

देश के कई शहरों में 21 सितम्बर 2026 को हवा एक बार फिर लोगों के लिए चिंता का सबब बन गई।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शहरों में प्रदूषण का दबाव खास तौर पर ज्यादा रहा। बड़ौत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 286 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है। महज 24 घंटे में यहां एक्यूआई 230 से बढ़कर 286 हो गया, यानी प्रदूषण में 56 अंकों का उछाल आया।
बड़ौत में पीएम2.5 प्रदूषण हावी रहा और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,800 फीसदी अधिक रहा।
प्रदूषण की यह तस्वीर केवल बड़ौत तक सीमित नहीं है। ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 276, खोरा में 254, मानेसर में 245 और गुरुग्राम में 218 दर्ज किया गया। बहादुरगढ़, यमुनानगर और नोएडा समेत कई अन्य शहर भी प्रदूषण की ऊंची मार झेल रहे हैं। खास बात यह है कि दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर शामिल रहे।
देश के 242 शहरों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 56 शहरों में हवा ‘बेहतर’, 136 में ‘संतोषजनक’ और 45 शहरों में ‘मध्यम’ रही, जबकि पांच शहरों में हवा ‘खराब’ दर्ज की गई। यानी ज्यादातर शहरों में स्थिति फिलहाल गंभीर श्रेणी में नहीं है, लेकिन प्रदूषण का स्थानीय स्तर पर बढ़ता दबाव चिंता पैदा कर रहा है।
दिल्ली में भी एक्यूआई 160 से बढ़कर 169 हो गया, जबकि फरीदाबाद में 163 से घटकर 151 दर्ज किया गया। इसके उलट सहरसा में महज एक दिन में एक्यूआई 293 से गिरकर 69 पहुंच गया, जो बताता है कि शहरों की हवा में प्रदूषण का उतार-चढ़ाव कितना तेज हो सकता है।
वहीं, आइजोल में एक्यूआई केवल 14 रहा। बड़ौत और आइजोल के बीच करीब 20 गुना का अंतर यह दिखाता है कि देश में लोगों के हिस्से में आने वाली हवा कितनी असमान है। पीएम2.5 और पीएम10 जैसे महीन कणों का बढ़ता दबाव इस बात की याद दिलाता है कि खराब हवा केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हर सांस के साथ शरीर में पहुंचने वाला स्वास्थ्य जोखिम है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 21 सितम्बर 2026 को देश में बड़ौत सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 286 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (20 सितम्बर) बड़ौत में सूचकांक 230 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 56 अंकों का इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बड़ौत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बड़ौत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बड़ौत की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 20 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में सहरसा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 293 दर्ज किया गया। हालांकि आज 224 अंकों के भारी सुधार के साथ सहरसा में एक्यूआई घटकर 69 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब से संतोषजनक हो गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 160 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 169 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 9 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-21 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 163 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 151 पर पहुंच गया। हालांकि 12 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 21 सितम्बर 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 23.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 20.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 6.3 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 16.7 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती पांच बनी हुई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (276) दूसरे जबकि खोरा (254) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मानेसर (245) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम (218) – बहादुरगढ़ (197) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
लेह (196) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में यमुना नगर (190), नोएडा (189) और खैरथल (177) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (बड़ौत, मानेसर, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, यमुना नगर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बड़ौत, खोरा, मानेसर, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, यमुना नगर, नोएडा, खैरथल, जींद, मंडी गोबिंदगढ़, हापुड़, मेरठ, फरीदाबाद, गजरौला, जलना, हिसार, भिवानी, गोरखपुर, अहमदाबाद, अंकलेश्वर और सोनीपत आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा, बागपत, गाजियाबाद, भिवाड़ी, बुलंदशहर, बीकानेर, मुजफ्फरनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चूरू, नारनौल, अंबाला, अलवर, वातवा, हनुमानगढ़, नागौर, झुंझुनू, कैथल, पानीपत, फतेहपुर सीकरी, सिरसा, मुरादाबाद, जालौर और कुरुक्षेत्र आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 23.1 फीसदी यानी 56 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कटक, धौलपुर, गंगटोक, हल्दिया, इंदौर, काकीनाडा, कलबुर्गी, करनाल, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मिलुपारा, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नयागढ़, पलवल, पुडुचेरी, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, विरार आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 136 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, देहरादून, देवास, धारवाड़, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, कुरनूल, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मैंगलोर, मथुरा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पंपोर, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 45 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अंकलेश्वर, बागपत, बहादुरगढ़, बठिंडा, बेगूसराय, भागलपुर, बीकानेर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चुरू, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झुंझुनू, जींद, कैथल, खैरथल, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, पाली, पानीपत, पटना, पीथमपुर, राजगीर, समस्तीपुर, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, तालचेर, वातवा, वृंदावन और यमुनानगर शामिल हैं।
वहीं बड़ौत (286), ग्रेटर नोएडा (276), खोरा (254), मानेसर (245) और गुरुग्राम (218) में स्थिति 'खराब' दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से 56 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 136 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 20 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 128 दर्ज किया गया था।
45 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बड़ौत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 286 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (20 सितम्बर) बड़ौत में सूचकांक 230 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 56 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में सहरसा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 293 दर्ज किया गया। हालांकि आज 224 अंकों के भारी सुधार के साथ सहरसा में एक्यूआई घटकर 69 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब से संतोषजनक हो गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 160 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 169 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 9 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 163 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 151 पर पहुंच गया। हालांकि 12 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 21 सितम्बर को मानेसर (245) चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (276) दूसरे, जबकि खोरा (254) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 73, गाजियाबाद में 155, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 218, नोएडा में 189, ग्रेटर नोएडा में 276 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 57 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 65, चेन्नई में 65, चंडीगढ़ में 41, हैदराबाद में 61, जयपुर में 95 और पटना में 61 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 56 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, बारां, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कटक, धौलपुर, गंगटोक, हल्दिया, इंदौर, काकीनाडा, कलबुर्गी, करनाल, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मिलुपारा, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नयागढ़, पलवल, पुडुचेरी, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, विरार और यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदनगर, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, देहरादून, देवास, धारवाड़, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, कुरनूल, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मैंगलोर, मथुरा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पंपोर, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, सहरसा, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिवान, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम आदि 136 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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