बड़े शहरों तक सीमित नहीं प्रदूषण: बिहार के हाजीपुर में 238 पर पहुंचा एक्यूआई

दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया
बड़े शहरों तक सीमित नहीं प्रदूषण: बिहार के हाजीपुर में 238 पर पहुंचा एक्यूआई
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सारांश
  • देश में वायु प्रदूषण अब केवल महानगरों की समस्या नहीं रह गया है। बिहार का हाजीपुर 238 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर इस खतरे के छोटे शहरों तक फैलने की चेतावनी दे रहा है।

  • हाजीपुर की हवा विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,450 फीसदी अधिक प्रदूषित दर्ज हुई, जबकि पुदुचेरी 22 एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा।

  • केंद्रीय आंकड़े बताते हैं कि 242 में से करीब आधे शहरों की हवा चिंताजनक स्तर पर है, जिससे साफ है कि देशभर में प्रदूषण का संकट व्यापक और गहराता जा रहा है।

  • हालांकि कुछ शहरों में हल्का सुधार दिखा है, लेकिन अधिकांश इलाकों में पीएम2.5 और पीएम10 का दबदबा इस बात का संकेत है कि भारत की हवा तेजी से स्वास्थ्य संकट में बदल रही है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 13 अप्रैल 2026 को देश में हाजीपुर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 238 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि इससे पहले 12 अप्रैल को बिहार के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 245 दर्ज किया गया था।

मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में सात अंकों का सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि हाजीपुर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। हाजीपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,450 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर हाजीपुर की तुलना पुदुचेरी से करें तो वहां स्थिति 10.8 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में मंडीदीप की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई बढ़कर 272 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में मंडीदीप का जिक्र नहीं है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 163 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 149 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 14 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है।  

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 159 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 13 अप्रैल 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 9.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 46.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 6.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 12.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। कुछ ऐसी ही स्थिति खराब हवा वाले शहरों की भी है, जिनकी संख्या में करीब 46.2 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (233) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (225) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह चरखी दादरी (214) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम- बुलंदशहर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 212 और 206 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

टोंक (204) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पीथमपुर (198), बागपत (190) और सवाई माधोपुर (186) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (गुरुग्राम, बल्लभगढ़, चरखी दादरी) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि हाजीपुर, चरखी दादरी, गुरुग्राम, नंदेसरी, भिवाड़ी, ग्वालियर, फरीदाबाद, सोनीपत, नारनौल, आगरा, लखनऊ, मानेसर, कोटा, गया, जोधपुर, मोतिहारी, बिलासपुर, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), इंदौर, बेगूसराय, पिंपरी-चिंचवाड़, धौलपुर, धारूहेड़ा, यमुना नगर, अररिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सिंगरौली, बल्लभगढ़, बुलंदशहर, टोंक, पीथमपुर, बागपत, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, बिलीपाड़ा, पटना, चंद्रपुर, बेलापुर, सीकर, दिल्ली, नोएडा, बद्दी, बीकानेर, हापुड़, जैसलमेर, नयागढ़, पानीपत, रतलाम, देवास, अहमदाबाद, दमोह, वातवा, मंगलौर, नागौर, भोपाल, नागपुर, झुंझुनू, मंगुराहा, जलना, सोलापुर, करौली, मेहसाणा, सासाराम, गांधीनगर, यादगीर, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बाड़मेर, कटनी, पाली, धुले, वाराणसी, ब्रजराजनगर, जयपुर, खुर्जा, विशाखापत्तनम, भीलवाड़ा, क्योंझर, कोरबा, अगरतला, कुंजेमुरा, अमरावती (महाराष्ट्र), भावनगर, तुमडीह, आइजोल, सिवान, भिवंडी, गोरखपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, वृंदावन, अकोला, छाल, कटक आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 9.1 फीसदी यानी महज 22 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, किशनगंज, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर शामिल हैं।

इसी तरह देश के 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंबरनाथ, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जालौर, झांसी, जींद, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोलकाता, कोप्पल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, पलवल आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 105 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, चंद्रपुर, छाल, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, ग्वालियर, हापुड़, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलना, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नयागढ़, नोएडा, पाली, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रतलाम, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, तिरुपुर, तुमडीह, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में हाजीपुर, सिंगरौली, बल्लभगढ़, चरखी दादरी, गुरुग्राम, बुलंदशहर, टोंक में स्थिति खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से महज 22 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 108 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 12 अप्रैल को यह आंकड़ा 101 दर्ज किया गया था।

105 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज हाजीपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 238 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल हाजीपुर में सूचकांक 245 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में सात अंकों का सुधार आया है।

इससे पहले कल देश में मंडीदीप की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई बढ़कर 272 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में मंडीदीप का जिक्र नहीं है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 163 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 149 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 14 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है।   

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 159 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 13 अप्रैल को चरखी दादरी चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (233) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (225) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 161, गाजियाबाद में 170, गुवाहाटी में 52, गुरूग्राम में 212, नोएडा में 147, ग्रेटर नोएडा में 170 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 90 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 144, चेन्नई में 37, चंडीगढ़ में 66, हैदराबाद में 75, जयपुर में 114 और पटना में 166 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 22 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बरेली, भिवानी, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, गंगटोक, किशनगंज, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जालौर, झांसी, जींद, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोलकाता, कोप्पल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, सांगली, सतना, शिलांग, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा, विरार आदि 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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