वैज्ञानिकों ने बनाई पुरानी बैटरी से फ्यूल सेल की दक्षता बढ़ाने वाली नई तकनीक

लीथियम-आयन बैटरी से दोबारा हासिल ग्रेफाइट को प्लैटिनम कैटालिस्ट के साथ जोड़कर मेथनॉल प्रतिरोधी और लंबे समय तक टिकाऊ फ्यूल सेल विकसित किया जा सकता है
यह तकनीक बैटरी कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देती है।
यह तकनीक बैटरी कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देती है।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • वैज्ञानिकों ने पुराने लीथियम-आयन बैटरियों से ग्रेफाइट निकालकर उसे रासायनिक प्रक्रिया से छिद्रपूर्ण और उच्च सतह वाला बनाया।

  • दोबारा प्राप्त ग्रेफाइट प्लैटिनम कैटालिस्ट के साथ मिलकर ऑक्सीजन रिडक्शन रिएक्शन की दक्षता और इलेक्ट्रॉन प्रवाह को बढ़ाता है।

  • ग्रेफाइट मेथनॉल अक्सीडेशन को रोकता है और प्लैटिनम को सीओ से दूषित होने से बचाकर फ्यूल सेल की स्थायित्व बढ़ाता है।

  • शोध में 10 प्रतिशत ग्रेफाइट मिलाने पर सर्वोत्तम प्रदर्शन और लंबा जीवन मिला, जिससे फ्यूल सेल अधिक टिकाऊ और प्रभावी बनता है।

  • यह तकनीक बैटरी कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देती है।

आज के समय में लीथियम-आयन बैटरी और फ्यूल सेल तकनीक तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन इनके साथ ही बैटरी के कचरे और महंगे कैटालिस्ट की समस्या भी सामने आ रही है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने बैटरी के पुराने ग्रेफाइट को नया रूप देने की तकनीक विकसित की है।

बैटरी से ग्रेफाइट की वापसी

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटाल्लुरगी एंड न्यू मैटेरियल्स के शोधकर्ताओं ने पुराने लीथियम-आयन बैटरियों से ग्रेफाइट निकालकर उसे रसायनिक प्रक्रिया के जरिए पतला और छिद्रपूर्ण बनाया। इससे ग्रेफाइट की सतह बढ़ गई और इसमें ज्यादा रासायनिक कार्यात्मक समूह बन गए। इस तरह का ग्रेफाइट फ्यूल सेल के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।

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यह तकनीक बैटरी कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देती है।

फ्यूल सेल में ग्रेफाइट की भूमिका

डायरेक्ट मेथनॉल फ्यूल सेल में प्लैटिनम कैटालिस्ट का उपयोग ऑक्सीजन रिडक्शन रिएक्शन (ओआरआर) के लिए किया जाता है। लेकिन मेथनॉल के कारण रिएक्शन में गड़बड़ी और प्लैटिनम का सीओ से दूषित होना आम समस्या है। शोधकर्ताओं ने जो ग्रेफाइट विकसित किया, वह प्लैटिनम के साथ मिलकर इलेक्ट्रॉन का प्रवाह बढ़ाता है और ऑक्सीजन को सही तरीके से पहुंचाता है।

मेथनॉल और सीओ से सुरक्षा

यह नया ग्रेफाइट मेथनॉल अक्सीडेशन को रोकता है और प्लैटिनम को सीओ द्वारा नुकसान से बचाता है। शोध मंह पता चला कि 10 प्रतिशत ग्रेफाइट मिलाने पर सबसे बेहतर प्रदर्शन और लंबा जीवन मिलता है। इसका मतलब है कि फ्यूल सेल लंबे समय तक बेहतर तरीके से काम कर सकता है और महंगे कैटालिस्ट की मात्रा कम की जा सकती है।

प्लैटिनम-ग्रेफाइट कैटालिस्ट का चित्रात्मक प्रदर्शन, जिसमें छिद्रपूर्ण ग्रेफाइट एक संवाहक नेटवर्क बनाकर मेथनॉल और सीओ से सुरक्षा प्रदान करता है, ऑक्सीजन रिडक्शन दक्षता और टिकाऊपन बढ़ाता है।
प्लैटिनम-ग्रेफाइट कैटालिस्ट का चित्रात्मक प्रदर्शन, जिसमें छिद्रपूर्ण ग्रेफाइट एक संवाहक नेटवर्क बनाकर मेथनॉल और सीओ से सुरक्षा प्रदान करता है, ऑक्सीजन रिडक्शन दक्षता और टिकाऊपन बढ़ाता है।स्रोत: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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यह तकनीक बैटरी कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देती है।

पर्यावरण और ऊर्जा पर असर

इस शोध से बैटरी के पुराने ग्रेफाइट को दोबारा उपयोग में लाकर दो समस्याओं का समाधान होता है। पहले, बैटरी कचरे को कम किया जा सकता है और दूसरी ओर, फ्यूल सेल की दक्षता और टिकाऊपन बढ़ाया जा सकता है। इससे महंगे प्लैटिनम कैटालिस्ट की आवश्यकता कम होती है और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक को बढ़ावा मिलता है।

इस तरह की तकनीक न केवल बैटरी के कचरे के उपयोग को बढ़ाती है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। पुराने ग्रेफाइट को दोबारा उपयोग करना भविष्य की ऊर्जा तकनीकों को सस्ते और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह शोध दर्शाता है कि वैज्ञानिक समाधान सिर्फ नई चीजें बनाने में ही नहीं, बल्कि पुराने संसाधनों को नए रूप में उपयोग करने में भी हो सकते हैं।

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