

अत्यधिक गर्मी के दौरान भी वायुमंडल में नए सूक्ष्म कण बन सकते हैं, जो पहले असंभव माना जाता था।
सूरज की किरणें वायुमंडलीय गैसों को ऑर्गेनिक एसिड्स में बदलती हैं, जो स्व-संयोजन से छोटे कण बनाते हैं।
ये नए कण बादलों का निर्माण कम करते हैं, जिससे सूर्य की गर्मी सीधे पृथ्वी तक पहुंचती है।
50 नैनोमीटर से छोटे कण फेफड़ों और अंगों में प्रवेश कर ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन पैदा कर सकते हैं।
इस खोज से जलवायु मॉडल सुधारने, लू का पूर्वानुमान लगाने और स्वास्थ्य नीतियों में सुधार संभव होगा।
हाल ही में एक अध्ययन में यह खोज हुई है कि जब तापमान बहुत अधिक होता है, जैसे 40 डिग्री सेल्सियस तक, तब भी वायु में नए सूक्ष्म कण (नैनोपार्टिकल्स) बन सकते हैं। इसे न्यू पार्टिकल फॉर्मेशन (एनपीएफ) कहा जाता है।
पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि गर्मी के समय गैसें अधिक वाष्पित हो जाती हैं और कण बनने की प्रक्रिया रुक जाती है। लेकिन साइंस पत्रिका में प्रकाशित यह नया अध्ययन दिखाता है कि गर्मी में भी कण बन सकते हैं। यह खोज हमारी समझ को बदल सकती है कि हवा में कण कैसे बनते हैं और उनका प्रभाव हमारे मौसम और स्वास्थ्य पर क्या होता है।
नए कण कैसे बनते हैं?
लू या हीटवेव के दौरान सूरज की किरणें वायुमंडल में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करती हैं। इन प्रतिक्रियाओं में वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (वीओसीएस) बदलकर ऑर्गेनिक एसिड्स बन जाते हैं।
इसके बाद यह एसिड अपने आप छोटे समूहों में जुड़ जाते हैं। इसे मॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली कहते हैं। ये छोटे समूह धीरे-धीरे बढ़कर तीन नैनोमीटर के कण बन जाते हैं।
इस अध्ययन में पता चला कि इन नए कणों के मुख्य निर्माण खंड मल्टीफंक्शनल कार्बॉक्सिलिक एसिड हैं।
वायुमंडलीय प्रभाव
वायुमंडल में छोटे कण बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं, ये सूर्य की किरणों को परावर्तित करते हैं और पृथ्वी को ठंडा रखते हैं। बादलों के बनने का काम करते हैं।
लेकिन नए बने कण कम हाइज्रोस्कोपिक हैं। इसका मतलब है कि ये आसानी से पानी नहीं आकर्षित करते और बादल बनाने में सक्षम नहीं होते। इस वजह से कम बादल अधिक सूर्य की किरणें धरती तक पहुंचती हैं। अधिक गर्मी और नए कण बनते हैं।
यह एक फीडबैक लूप बनाता है जो गर्मी को और बढ़ाता है।
कैसे किया गया अध्ययन?
शोधकर्ताओं ने सेंट्रल टेक्सास में लू के दौरान हवा की लगातार निगरानी की। अचानक छोटे कणों के बढ़ने को देखा गया। मास स्पेक्ट्रोमेट्री से कणों की रासायनिक संरचना का पता लगाया गया।
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छोटे कण (तीन से 10 एनएम) मुख्य रूप से मल्टीफंक्शनल कार्बॉक्सिलिक एसिड्स हैं। बड़े कण अधिक सल्फ्यूरिक एसिड और एमाइंस वाले होते हैं।
स्वास्थ्य पर असर
छोटे कण, जो 50 एनएम से भी छोटे होते हैं, हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं। ये फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं। खून और अन्य अंगों में प्रवेश कर सकते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा कर सकते हैं जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेंगी, यह स्वास्थ्य के खतरों को भी बढ़ा सकती हैं।
जलवायु और नीति पर महत्व
यह खोज हमारी जलवायु और स्वास्थ्य नीतियों के लिए अहम है, क्योंकि जलवायु मॉडल में सुधार कर सकती है। वायुमंडलीय कणों के व्यवहार की अनिश्चितता को कम कर सकती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को मार्गदर्शन दे सकती है। भविष्य में अधिक लू और वायु प्रदूषण के प्रभावों का पूर्वानुमान आसान बना सकती है।
सूर्य की तेज किरणें, गर्मी और वायुमंडलीय रसायन मिलकर छोटे कणों का निर्माण करते हैं। ये कण बादल बनाने में कम सक्षम होते हैं, जिससे गर्मी और बढ़ती है। इस खोज से पता चलता है कि लू केवल मौसम को गर्म नहीं करतीं, बल्कि नई वायुमंडलीय प्रक्रियाओं को भी सक्रिय करती हैं, जो हमारे ग्रह और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जानकारी से जलवायु परिवर्तन की समझ और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में सुधार होगा।