

भारत में वायु प्रदूषण से जुड़े ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में प्रदूषण का संकट अब केवल दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे और मझोले शहर भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं।
31 मई 2026 को ओडिशा का अंगुल देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 324 दर्ज हुआ और महज 24 घंटे में प्रदूषण 219 अंक बढ़ गया।
अंगुल की हवा में ओजोन का स्तर इतना अधिक था कि प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 440 फीसदी ऊपर पहुंच गया।
चिंताजनक बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के आठ शहर शामिल रहे, जो इस क्षेत्र में बढ़ते वायु संकट की ओर इशारा करता है।
हालांकि दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, लेकिन भिवानी, जैसलमेर, भरतपुर और बीकानेर जैसे शहरों में हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी तक पहुंच गई।
दूसरी ओर तिरुवनंतपुरम देश का सबसे साफ शहर रहा। आंकड़ों के अनुसार 239 में से 50 शहरों की हवा साफ और 133 शहरों की संतोषजनक रही, लेकिन करीब एक चौथाई शहर अब भी प्रदूषण की मार झेल रहे हैं।
यह तस्वीर साफ करती है कि भारत में वायु प्रदूषण का भूगोल बदल रहा है और अब छोटे शहर प्रदूषण के नए हॉटस्पॉट बनकर उभर रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 31 मई 2026 को देश में अंगुल सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 324 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल अंगुल में सूचकांक 105 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 219 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 440 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में तिरुवनंतपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना तिरुवनंतपुरम से करें तो वहां स्थिति 17 गुणा खराब है।
बता दें कि कल देश में भिवानी की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब सूचकांक 260 दर्ज किया गया। हालांकि आज चार अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 256 पर पहुंच गया है। भिवानी में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 85 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 98 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 13 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
बता दें कि इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 109 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 188 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 31 मई 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 20.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 55.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 23.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में दो फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 9 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 7.4 फीसदी की गिरावट आई है। कुछ ऐसी ही स्थिति खराब हवा वाले शहरों की भी है, जिनकी गिनती में कल से 42.9 फीसदी का कमी दर्ज हुई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में श्री गंगानगर (305) दूसरे जबकि भिवानी (256) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह जैसलमेर चौथे स्थान पर है। भरतपुर (218)- बीकानेर (203) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
सवाई माधोपुर (198) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में फरीदाबाद (188), बारां (183), चित्तौड़गढ़ (167) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के आठ शहर (श्रीगंगानगर, भिवाड़ी, जैसलमेर, भरतपुर, बीकानेर, सवाई माधोपुर, बारां और चित्तौड़गढ़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भिवानी, फरीदाबाद, बर्नीहाट (असम), गुम्मिडीपूंडी, मंडीदीप, खन्ना, चरखी दादरी, मानेसर, हाजीपुर, किशनगंज आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं जैसलमेर, बीकानेर, सोनीपत, बाड़मेर, उदयपुर, बर्नीहाट (मेघालय), धनबाद, सीकर, बल्लभगढ़, बद्दी, नेल्लोर, सिंगरौली, फतेहाबाद, अमृतसर, बहादुरगढ़, भिवाड़ी, नागौर, कैथल, वातवा, सहरसा, विशाखापत्तनम, छपरा, पाली, यमुना नगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 20.9 फीसदी यानी 50 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बारीपदा, बैरकपुर, बेतिया, भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हल्दिया, जालना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लुधियाना, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, नंदेसरी, नासिक, नयागढ़, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पेरुंदुरई, पुणे, राजमहेंद्रवरम, सांगली, शिवमोगा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 133 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, कुड्डालोर, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, गडग, गांधीनगर, गया, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मेहसाणा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 50 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अमृतसर, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारां, बरेली, बाड़मेर, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, कटक, दौसा, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, कैथल, खन्ना, किशनगंज, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, नागौर, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पीथमपुर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सोनीपत, टोंक, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में भरतपुर, भिवानी, बीकानेर, जैसलमेर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं अंगुल (324) और श्री गंगानगर (305) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 50 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 133 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 30 मई को यह आंकड़ा 122 दर्ज किया गया था।
50 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 324 दर्ज किया गया। इससे पहले कल अंगुल में सूचकांक 105 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 219 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही आज अंगुल में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' से सीधे बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि कल देश में भिवानी की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब सूचकांक 260 दर्ज किया गया। हालांकि आज चार अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 256 पर पहुंच गया है। भिवानी में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 85 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 98 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 13 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 109 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 188 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 31 मई को जैसलमेर (256) चौथे स्थान पर है, वहीं भिवानी (305) दूसरे, जबकि भिवानी (256) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 110, गाजियाबाद में 108, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 99, नोएडा में 110, ग्रेटर नोएडा में 94 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 76, चेन्नई में 65, चंडीगढ़ में 164, हैदराबाद में 70, जयपुर में 92 और पटना में 93 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 50 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अंबरनाथ, बागलकोट, बारीपदा, बैरकपुर, बेतिया, भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हल्दिया, जालना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लुधियाना, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, नंदेसरी, नासिक, नयागढ़, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पेरुंदुरई, पुणे, राजमहेंद्रवरम, सांगली, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर, सुआकाती, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, कुड्डालोर, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, गडग, गांधीनगर, गया, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मेहसाणा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पंचगांव, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुपति, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा आदि 133 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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