कनाडा की प्राचीन चट्टानों में प्राकृतिक हाइड्रोजन की खोज: ऊर्जा के नए स्रोत की उम्मीद

कनाडा की प्राचीन चट्टानों में प्राकृतिक हाइड्रोजन की मौजूदगी की पहली बार प्रत्यक्ष माप से वैज्ञानिकों में नई ऊर्जा उम्मीद जगी
वैज्ञानिकों के अनुसार, कनाडियन शील्ड की चट्टानें लंबे समय से प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रियाओं से हाइड्रोजन बनाने में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, कनाडियन शील्ड की चट्टानें लंबे समय से प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रियाओं से हाइड्रोजन बनाने में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • कनाडा की प्राचीन चट्टानों में प्राकृतिक हाइड्रोजन की खोज से स्वच्छ ऊर्जा के नए स्रोत की उम्मीद बढ़ी।

  • टिमिन्स खदान के बोरहोल से लगातार हाइड्रोजन गैस निकलने का पता चला, जिससे प्राकृतिक उत्पादन प्रक्रिया की पुष्टि हुई।

  • शोध में पाया गया कि हजारों बोरहोल मिलकर हर साल बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन गैस उत्पादन कर सकते हैं।

  • वैज्ञानिकों के अनुसार कैनेडियन शील्ड की चट्टानें लंबे समय से प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रियाओं से हाइड्रोजन बनाने में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं।

  • प्राकृतिक हाइड्रोजन भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा का सस्ता स्रोत बन सकता है, जिससे औद्योगिक उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन निर्भरता घटेगी।

कनाडा के बेहद पुराने भू-भाग, जिसे कैनेडियन शील्ड कहा जाता है, वहां वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है। यहां की प्राचीन चट्टानों के भीतर प्राकृतिक रूप से हाइड्रोजन गैस बनती और जमा होती पाई गई है। यह खोज टोरंटो विश्वविद्यालय और ओटावा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है।

इस अध्ययन को दुनिया की प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार सीधे तौर पर जमीन के अंदर से निकलने वाली इस “व्हाइट हाइड्रोजन” को मापा और उसका विश्लेषण किया है।

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टिमिन्स खदान में मिला बड़ा संकेत

शोध के लिए वैज्ञानिकों ने कनाडा के टिमिन्स, ओंटारियो के पास एक चालू खदान का उपयोग किया। यहां कई गहरे बोरहोल (भूमिगत सुराख) हैं, जिनसे लगातार हाइड्रोजन गैस बाहर निकलती है।

अध्ययन में पाया गया कि एक बोरहोल से सालाना लगभग 0.008 मीट्रिक टन यानी करीब आठ किलोग्राम हाइड्रोजन निकलती है। यह मात्रा भले ही छोटी लगे, लेकिन यह लगातार कई वर्षों तक निकलती रहती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि पूरे क्षेत्र के लगभग 15,000 बोरहोल को जोड़ा जाए, तो यहां से हर साल 140 मीट्रिक टन से अधिक हाइड्रोजन प्राप्त हो सकती है।

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वैज्ञानिकों के अनुसार, कनाडियन शील्ड की चट्टानें लंबे समय से प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रियाओं से हाइड्रोजन बनाने में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं।

हाइड्रोजन कैसे बनती है

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह हाइड्रोजन किसी फैक्ट्री या मानव प्रक्रिया से नहीं बनती, बल्कि पृथ्वी के अंदर प्राकृतिक रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण बनती है। जब पानी और कुछ खास प्रकार की पुरानी चट्टानें आपस में प्रतिक्रिया करती हैं, तो हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है।

कैनेडियन शील्ड जैसी प्राचीन चट्टानों में यह प्रक्रिया बहुत लंबे समय से चल रही है। इन चट्टानों की उम्र अरबों साल है और इनमें ऐसे खनिज पाए जाते हैं जो हाइड्रोजन बनने में मदद करते हैं।

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वैज्ञानिकों के अनुसार, कनाडियन शील्ड की चट्टानें लंबे समय से प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रियाओं से हाइड्रोजन बनाने में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि पृथ्वी के नीचे मौजूद यह प्राकृतिक हाइड्रोजन एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत बन सकता है। उनके अनुसार, कनाडा के कई हिस्सों में ऐसी चट्टानें मौजूद हैं जो लगातार हाइड्रोजन बनाती रहती हैं।

एक अन्य शोधकर्ता के हवाले से कहा गया कि ये वही क्षेत्र हैं जहां पहले से ही तांबा, निकेल और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की खदानें मौजूद हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में हाइड्रोजन उत्पादन और खनन कार्य एक साथ किए जा सकते हैं।

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ऊर्जा और पर्यावरण पर असर

आज दुनिया में हाइड्रोजन का उपयोग बहुत बड़े स्तर पर किया जाता है। इसका उपयोग उर्वरक बनाने, स्टील उत्पादन और कई औद्योगिक कार्यों में होता है। लेकिन अभी ज्यादातर हाइड्रोजन को कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस से बनाया जाता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।

यदि प्राकृतिक हाइड्रोजन को बड़े स्तर पर निकाला जा सके, तो यह पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

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उत्तरी इलाकों के लिए उम्मीद

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज खासकर कनाडा के दूरदराज और ठंडे क्षेत्रों के लिए बहुत उपयोगी हो सकती है। वहां ऊर्जा पहुंचाना महंगा होता है। यदि स्थानीय रूप से हाइड्रोजन उपलब्ध हो, तो बिजली और ईंधन की लागत कम हो सकती है।

इसके अलावा, खदानों में काम करने वाले उद्योग भी अपनी ऊर्जा जरूरतों को इसी प्राकृतिक स्रोत से पूरा कर सकते हैं, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी।

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भविष्य की दिशा

हालांकि यह शोध बहुत उम्मीदें जगाता है, लेकिन वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है। यह समझना बाकी है कि दुनिया के किन हिस्सों में यह हाइड्रोजन कितनी मात्रा में उपलब्ध है और इसे व्यावसायिक रूप से कैसे निकाला जा सकता है।

फिर भी, यह खोज ऊर्जा के क्षेत्र में एक नए रास्ते की शुरुआत मानी जा रही है। अगर आगे और शोध सफल होते हैं, तो प्राकृतिक हाइड्रोजन भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।

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