छोटे शहरों में प्रदूषण का कहर: गजरौला सबसे आगे, बढ़कर 244 पर पहुंचा एक्यूआई, दूसरे पायदान पर हिंगोली

गजरौला में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,500 फीसदी अधिक है।
देश के कई शहरों  में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • 15 अक्टूबर 2026 को देश के छोटे शहरों में वायु प्रदूषण की गंभीर होती स्थिति सामने आई।

  • सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश का गजरौला 244 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां महज 24 घंटे में एक्यूआई 55 अंक बढ़ गया और हवा में पीएम2.5 जैसे महीन प्रदूषक कण हावी रहे। गजरौला में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की निर्धारित सुरक्षित सीमा से करीब 1,500 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • महाराष्ट्र का हिंगोली 234 एक्यूआई के साथ दूसरे और बड़ौत 232 के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

  • देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहर शामिल थे।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 262 शहरों के आंकड़ों के अनुसार, 36 शहरों में हवा साफ, 127 में संतोषजनक और 94 में मध्यम श्रेणी में रही, जबकि पांच शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई।

  • दूसरी ओर, दिल्ली का एक्यूआई 181 से घटकर 149 पर आ गया, जबकि फरीदाबाद में यह 110 से बढ़कर 116 हो गया। श्रीनगर 19 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा।

  • आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण की चुनौती केवल महानगरों तक सीमित नहीं है; छोटे शहरों में भी जहरीली हवा लोगों की सेहत के लिए गंभीर चिंता बन रही है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 15 अक्टूबर 2026 को देश में गजरौला सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 244 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (14 अक्टूबर) को गजरौला में सूचकांक 189 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 55 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि गजरौला की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गजरौला में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,500 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गजरौला की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 12.8 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में बड़ौत की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 240 दर्ज किया गया। हालांकि आज 8 अंकों के सुधार के साथ बड़ौत में सूचकांक घटकर 232 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 181 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 149 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 32 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 110 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 116 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 6 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 अक्टूबर 2026 को 262 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 13.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 37.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 63.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 10.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 5.1 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं आज पांच शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती सात रिकॉर्ड की गई थी।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में हिंगोली (234) दूसरे जबकि बड़ौत (232) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बागपत (219) चौथे स्थान पर है। गुम्मिडीपूंडी (212) – मेरठ (193) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

हाजीपुर (191) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (184), खोरा (182) और चरखी दादरी (175) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहर (गजरौला, बड़ौत, बागपत, मेरठ, ग्रेटर नोएडा और खोरा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गजरौला, हिंगोली, बड़ौत, बागपत, गुम्मिडीपूंडी, मेरठ, हाजीपुर, खोरा, चरखी दादरी, मुजफ्फरनगर, राजकोट, गाजियाबाद, नागपुर, समस्तीपुर, पीथमपुर, नोएडा, मंडीदीप, अंकलेश्वर, दिल्ली, कैथल, सोनीपत, गुरुग्राम, भिवंडी, कोटा, यमुना नगर, अररिया, भिवानी, जींद, गया, मुरादाबाद, जालना, पटना, जालंधर, मुजफ्फरपुर, पुणे, जयपुर, बिलासपुर और लखनऊ आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, शामली, बहादुरगढ़, भावनगर, भरतपुर, सीकर, अहमदाबाद, सासाराम, सतारा, बीकानेर, पानीपत, पिंपरी-चिंचवाड़, चंद्रपुर, सूरत, टोंक, जालोर, वातवा, पाली, उदयपुर, झुंझुनू, चूरू, भीलवाड़ा, फतेहपुर सीकरी, बेगूसराय, नागौर, अगरतला, बुलंदशहर, बूंदी, खैरथल, जैसलमेर, बिलीपाड़ा, नारनौल, फरीदाबाद, जबलपुर, प्रतापगढ़, वाराणसी, महाद, भोपाल, जोधपुर, ग्वालियर, बेलापुर, रोहतक, मंडी गोबिंदगढ़, अजमेर, छपरा, सिरोही, औरंगाबाद (बिहार), धुले, गांधीनगर, नासिक, दौसा, धारूहेड़ा, जोरापोखर और राजसमंद आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 13.7 फीसदी यानी 36 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भुवनेश्वर, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, कटक, एलुरु, गंगटोक, गुंटूर, हल्दिया, कलबुर्गी, क्योंझर, कोप्पल, कोरबा, कुरनूल, मदिकेरी, मंगलौर, नाहरलागुन, नेल्लोर, पंचकुला, पुडुचेरी, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, श्रीनगर, सुआकाती, थूथुकुडी, त्रिशूर, विजयपुरा, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 127 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कारवार, काशीपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूरु, नागांव, नांदेड़, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सतना, शिलांग आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 94 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अजमेर, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बेगूसराय, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धुले, फरीदाबाद, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालना, जालोर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, खैरथल, खोरा, कोटा, लेह, लखनऊ, महाद, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नारनौल, नासिक, नोएडा, पाली, पलवल, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरोही, सोनीपत, सूरत, टोंक, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, वृंदावन और यमुना नगर शामिल हैं।

इसी तरह गजरौला (244), हिंगोली (234), बड़ौत (232), बागपत (219) और गुम्मिडीपूंडी (212) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 262 में से 36 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 127 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 अक्टूबर को यह आंकड़ा 142 दर्ज किया गया था।

94 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गजरौला में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 244 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (14 अक्टूबर) को गजरौला में सूचकांक 189 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 55 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल देश में बड़ौत की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 240 दर्ज किया गया। हालांकि आज 8 अंकों के सुधार के साथ बड़ौत में सूचकांक घटकर 232 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 181 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 149 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 32 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 110 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 116 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 6 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 अक्टूबर को बागपत (219) चौथे स्थान पर है, वहीं हिंगोली (234) दूसरे, जबकि बड़ौत (232) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 109, गाजियाबाद में 169, गुवाहाटी में 78, गुरूग्राम में 137, नोएडा में 159, ग्रेटर नोएडा में 184 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 97 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 103, चेन्नई में 69, चंडीगढ़ में 47, हैदराबाद में 72, जयपुर में 107 और पटना में 119 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 36 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अनंतपुर, बालासोर, बारीपदा, बेतिया, भुवनेश्वर, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, कटक, एलुरु, गंगटोक, गुंटूर, हल्दिया, कलबुर्गी, क्योंझर, कोप्पल, कोरबा, कुरनूल, मदिकेरी, मंगलौर, नाहरलागुन, नेल्लोर, पंचकुला, पुडुचेरी, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, श्रीनगर, सुआकाती, थूथुकुडी, त्रिशूर, विजयपुरा, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंगुल, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चामराजनगर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, दमोह, दरभंगा, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कारवार, काशीपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूरु, नागांव, नांदेड़, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, श्रीकाकुलम, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उडुपी, उल्हासनगर, वडोदरा, विरार और यादगीर आदि 127 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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