनबिजली परियोजनाओं का योगदान 18 फीसदी है। वहीं, बायो पावर 4 फीसदी और छोटी पनबिजली परियोजनाएं 2 फीसदी हिस्सेदारी के साथ देश की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को मजबूती दे रही हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है।
रूफटॉप सोलर की बड़ी उड़ान
इस कामयाबी का सबसे खूबसूरत पहलू आम नागरिकों की भागीदारी रही। इन छह महीनों में देश की छतों पर करीब 6.4 गीगावाट क्षमता के 'रूफटॉप सोलर' लगाए गए, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी अधिक (104 फीसदी की बढ़त) है।
इस बदलाव के पीछे 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' की सबसे बड़ी भूमिका रही है। इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' रही, जिसने लाखों परिवारों को अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
ऐसे में इस योजना ने जहां एक तरफ आम आदमी के बजट को सुधारा है, साथ ही उन्हें देश के विकास में साझीदार भी बना दिया है।
इसके अलावा, खेतों और दूर-दराज के इलाकों (ऑफ-ग्रिड सोलर) में भी करीब 842.9 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी गई है, जिसने ग्रामीण भारत को एक नई ताकत दी है। वहीं बड़े सोलर प्लांट (यूटिलिटी स्केल) के जरिए 19 गीगावाट बिजली ग्रिड में शामिल की गई, जो पिछले साल की समान अवधि से 32 फीसदी अधिक है।
इसी तरह पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी पहली छमाही के दौरान देश ने 2.9 गीगावाट नई क्षमता हासिल की है।
अक्षय ऊर्जा की दौड़ में कौन कहां?
देश को रोशन करने की इस मुहिम में राज्यों के बीच एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात सबसे आगे रहा, जिसने कुल क्षमता का 29 फीसदी (7.6 गीगावाट) हिस्सा हासिल किया।
इसके ठीक बाद राजस्थान 25 फीसदी (6.6 गीगावाट) और तमिलनाडु 9 फीसदी (2.4 गीगावाट) के साथ मजबूती से डटे हुए हैं।
इसी तरह पवन ऊर्जा में भी गुजरात ने 1.2 गीगावाट (43 फीसदी) के साथ बाजी मारी। इसके बाद महाराष्ट्र (17 फीसदी) और कर्नाटक ने 16 फीसदी का योगदान दिया है।
2030 के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
जेएमके रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के दौरान भारत कुल 47 गीगावाट नई सौर और पवन ऊर्जा क्षमता हासिल कर लेगा।
साल की पहली छमाही में हासिल यह रफ्तार साफ संकेत देती है कि भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यह उपलब्धि न केवल 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने का भरोसा मजबूत करती है।
साथ ही जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान की चुनौती से मुकाबला करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है।