

दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। 15 अप्रैल 2026 को ग्रेटर नोएडा 297 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां हालात ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचकर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक हो गए।
मानेसर (288), खोरा (280), भिवाड़ी (264) और गुरुग्राम (259) जैसे शहर भी अत्यधिक प्रदूषित सूची में शामिल रहे, जबकि दिल्ली का एक्यूआई 179 से बढ़कर 206 हो गया, जिससे राजधानी की हवा भी ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश प्रभावित शहरों में पीएम10 और पीएम2.5 कणों का दबदबा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक स्थिति पैदा कर रहे हैं।
देश के 249 शहरों में से केवल लगभग 6 फीसदी में ही हवा ‘बेहतर’ पाई गई, जबकि करीब 45 फीसदी शहरों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इसके उलट, कुछ शहरों में मामूली सुधार भी देखने को मिला, जैसे मंडीदीप में एक दिन पहले की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ।
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा लगातार बढ़ते प्रदूषण दबाव में है, जहां कुछ ही शहर स्वच्छ हवा की श्रेणी में हैं, जबकि अधिकांश मध्यम से लेकर गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं। यह रुझान स्पष्ट संकेत देता है कि प्रदूषण का संकट अब स्थानीय नहीं, बल्कि व्यापक और तेजी से बदलता हुआ स्वास्थ्य खतरा बन चुका है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 15 अप्रैल 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 297 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 222 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 75 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 550 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में भिवानी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 30 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना भिवानी से करें तो वहां स्थिति 9.9 गुणा खराब है।
इससे पहले कल (14 अप्रैल 2026) देश में मंडीदीप की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 284 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 144 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 140 पर पहुंच गया।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 179 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 206 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 27 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 151 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 163 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 अप्रैल 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.02 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 45.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 6.3 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 6.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 6.3 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मानेसर (288) दूसरे जबकि खोरा (280) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह भिवाड़ी (264) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-श्री गंगानगर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 259 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
चरखी दादरी (254) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मोदीनगर (247), गाजियाबाद (241) और सिंगरौली (226) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तरप्रदेश के चार शहर (ग्रेटर नोएडा, खोरा, मोदीनगर, गाजियाबाद) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मानेसर, चरखी दादरी, बिलीपाड़ा, नारनौल, धारूहेड़ा, बल्लभगढ़, पंचगांव, सोनीपत, मंगुराहा, यमुना नगर, मंडीदीप, खुर्जा, जींद, मोतिहारी, उज्जैन, नंदेसरी, बिलासपुर, आरा, बर्नीहाट, गुवाहाटी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, खोरा, भिवाड़ी, गुरुग्राम, मोदीनगर, गाजियाबाद, सिंगरौली, नोएडा, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, टोंक, ग्वालियर, नयागढ़, पटना, फरीदाबाद, बीकानेर, आगरा, बद्दी, पीथमपुर, मुजफ्फरनगर, पाली, विशाखापत्तनम, बर्नीहाट, कानपुर, झुंझुनू, चूरू, कुरुक्षेत्र, पानीपत, गांधीनगर, वातवा, अहमदाबाद, सुआकाती, बांसवाड़ा, वृंदावन, जोरापोखर, यादगीर, जैसलमेर, सिरोही, मेहसाणा, सहरसा, बाड़मेर, भोपाल, हनुमानगढ़, लखनऊ, सीकर, उदयपुर, वडोदरा, कटनी, देवास, जालोर, पलवल, बेलापुर, मुरादाबाद, क्योंझर, अजमेर, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, सोलापुर, फिरोजाबाद, कुंजेमुरा, नागपुर, अलवर, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, बारीपदा, कोटा, प्रतापगढ़, बदलापुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 6.02 फीसदी यानी महज 15 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में जालंधर, मदिकेरी, नागांव, नलबाड़ी, पंचकुला, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, सिलचर, शिवसागर, विजयपुरा शामिल हैं।
इसी तरह देश के 121 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेंगलुरु, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडी गोबिंदगढ़, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नाहरलागुन, नासिक, नेल्लोर, ऊटी, पंपोर, परभनी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 96 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद , बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारीपदा, बाड़मेर, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बूंदी, बर्नीहाट, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चूरू, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मंडीदीप, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पलवल, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायपुर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, सुआकाती, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बारबिल, भिवाड़ी, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हिंगोली, खोरा, मानेसर, मोदीनगर, नोएडा, सिंगरौली, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 249 में से महज 15 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 121 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 अप्रैल को यह आंकड़ा 118 दर्ज किया गया था।
96 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 297 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 222 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 75 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल देश में मंडीदीप की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 284 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 144 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 140 पर पहुंच गया।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 179 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 206 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 27 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 151 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 163 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 अप्रैल को भिवाड़ी चौथे स्थान पर है, वहीं मानेसर (288) दूसरे, जबकि खोरा (280) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 182, गाजियाबाद में 241, गुवाहाटी में 102, गुरूग्राम में 259, नोएडा में 223, ग्रेटर नोएडा में 297 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 77 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 118, चेन्नई में 39, चंडीगढ़ में 79, हैदराबाद में 71, जयपुर में 134 और पटना में 177 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 15 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बेतिया, भिवानी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, जालंधर, मदिकेरी, नागांव, नलबाड़ी, पंचकुला, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, सिलचर, शिवसागर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडी गोबिंदगढ़, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नाहरलागुन, नासिक, नेल्लोर, ऊटी, पंपोर, परभनी, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिवान, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार आदि 121 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं