वैज्ञानिकों ने क्रिस्टलीय सेमीकंडक्टर में बेहद बड़ा थर्मोइलेक्ट्रिक प्रभाव खोजा, जिसने ठोस पदार्थों में वोल्टेज की पुरानी सीमा को चुनौती दी।
स्कैंडियम नाइट्राइड की पतली फिल्मों ने तापमान अंतर को असाधारण रूप से बड़े विद्युत वोल्टेज में बदलकर वैज्ञानिकों को चौंका दिया।
मैग्नीशियम डोपिंग से तैयार विशेष सेमीकंडक्टर में सीबेक गुणांक सामान्य पदार्थों की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक दर्ज किया गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खोज बेहद संवेदनशील तापमान सेंसर, गर्मी डिटेक्टर और भविष्य की क्वांटम सेंसिंग तकनीक में उपयोगी होगी।
अध्ययन ने दिखाया कि नियंत्रित अव्यवस्था ठोस क्रिस्टलों में असाधारण थर्मोइलेक्ट्रिक गुण पैदा करने का नया रास्ता खोल सकती है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसे क्रिस्टलीय सेमीकंडक्टर की खोज की है, जो तापमान में छोटे अंतर को बेहद बड़े विद्युत वोल्टेज में बदल सकता है। यह क्षमता इतनी अधिक है कि यह अब तक ठोस पदार्थों में माने जाने वाले थर्मोइलेक्ट्रिक असर की सीमा से कई गुना आगे निकल गई है।
इस खोज ने वैज्ञानिकों की उस पुरानी धारणा को चुनौती दी है, जिसके अनुसार क्रिस्टलीय ठोस पदार्थों में तापमान के अंतर से पैदा होने वाला वोल्टेज कुछ सीमाओं से आगे नहीं बढ़ सकता। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह खोज भविष्य में बेहद संवेदनशील तापमान सेंसर, गर्मी का पता लगाने वाले उपकरण और नई पीढ़ी की क्वांटम सेंसिंग तकनीक के लिए उपयोगी हो सकती है।
तापमान से बिजली बनाने का असर
जब किसी पदार्थ के एक हिस्से को गर्म और दूसरे हिस्से को ठंडा रखा जाता है, तो उसके अंदर मौजूद आवेश वाहक गर्म हिस्से से ठंडे हिस्से की ओर जाने लगते हैं। इस प्रक्रिया से दोनों सिरों के बीच विद्युत वोल्टेज पैदा होता है। इसे सीबेक प्रभाव कहा जाता है।
सीबेक प्रभाव की खोज करीब 200 साल पहले हुई थी। आज इसका इस्तेमाल तापमान मापने वाले सेंसर और ऐसे उपकरणों में किया जाता है, जो बेकार निकलने वाली गर्मी को बिजली में बदलते हैं।
इस प्रभाव की ताकत को सीबेक गुणांक यानी सीबेक कोएफिसिएंट से मापा जाता है। सामान्य धातुओं में इसका मान कुछ माइक्रोवोल्ट प्रति केल्विन होता है, जबकि अच्छे सेमीकंडक्टरों में यह कुछ सौ माइक्रोवोल्ट प्रति केल्विन तक पहुंचता है।
ठोस क्रिस्टल में हजारों गुना बड़ा असर
नई खोज में वैज्ञानिकों ने स्कैंडियम नाइट्राइड यानी एससीएन की पतली परतों का इस्तेमाल किया। यह एक मजबूत और उच्च तापमान सहने वाला पदार्थ है।
शोधकर्ताओं ने इसमें मैग्नीशियम मिलाया। इसका उद्देश्य स्कैंडियम नाइट्राइड में मौजूद प्राकृतिक मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या को कम करना था। इस प्रक्रिया से एक विशेष प्रकार का सेमीकंडक्टर तैयार हुआ, जिसे हैवीली डोप्ड और हाईली कम्पेन्सेटेड सेमीकंडक्टर कहा जाता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि इस सामग्री का सीबेक गुणांक सामान्य अकार्बनिक सेमीकंडक्टरों की तुलना में कई सौ से लेकर एक हजार गुना से भी अधिक बड़ा हो सकता है।
कमरे के तापमान के आसपास इसका मान –124.6 मिलीवोल्ट प्रति केल्विन से भी अधिक दर्ज किया गया। यह संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ठोस क्रिस्टलीय पदार्थों में इससे बहुत छोटे मान ही आम तौर पर देखे जाते रहे हैं।
क्रिस्टल की संरचना भी रही बरकरार
इस खोज की खास बात यह है कि अत्यधिक बड़ा थर्मोइलेक्ट्रिक प्रभाव पाने के बावजूद पदार्थ की क्रिस्टलीय संरचना नष्ट नहीं हुई। शोधकर्ताओं ने एक्स-रे तकनीक और परमाणु स्तर की इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से इसकी जांच की। इन परीक्षणों से पता चला कि स्कैंडियम नाइट्राइड की फिल्म एकल-क्रिस्टलीय और अच्छी तरह व्यवस्थित थी। इसमें कोई अलग या अवांछित पदार्थ बनने के प्रमाण भी नहीं मिले।
यानी पदार्थ के अंदर नियंत्रित अव्यवस्था मौजूद थी, लेकिन पूरा क्रिस्टल अपनी संरचना बनाए हुए था।
नियंत्रित अव्यवस्था बनी सफलता की कुंजी
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियर्ड डिसऑर्डर, यानी नियंत्रित अव्यवस्था है। आमतौर पर वैज्ञानिक सेमीकंडक्टर में अव्यवस्था को कम करने की कोशिश करते हैं, क्योंकि इससे इलेक्ट्रॉनों की गति प्रभावित हो सकती है। लेकिन इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दिखाया कि सही तरीके से बनाई गई अव्यवस्था असाधारण थर्मोइलेक्ट्रिक गुण पैदा कर सकती है।
मैग्नीशियम डोपिंग से पदार्थ में सकारात्मक और नकारात्मक आवेशों का लगभग संतुलन बनाया गया। इससे इलेक्ट्रॉनों के लिए एक असामान्य वातावरण तैयार हुआ, जिसने तापमान के अंतर के प्रति पदार्थ की प्रतिक्रिया को बहुत बढ़ा दिया।
पतली फिल्म में असर और मजबूत हुआ
शोध के दौरान एक और दिलचस्प बात सामने आई। जब स्कैंडियम नाइट्राइड की फिल्म की मोटाई कम की गई, तो सीबेक प्रभाव और अधिक मजबूत होता गया। यह संकेत देता है कि पदार्थ की मोटाई, उसकी सतह और उसके अंदर मौजूद सूक्ष्म स्तर की इलेक्ट्रॉनिक संरचना इस असाधारण प्रभाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सेंसर तकनीक में बड़ी संभावना
यह खोज केवल बिजली बनाने के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। इतना बड़ा सीबेक गुणांक छोटे तापमान अंतर को भी अपेक्षाकृत बड़ा विद्युत संकेत बना सकता है।
इसलिए भविष्य में इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल बेहद संवेदनशील तापमान सेंसर, गर्मी का पता लगाने वाले उपकरण, थर्मल इमेजिंग और क्वांटम सेंसिंग में किया जा सकता है।
हालांकि बड़ा सीबेक गुणांक अपने आप में बेहतर थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर की गारंटी नहीं देता। बिजली उत्पादन के लिए विद्युत चालकता और तापीय चालकता जैसे अन्य गुण भी महत्वपूर्ण होते हैं।
दशकों पुरानी धारणा को मिली चुनौती
यह अध्ययन जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेइनसीएएसआर), यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया।
शोध शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि टीम शुरुआत में कोई रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं कर रही थी, बल्कि यह समझना चाहती थी कि स्कैंडियम नाइट्राइड में अव्यवस्था और आवेश संतुलन इलेक्ट्रॉनिक परिवहन को कैसे बदलते हैं।
लेकिन प्रयोगों में मिला परिणाम उम्मीद से बिल्कुल अलग था। एक पूरी तरह क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ ने ऐसा थर्मोइलेक्ट्रिक व्यवहार दिखाया, जिसे अब तक मुख्य रूप से तरल इलेक्ट्रोलाइट जैसे पदार्थों से जोड़ा जाता था। यह खोज संकेत देती है कि ठोस पदार्थों में नियंत्रित अव्यवस्था का इस्तेमाल भविष्य की असाधारण थर्मोइलेक्ट्रिक और सेंसर तकनीकों के लिए एक नई राह खोल सकता है।