

22 जुलाई 2026 को देश की हवा में मौसम का सकारात्मक असर साफ दिखाई दिया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 240 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि करीब 58 फीसदी (138 शहरों) में हवा 'बेहतर' श्रेणी में रही, जबकि 91 शहरों में वायु गुणवत्ता 'संतोषजनक' दर्ज की गई।
हालांकि राहत के इस माहौल के बीच बिहार का सासाराम सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां एक्यूआई 295 दर्ज हुआ। वहां पीएम2.5 का दबदबा रहा और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,850 फीसदी अधिक पाया गया।
इसके उलट गंगटोक सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 13 दर्ज किया गया। दिल्ली और फरीदाबाद के लिए भी राहत की खबर रही।
दिल्ली का एक्यूआई 69 से घटकर 64, जबकि फरीदाबाद का 110 से घटकर 96 पहुंच गया, जिससे दोनों शहरों की हवा 'संतोषजनक' श्रेणी में आ गई।
विश्लेषण यह भी दिखाता है कि पिछले 24 घंटों में साफ हवा वाले शहरों की संख्या में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और मध्यम श्रेणी वाले शहर आधे रह गए हैं। फिर भी सासाराम, बर्नीहाट और हरियाणा के कई शहर यह याद दिलाते हैं कि देश में वायु प्रदूषण का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 22 जुलाई 2026 को देश में सासाराम सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 295 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (21 जुलाई) को सरकारी आंकड़ों में सासाराम का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सासाराम की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सासाराम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,850 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सासाराम की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 22.6 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में फतेहाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 176 दर्ज किया गया। हालांकि आज सरकारी रुझानों में फतेहाबाद से जुड़े आंकड़े साझा नहीं किए गए हैं।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 69 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 64 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 5 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 21 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 96 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 14 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक हो गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 जुलाई 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 57.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 37.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 4.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 13.3 फीसदी की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 50 फीसदी की कमी देखी गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बर्नीहाट (मेघालय) (142) दूसरे जबकि सोनीपत (133) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (130) चौथे स्थान पर है। बांसवाड़ा (126) – सिलीगुड़ी (117) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बहादुरगढ़ (115) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मंडी गोबिंदगढ़ (107), धनबाद (106) और खोरा (103) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (सोनीपत, बल्लभगढ़, बहादुरगढ़, खोरा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सासाराम, बर्नीहाट (मेघालय) आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं सोनीपत, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बहादुरगढ़, मंडी गोबिंदगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 57.5 फीसदी यानी 138 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगलौर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिंगरौली, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 91 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, करनाल, खन्ना, किशनगंज, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मोदीनगर, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पटना, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, राजगीर, राजकोट, राउरकेला, सतना, शामली, सिरोही, सिरसा, श्रीगंगानगर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 10 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बर्नीहाट (मेघालय), धनबाद, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, सिलीगुड़ी, सोनीपत, वडोदरा आदि शामिल हैं। वहीं सासाराम (295) में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से 138 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 91 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 जुलाई को यह आंकड़ा 105 दर्ज किया गया था।
10 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सासाराम में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 295 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (21 जुलाई) को सरकारी आंकड़ों में सासाराम का जिक्र नहीं था।
इससे पहले कल देश में फतेहाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 176 दर्ज किया गया। हालांकि आज सरकारी रुझानों में फतेहाबाद से जुड़े आंकड़े साझा नहीं किए गए हैं।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 69 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 64 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 5 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 96 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 14 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक हो गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 22 जुलाई को बल्लभगढ़ (130) चौथे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (मेघालय) (142) दूसरे, जबकि सोनीपत (133) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 55, गाजियाबाद में 45, गुवाहाटी में 46, गुरूग्राम में 80, नोएडा में 55, ग्रेटर नोएडा में 84 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 41 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 52, चेन्नई में 76, चंडीगढ़ में 32, हैदराबाद में 44, जयपुर में 52 और पटना में 63 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 138 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बारबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चिक्कमगलुरु, चूरू, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दौसा, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगलौर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिंगरौली, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आरा, बद्दी, बागपत, बारां, बरेली, बाड़मेर, बीड, बेंगलुरु, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बिलासपुर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, करनाल, खन्ना, किशनगंज, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मोदीनगर, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पटना, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, राजगीर, राजकोट, राउरकेला, सतना, शामली, सिरोही, सिरसा, श्रीगंगानगर, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, वातवा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि 91 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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