समुद्र की गहराई में मिला 'मृत' माना गया 60 साल पुराना जीवित कोरल गार्डन

समुद्र की गहराई में मिला 60 साल पुराना जीवित कोरल गार्डन, वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक से खोजा भूला हुआ समुद्री खजाना, नई उम्मीदें जगीं।
बेनिन के समुद्र में 50 मीटर गहराई पर मिला जीवित कोरल गार्डन, जिसे वैज्ञानिकों ने छह दशक पहले मृत मान लिया था।
बेनिन के समुद्र में 50 मीटर गहराई पर मिला जीवित कोरल गार्डन, जिसे वैज्ञानिकों ने छह दशक पहले मृत मान लिया था।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • बेनिन के समुद्र में 50 मीटर गहराई पर मिला जीवित कोरल गार्डन, जिसे वैज्ञानिकों ने छह दशक पहले मृत मान लिया था।

  • पुराने समुद्री रिकॉर्ड और आधुनिक सोनार तकनीक से वैज्ञानिकों ने खोजा छिपा हुआ मेसोफोटिक कोरल इकोसिस्टम।

  • अंडरवाटर कैमरों में दिखा स्वस्थ समुद्री संसार, जहां कोरल के साथ कई दुर्लभ मछलियां भी पाई गईं।

  • नई खोज से संकेत मिला कि पश्चिमी अफ्रीका के समुद्रों में कई और अनदेखे कोरल क्षेत्र मौजूद हो सकते हैं।

  • वैज्ञानिक अब इस रहस्यमयी रीफ का इतिहास समझने और समुद्री जैव विविधता की नई जानकारी जुटाने में लगे हैं।

अफ्रीका के पश्चिमी तट पर स्थित बेनिन के समुद्र में वैज्ञानिकों को एक ऐसी खोज की है, जिसने समुद्री दुनिया के बारे में हमारी सोच को बदल दिया है। वैज्ञानिकों ने समुद्र की 50 मीटर से अधिक गहराई में एक ऐसा कोरल गार्डन खोजा है, जिसे करीब 60 साल पहले बदलती जलवायु व अन्य कारणों के चलते मृत मान लिया गया था। आधुनिक सोनार तकनीक और पानी के अंदर काम करने वाले कैमरों की मदद से पता चला कि यह क्षेत्र आज भी जीवित और सक्रिय है।

1960 के दशक में समुद्री सर्वेक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने इस जगह पर गहरे पानी में एक संभावित रीफ यानी प्रवाल भित्ति के संकेत देखे थे। उस समय उनका अनुमान था कि यह रीफ शायद अब जीवित नहीं है। कई दशकों तक इस जगह पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों को शक हुआ कि यहां एक गहरा समुद्री कोरल क्षेत्र मौजूद हो सकता है।

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आधुनिक तकनीक से हुई खोज

बेनिन के समुद्री वैज्ञानिक की टीम ने पुराने रिकॉर्ड की मदद से इस क्षेत्र की दोबारा तलाश शुरू की। उन्होंने समुद्र के लगभग 11.5 किलोमीटर हिस्से का सोनार से अध्ययन किया। सोनार में समुद्र की सतह के नीचे कुछ ऐसी संरचनाएं दिखाई दीं, जो कोरल रीफ जैसी लग रही थीं।

इसके बाद वैज्ञानिकों ने पानी के अंदर जाने वाले ड्रोन और नेशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजी लैब के डीप सी कैमरा सिस्टम की मदद से इन जगहों की जांच की। जब कैमरों से समुद्र की वास्तविक तस्वीरें सामने आईं, तो वैज्ञानिकों को यकीन नहीं हुआ कि इतने वर्षों बाद भी वहां एक जीवित समुद्री संसार मौजूद है।

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फ्रंटियर्स इन मरीन साइंस में प्रकाशित शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि यह अभियान आसान नहीं था। समुद्र में लंबे समय तक काम करना पड़ा, तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा और काफी अनिश्चितता भी थी। लेकिन जब सोनार पर रीफ जैसी आकृतियां दिखीं और बाद में कैमरे से उन्हें देखा गया, तो यह टीम के लिए बेहद रोमांचक क्षण था।

गहराई में छिपा है अनोखा समुद्री जीवन

यह कोरल क्षेत्र सामान्य उथले पानी वाले कोरल रीफ से अलग है। वैज्ञानिक इसे “मेसोफोटिक कोरल इकोसिस्टम” कहते हैं। ऐसे कोरल समुद्र के उन हिस्सों में रहते हैं जहां सूर्य की रोशनी बहुत कम पहुंचती है।

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आमतौर पर लोग कोरल रीफ को उथले और साफ पानी से जोड़ते हैं, लेकिन गहरे समुद्र में भी कई तरह के कोरल समुदाय जीवित रह सकते हैं। ये हमेशा एक बड़े और लगातार फैले हुए रीफ की तरह नहीं होते, बल्कि अलग-अलग जगहों पर छोटे-छोटे समूहों के रूप में पाए जाते हैं।

कैमरे से मिली तस्वीरों में वैज्ञानिकों ने आठ प्रकार के कोरल और आठ प्रजातियों की मछलियां देखीं। इनमें गोल्डन अफ्रीकन स्नैपर, ब्लैकबार सोल्जरफिश, गिनी एंजेलफिश, वेस्ट अफ्रीकन गोटफिश और अन्य समुद्री जीव शामिल थे। ये मछलियां कोरल के बीच भोजन करती और आश्रय लेती दिखाई दीं।

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क्या यह रीफ कभी मरा ही नहीं था?

वैज्ञानिकों के सामने अभी भी कई सवाल हैं। उनके पास इस बात का प्रमाण नहीं है कि 1960 के दशक में यह रीफ सच में मर गया था और बाद में दोबारा जीवित हुआ, या फिर उस समय वैज्ञानिक इसकी स्थिति को सही तरीके से समझ नहीं पाए थे।

अभी तक वैज्ञानिकों ने यहां से कोरल के नमूने भी नहीं लिए हैं, इसलिए कोरल की प्रजातियों की पूरी पुष्टि बाकी है। आगे के अध्ययन से ही पता चलेगा कि इस समुद्री क्षेत्र का इतिहास क्या रहा है।

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समुद्र में छिपे हो सकते हैं और भी रहस्य

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज अकेली नहीं हो सकती। दुनिया के कई समुद्री क्षेत्र अभी भी पूरी तरह खोजे नहीं गए हैं। खासकर पश्चिमी अफ्रीका के तटीय इलाकों में समुद्री जीवन के बारे में जानकारी बहुत सीमित है।

शोध के अनुसार, अगर 60 साल पुराने एक भूले हुए स्थान पर दोबारा जाकर जीवित कोरल मिल सकते हैं, तो संभव है कि समुद्र में ऐसे कई और क्षेत्र मौजूद हों जिनकी अभी तक पहचान नहीं हुई है। हालांकि हर नए स्थान की पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही की जा सकती है।

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भविष्य में और अध्ययन की जरूरत

वैज्ञानिक अब इस क्षेत्र में और बड़े स्तर पर शोध करना चाहते हैं। वे समुद्र में जाकर नमूने लेना, अधिक क्षेत्रों की जांच करना और इस कोरल के विकास को समझना चाहते हैं।

यह खोज बताती है कि समुद्र की गहराइयों में अभी भी कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जिनके बारे में इंसानों को बहुत कम जानकारी है। एक ऐसा कोरल गार्डन जिसे दशकों पहले खत्म समझ लिया गया था, आज समुद्री जीवन की नई उम्मीद बनकर सामने आया है।

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