2025 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी: मध्य एशिया और यूरोप में जलवायु संकट की चेतावनी

अध्ययन से पता चला कि 2025 में 70 से अधिक देशों में 120 मासिक तापमान रिकॉर्ड टूटे
2025 में मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र और उत्तरी यूरोप ने अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया।
2025 में मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र और उत्तरी यूरोप ने अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया।
Published on
सारांश
  • 2025 में मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र और उत्तरी यूरोप ने अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया।

  • ताजिकिस्तान में तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक रहा, जो विश्व में सबसे असामान्य वृद्धि मानी गई।

  • सहेल देशों में मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी की घटनाएं दस गुना बढ़ गई हैं।

  • यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, जंगल की आग, सूखा और पानी की कमी जैसी गंभीर समस्याएं सामने आई।

यूरोपीय कोपरनिकस जलवायु कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 कई क्षेत्रों के लिए अब तक का सबसे गर्म साल साबित हुआ। खास तौर पर मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र (अफ्रीका) और उत्तरी यूरोप में तापमान ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। हालांकि वैश्विक औसत तापमान के अनुसार 2025 तीसरा सबसे गर्म साल माना जा रहा है, लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में हालात इससे कहीं ज्यादा गंभीर रहे।

पिछले 12 महीनों का औसत तापमान समुद्र और जमीन दोनों को मिलाकर देखा जाता है। इससे कुछ क्षेत्रों में हुई अत्यधिक गर्मी छिप जाती है। कई गरीब देशों में मौसम से जुड़ा पूरा और सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं होते, इसलिए कोपरनिकस के जलवायु मॉडल, लगभग 20 उपग्रहों और हजारों मौसम केंद्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। कोपरनिकस यह आंकड़े 1970 से अब तक हर घंटे का रिकॉर्ड रखता है।

यह भी पढ़ें
ग्लोबल वार्मिंग के कारण शहरों में बढ़ सकती हैं आग लगने की घटनाएं
2025 में मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र और उत्तरी यूरोप ने अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया।

इस विस्तृत अध्ययन से पता चला कि 2025 में 70 से अधिक देशों में 120 मासिक तापमान रिकॉर्ड टूटे।

मध्य एशिया में भीषण गर्मी

मध्य एशिया के सभी देशों ने 2025 में अपना वार्षिक तापमान रिकॉर्ड तोड़ा। इस क्षेत्र में ताजिकिस्तान सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यह एक पहाड़ी और भूमि से घिरा देश है, जहां केवल 41 प्रतिशत लोगों को ही सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध है।

यह भी पढ़ें
ग्लोबल वार्मिंग से एशिया के पर्वतों में बर्फबारी में 54 प्रतिशत की कमी के आसार
2025 में मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र और उत्तरी यूरोप ने अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया।

ताजिकिस्तान में तापमान सामान्य (1981–2010 के औसत) से तीन डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा, जो दुनिया में सबसे अधिक असामान्य वृद्धि मानी गई। मई से लेकर नवंबर को छोड़कर हर महीने तापमान के नए रिकॉर्ड बने। इसके पड़ोसी देश जैसे कजाखस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान में भी तापमान औसत से दो से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

साहेल क्षेत्र में बढ़ती मुश्किलें

अफ्रीका के साहेल क्षेत्र और पश्चिमी अफ्रीका के कई देशों में भी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी देखी गई। माली, नाइजर, नाइजीरिया, बुर्किना फासो और चाड जैसे देशों में तापमान सामान्य से 0.7 से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

यह भी पढ़ें
वैज्ञानिकों की चेतावनी: ग्लोबल वार्मिंग के बाद आ सकता है हिमयुग!
2025 में मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र और उत्तरी यूरोप ने अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया।

नाइजीरिया में पिछले 12 महीने अब तक के सबसे गर्म रहे। अन्य देशों में भी यह अवधि चौथे सबसे गर्म वर्षों में शामिल रही। वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (डब्ल्यूडब्ल्यूए) नेटवर्क के वैज्ञानिकों के अनुसार, मानवजनित गतिविधियों से पैदा हुई जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी की घटनाएं 2015 के बाद से लगभग 10 गुना अधिक हो गई हैं।

साहेल क्षेत्र पहले से ही गरीबी, खाद्य संकट और हिंसक संघर्षों से जूझ रहा है। बढ़ता तापमान इन समस्याओं को और गंभीर बना रहा है, जिससे यहां के लोग सबसे अधिक खतरे में हैं।

यह भी पढ़ें
ग्लोबल वार्मिंग से बारिश के पैटर्न पर पड़ रहा है भारी असर, नए शोध में किया गया खुलासा
2025 में मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र और उत्तरी यूरोप ने अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया।

यूरोप में झुलसाने वाली गर्मी

यूरोप के लगभग 10 देश अपने वार्षिक तापमान रिकॉर्ड तोड़ने के बहुत करीब पहुंच गए हैं। इसका मुख्य कारण 2025 की असाधारण गर्मी वाली गर्मियां रहीं।

स्विट्जरलैंड और बाल्कन देशों में गर्मियों का तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। स्पेन, पुर्तगाल और ब्रिटेन में अब तक की सबसे गर्म गर्मी दर्ज की गई। अत्यधिक गर्मी के कारण बड़े पैमाने पर जंगलों में आग लगी

यह भी पढ़ें
ग्लोबल वार्मिंग को और तेजी से बढ़ा सकती हैं तूफानी गतिविधियां
2025 में मध्य एशिया, साहेल क्षेत्र और उत्तरी यूरोप ने अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया।

ब्रिटेन में पिछले 100 वर्षों की सबसे शुष्क वसंत ऋतु देखी गई, जिससे पानी की भारी कमी हो गई। हालांकि उत्तरी यूरोप जून के अंत में आई भीषण लू या हीटवेव से बच गया, लेकिन वहां असामान्य रूप से गर्म शरद ऋतु देखी गई। नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड में पिछले 12 महीने अब तक के दो सबसे गर्म वर्षों में शामिल होने की उम्मीद है।

2025 का अनुभव साफ दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की समस्या नहीं रही, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुकी है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके प्रभाव अलग-अलग रूप में दिख रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और संवेदनशील देशों को हो रहा है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in