हिमालयी तूफानों से समताप मंडल में बढ़ रही नमी, जलवायु संतुलन पर पड़ रहा असर: स्टडी रिपोर्ट

मानसून के दौरान हिमालयी क्षेत्र में बनने वाले शक्तिशाली तूफान अब केवल मौसम ही नहीं बदल रहे, बल्कि वे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में नमी को बढ़ाकर वैश्विक जलवायु संतुलन को भी प्रभावित कर रहे हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • हिमालय के ऊपर बनने वाले शक्तिशाली तूफान अब केवल बारिश, बाढ़ और भूस्खलन तक सीमित नहीं रह गए हैं। एक नई वैज्ञानिक स्टडी में खुलासा हुआ है कि ये तूफान पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल यानी समताप मंडल में नमी बढ़ाकर वैश्विक जलवायु संतुलन को भी प्रभावित कर रहे हैं।

  • चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून के दौरान हिमालय की दक्षिणी ढलानों पर बनने वाले तूफान इतनी ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं कि वे जलवाष्प और बर्फ के कणों को समताप मंडल तक पहुंचा देते हैं।

  • अध्ययन में पाया गया कि इन तूफानों से पैदा होने वाली गुरुत्वीय तरंगें वायुमंडल में उथल-पुथल बढ़ाती हैं, जिससे नमी ऊपरी परतों तक पहुंचती है। इसके चलते “अबव-एनविल सिरस प्लूम्स” नाम के बर्फीले बादल बनते हैं, जो लंबे समय तक समताप मंडल में बने रहते हैं और वहां नमी को और बढ़ाते हैं।

  • वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि समताप मंडल में बढ़ती नमी पृथ्वी के रेडिएशन संतुलन, ओजोन परत और मौसम चक्र को प्रभावित कर सकती है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा और गंभीर हो सकता है। अध्ययन के नतीजे जर्नल एडवांसेज इन एटमॉस्फेरिक साइंसेज में प्रकाशित हुए हैं।

हिमालय के ऊपर बनने वाले शक्तिशाली तूफान केवल बारिश और बाढ़ का कारण ही नहीं बनते, बल्कि वे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को भी प्रभावित कर रहे हैं।

चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ एटमॉस्फेरिक फिजिक्स से जुड़े वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि कैसे हिमालय के ऊपर बनने वाले शक्तिशाली तूफान निचले समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में नमी को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। गौरतलब है कि यह वायुमंडल की वह परत है, जो पृथ्वी की जलवायु, ओजोन परत और मौसम प्रणाली को नियंत्रित करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह परत वैश्विक जलवायु संतुलन, ओजोन परत की सुरक्षा और हवा के चक्र को नियंत्रित करती है। इस परत में वाष्प या नमी की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी का रेडिएशन संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल एडवांसेज इन एटमॉस्फेरिक साइंसेज में प्रकाशित हुए हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, समताप मंडल में मौजूद जलवाष्प पृथ्वी की गर्मी, ओजोन परत और मौसम के पैटर्न को प्रभावित करती है। वैज्ञानिक पहले से जानते थे कि शक्तिशाली तूफान नमी को वायुमंडल की ऊपरी परतों तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि, एशियाई मानसून के दौरान हिमालयी क्षेत्र में यह प्रक्रिया कैसे काम करती है, इसे लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं थी। नए अध्ययन में इसी पर प्रकाश डाला गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक

अध्ययन में क्लाउडसैट उपग्रह के हाई-रिजॉल्यूशन डेटा और कंप्यूटर मॉडलिंग का इस्तेमाल किया गया। इससे यह समझने में मदद मिली कि हिमालय किस तरह ऊपरी वायुमंडल की नमी और वैश्विक जलवायु को प्रभावित कर रहा है।

कैसे काम करता है हिमालय का यह 'वेदर इंजन'?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, एशियाई मानसून के दौरान हिमालय की दक्षिणी ढलानों पर बनने वाले शक्तिशाली तूफान इतनी ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं कि वे समताप मंडल में नमी और बर्फ के कण पहुंचाने लगते हैं।

अध्ययन से पता चला है कि ये बेहद शक्तिशाली तूफान गुरुत्वीय तरंगें (ग्रैविटी वेव्स) पैदा करते हैं। ये तरंगें टूटकर वायुमंडल में उथल-पुथल बढ़ाती हैं, जिससे जलवाष्प और बर्फ के कण वायुमंडल की अलग-अलग परतों के बीच आसानी से पहुंच पाते हैं।

यह भी सामने आया है कि ये तरंगें तेज हवाओं के असर को बढ़ाती हैं, जिससे 'अबव-एनविल सिरस प्लूम्स' नाम के बादलनुमा ढांचे बनते और फैलते हैं। ये संरचनाएं निचले समताप मंडल में लंबे समय तक बनी रहती हैं। बता दें कि यह ऊंचाई पर बनने वाले पतले और बर्फीले बादलों की एक विशेष संरचना होती है। ये आमतौर पर बेहद शक्तिशाली तूफानों के ऊपर दिखाई देती हैं।

जब कोई तूफान बहुत तेज होता है, तो उसके बादल वायुमंडल की ऊपरी परत तक पहुंच जाते हैं और ऊपर की ओर फैलने लगते हैं। इस फैले हुए हिस्से को “एनविल” यानी निहाई जैसा आकार कहा जाता है। इसके ठीक ऊपर बनने वाले पतले, धुएं जैसे बर्फीले बादलों को ‘अबव-एनविल सिरस प्लूम्स’ कहा जाता है।

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सरल शब्दों में, ये ऐसे ऊंचाई वाले बादल हैं जो संकेत देते हैं कि तूफान बेहद शक्तिशाली है और वह नमी तथा बर्फ के कणों को वायुमंडल की ऊपरी परतों तक पहुंचा रहा है।

इस बारे में अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता डॉक्टर वू का कहना है, "गुरुत्वीय तरंगों से बनने वाले ये लंबे समय तक टिके रहने वाले बर्फीले बादल, शुरुआती तूफान की तुलना में समताप मंडल में और अधिक जलवाष्प पहुंचा सकते हैं। इसका मतलब है कि ‘अबव-एनविल सिरस प्लूम्स’ अब समताप मंडल में बढ़ती नमी का एक महत्वपूर्ण संकेतक बन गए हैं।“

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बादलों की प्रक्रियाओं और क्षोभमंडल-समताप मंडल के बीच होने वाली गतिविधियों को और बेहतर समझने के लिए शोधकर्ता अब कई सैटेलाइट और जमीन आधारित आंकड़ों को एक साथ जोड़ने की योजना बना रहे हैं। इसमें एटमॉस्फियर प्रोफाइलिंग सिंथेटिक ऑब्जर्वेशन सिस्टम स्टेशन से मिलने वाले माप भी शामिल होंगे। यह स्टेशन 2017 में आईएपी द्वारा बनाया गया था और ल्हासा से करीब 90 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है।

सच कहें तो हिमालय के ऊपर उठते ये तूफान अब महज मौसम की घटनाएं नहीं रह गए हैं, बल्कि वे पृथ्वी के जलवायु संतुलन को प्रभावित करने वाली एक गंभीर वायुमंडलीय प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम और बढ़ती चरम घटनाओं को समझना, भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

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