प्रदूषण का रिपोर्ट कार्ड: बुलंदशहर बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, आइजोल की हवा सबसे साफ

09 सितम्बर 2026 को देश में बुलंदशहर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 241 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 09 सितंबर 2026 को देश में वायु प्रदूषण की तस्वीर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी।

  • सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बुलंदशहर 241 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि एक दिन पहले इसका एक्यूआई 133 था। यानी महज 24 घंटे में प्रदूषण 108 अंक बढ़ गया।

  • बुलंदशहर की हवा में पीएम10 का दबदबा रहा और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 430 फीसदी अधिक दर्ज किया गया। इसके विपरीत आइजोल महज 14 के एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा।

  • प्रदूषण के मामले में पानीपत 233 और ग्रेटर नोएडा 201 के एक्यूआई के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

  • दिल्ली में भी हवा बिगड़ी और एक्यूआई 113 से बढ़कर 128 पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में यह 121 से बढ़कर 149 हो गया।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 252 शहरों के आंकड़ों में 54 शहरों की हवा बेहतर, 144 की संतोषजनक और 51 शहरों की मध्यम रही।

  • विशेषज्ञ नजरिए से देखें तो शहरों के बीच यह अंतर बताता है कि वायु प्रदूषण अब केवल बड़े महानगरों की समस्या नहीं, बल्कि देश के कई छोटे और औद्योगिक शहरों के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 09 सितम्बर 2026 को देश में बुलंदशहर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 241 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (08 सितम्बर) को बुलंदशहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 133 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 108 अंकों का भारी इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि बुलंदशहर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

बुलंदशहर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 430 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बुलंदशहर की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 17.2 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में पानीपत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 259 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 26 अंकों के सुधार के साथ पानीपत में सूचकांक घटकर 233 पर पहुंच गया है। हालांकि वायु गुणवत्ता अभी भी खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 113 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 128 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 15 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-09 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 121 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 149 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 28 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 09 सितम्बर 2026 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 21.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 57.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 21.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 11.5 फीसदी की कमी आई है, जोकि चिंता का विषय है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 5.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 30 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (233) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (201) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बद्दी (182) चौथे स्थान पर है। सासाराम (182) – नोएडा (159) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बल्लभगढ़ (153) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ब्रजराजनगर (152), भिवाड़ी (151) और फरीदाबाद (149) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, नोएडा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, सासाराम, ब्रजराजनगर, भिवाड़ी, फरीदाबाद, सोनीपत, जालंधर, मानेसर, मेरठ, गुम्मिडीपूंडी, पीथमपुर, दिल्ली, पंचगांव, जींद, खोरा, भागलपुर, यमुना नगर, अमृतसर और चरखी दादरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, बद्दी, नोएडा, बल्लभगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, अंबाला, बेगूसराय, गजरौला, खैरथल, मुंगेर, हापुड़, सीकर, दौसा, मुजफ्फरनगर, अलवर, फतेहाबाद, वातवा, कैथल, नारनौल, पाली, सिरसा, छपरा, शामली, गाजियाबाद, श्री गंगानगर, तालचेर, विशाखापत्तनम, सवाई माधोपुर, कटक, हिसार, मोदीनगर और भीलवाड़ा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 21.4 फीसदी यानी 54 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, जलगांव, कलबुर्गी, कारवार, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, लातूर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, पंचकुला, पटियाला, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 144 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें चित्तौड़गढ़, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाद, मालेगांव, मंडीदीप, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 51 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अलवर, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बल्लभगढ़, बेगूसराय, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, ब्रजराजनगर, चरखी दादरी, छपरा, कटक, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, हिसार, जालंधर, जींद, कैथल, खैरथल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मोदीनगर, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पीथमपुर, सासाराम, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुना नगर आदि शामिल हैं।

वहीं बुलंदशहर (241), पानीपत (233) और ग्रेटर नोएडा (201) में स्थिति ‘खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से 54 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 144 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 08 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 152 दर्ज किया गया था।

51 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज बुलंदशहर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 241 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (08 सितम्बर) को बुलंदशहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 133 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 108 अंकों का भारी इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

इससे पहले कल देश में पानीपत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 259 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 26 अंकों के सुधार के साथ पानीपत में सूचकांक घटकर 233 पर पहुंच गया है। हालांकि वायु गुणवत्ता अभी भी खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 113 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 128 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 15 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 121 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 149 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 28 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 09 सितम्बर को बद्दी (182) चौथे स्थान पर है, वहीं पानीपत (233) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (201) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 65, गाजियाबाद में 111, गुवाहाटी में 60, गुरूग्राम में 93, नोएडा में 159, ग्रेटर नोएडा में 201 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 39 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 87, चेन्नई में 82, चंडीगढ़ में 63, हैदराबाद में 59, जयपुर में 91 और पटना में 73 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 54 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारीपदा, बीड, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, बिलासपुर, चामराजनगर, कोयंबटूर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, जलगांव, कलबुर्गी, कारवार, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, लातूर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, पंचकुला, पटियाला, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तुमडीह, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा और विरार शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बागपत, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाद, मालेगांव, मंडीदीप, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सतारा, सतना, सिलचर, सिंगरौली, सिरोही, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी और विजयवाड़ा आदि 144 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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