रिकॉर्ड में सबसे गर्म ला नीना वर्ष बना 2025, 77 करोड़ लोगों ने झेली भीषण गर्मी: रिपोर्ट

बर्कले अर्थ द्वारा किए विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि पृथ्वी की 9.1 फीसदी सतह ने अब तक के सबसे अधिक वार्षिक औसत तापमान का सामना किया
भीषण गर्मी में अपनी तैयार पैदावार को संजोते किसान; फोटो: आईस्टॉक
भीषण गर्मी में अपनी तैयार पैदावार को संजोते किसान; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 2025 में ला नीना के बावजूद, धरती ने रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का सामना किया। बर्कले अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, यह साल तीसरा सबसे गर्म और सबसे गर्म ला नीना वर्ष रहा।

  • 2025 में धरती का औसत तापमान सामान्य से 1.44 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जो 2024 और 2023 के बाद तीसरा सबसे ऊंचा स्तर है।

  • रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में पृथ्वी की 9.1 फीसदी सतह ने अब तक का सबसे अधिक वार्षिक औसत तापमान दर्ज किया। इसमें 10.6 फीसदी भूभाग रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चपेट में रहे, जबकि 8.3 फीसदी महासागरीय क्षेत्र भी अब तक के सबसे गर्म स्तर पर पहुंचे।

  • कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की तरह ही बर्कले अर्थ ने भी पाया कि पिछले 11 साल रिकॉर्ड में दर्ज 11 सबसे गर्म साल रहे हैं। इनमें से सबसे गर्म तीन साल 2023, 2024 और 2025 में सामने आए हैं।

  • ला नीना जैसी ठंडी घटनाओं के बावजूद धरती का यूं तपना साफ संकेत है कि जलवायु संकट अब अपवाद नहीं, बल्कि नई सामान्य स्थिति बनता जा रहा है।

2025 की शुरुआत और अंत दोनों ही ला नीना के साथ हुए। ला नीना जिसे आमतौर पर वैश्विक औसत तापमान में कमी लाने वाली जलवायु स्थिति के रूप में जाना जाता है। इसके बावजूद, बर्कले अर्थ की ग्लोबल टेम्परेचर रिपोर्ट 2025 के मुताबिक यह साल न केवल जलवायु रिकॉर्ड में तीसरा सबसे गर्म रहा, बल्कि रिकॉर्ड पर दर्ज अब तक का सबसे गर्म ला नीना वर्ष भी साबित हुआ।

ला नीना, अल नीनो दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की ठंडी अवस्था है, जो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बनती है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम को प्रभावित करती है।

गौरतलब है कि ला नीना आमतौर पर वैश्विक औसत तापमान को कुछ हद तक नीचे लाने में मदद करती है। इसके बावजूद 2025 में धरती का औसत तापमान सामान्य से 1.44 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जो 2024 और 2023 के बाद तीसरा सबसे ऊंचा स्तर है।

दो बार लौटा ला नीना, फिर भी नहीं थमी गर्मी

रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में ला नीना की स्थिति बनी, जो मार्च 2025 तक जारी रही। इसके बाद अप्रैल में हालात तटस्थ हो गए, जब न तो ला नीना और न ही ईएनएसओ की गर्म अवस्था 'अल नीनो' का असर दिखा।

लेकिन सितंबर 2025 में ला नीना ने फिर वापसी की। हालांकि यह स्थिति अब तेजी से कमजोर पड़ रही है और 2026 में गर्मियों के सीजन तक अल नीनो के उभरने की संभावना जताई जा रही है।

धरती के बड़े हिस्से ने झेली रिकॉर्ड तोड़ गर्मी

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में पृथ्वी की 9.1 फीसदी सतह ने अब तक का सबसे अधिक वार्षिक औसत तापमान दर्ज किया। इसमें 10.6 फीसदी भूभाग रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चपेट में रहे, जबकि 8.3 फीसदी महासागरीय क्षेत्र भी अब तक के सबसे गर्म स्तर पर पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, यह भीषण गर्मी उन इलाकों में ज्यादा रही जहां दुनिया की बड़ी आबादी रहती है।

बर्कले अर्थ द्वारा प्रेस को दिए बयान के अनुसार, करीब 77 करोड़ लोगों, यानी दुनिया की 8.5 फीसदी आबादी ने 2025 में अपने-अपने क्षेत्रों का अब तक का सबसे गर्म साल झेला। यह असर खास तौर पर एशिया में ज्यादा देखा गया। हैरानी की बात यह रही कि दुनिया के किसी भी हिस्से में 2025 को रिकॉर्ड ठंडा साल नहीं पाया गया।

लगातार बढ़ती गर्मी का खतरनाक संकेत

कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की तरह ही बर्कले अर्थ ने भी पाया कि पिछले 11 साल रिकॉर्ड में दर्ज 11 सबसे गर्म साल रहे हैं। इनमें से सबसे गर्म तीन साल 2023, 2024 और 2025 में सामने आए हैं।

बता दें कि विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने भी पुष्टि की है कि 2025 पिछले 176 वर्षों के जलवायु इतिहास के तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा। इस दौरान वैश्विक स्तर पर सतह का औसत तापमान औद्योगिक काल (1850–1900) से पहले की तुलना में 1.44 (± 0.13) डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

डब्ल्यूएमओ रिपोर्ट के अनुसार 2023, 2024 और 2025, तीनों अब तक के सबसे गर्म साल साबित हुए हैं। इन तीन वर्षों का औसत तापमान औद्योगिक काल से पहले की तुलना में 1.48 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया, जो डेढ़ डिग्री सेल्सियस की लक्ष्मण रेखा के करीब है।

कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के वार्षिक आंकड़ों के मुताबिक, 2023 से 2025 के बीच का औसत तापमान औद्योगिक काल से पहले की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा।

वैज्ञानिकों ने चेताया है कि 2023 से 2025 के बीच तापमान में आई तेज छलांग यह संकेत देती है कि अब भविष्य की गर्मी का अनुमान सिर्फ पुराने रुझानों से नहीं लगाया जा सकता। कुछ नए कारक हाल के वर्षों में तापमान को और तेजी से बढ़ा रहे हैं।

ला नीना के बावजूद तपते रहे समुद्र

जर्नल एडवांसेज इन एटमोस्फियरिक साइंसेज में प्रकाशित एक नए अध्ययन के मुताबिक, 2025 में महासागर में जमा गर्मी भी रिकॉर्ड स्तर के करीब रही। 2024 से 2025 के बीच, समुद्र की ऊपरी 2000 मीटर परत में जमा गर्मी करीब 23 जेटाजूल बढ़ गई।

अध्ययन बताता है कि दुनिया के करीब 33 फीसदी महासागर क्षेत्र अपने इतिहास के तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहे, जबकि 57 फीसदी क्षेत्र शीर्ष पांच सबसे गर्म स्थितियों में पाए गए। इनमें उष्णकटिबंधीय अटलांटिक, भूमध्य सागर, उत्तर हिंद महासागर और दक्षिणी महासागर शामिल हैं।

दुनिया के करीब 16 फीसदी महासागरीय क्षेत्र में तो स्थिति और भी ज्यादा खराब रही जहां 2025 में अब तक की सबसे अधिक गर्मी दर्ज हुई। ला नीना जैसी ठंडी घटनाओं के बावजूद धरती का यूं तपना साफ संकेत है कि जलवायु संकट अब अपवाद नहीं, बल्कि नई सामान्य स्थिति बनता जा रहा है।

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