लेह में बढ़ते ओजोन से 300 पर पहुंचा एक्यूआई, मानकों से 550 फीसदी अधिक

दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर लेह की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 17 गुणा खराब है।
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • देश में वायु प्रदूषण का असर अब केवल मैदानी और औद्योगिक शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। हिमालय की ऊंचाइयों पर बसा लेह भी प्रदूषण की गंभीर चपेट में आता दिखाई दे रहा है।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 16 सितंबर 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि लेह देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 दर्ज किया गया। यह ‘खराब’ श्रेणी में आता है और एक दिन पहले के 205 के मुकाबले 95 अंकों की तेज वृद्धि को दर्शाता है। लेह में प्रदूषण के साथ ओजोन का बढ़ता स्तर भी चिंता का विषय है।

  • लेह के हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां दर्ज एक्यूआई विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 550 फीसदी अधिक बताया गया है। इसके विपरीत मध्य प्रदेश के दमोह में एक्यूआई महज 17 रहा। यानी दोनों शहरों के बीच वायु गुणवत्ता में बेहद बड़ा अंतर दिखाई दिया।

  • प्रदूषण के मामले में पानीपत 263 के एक्यूआई के साथ दूसरे और पंजाब का खन्ना 174 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। जींद 165, मोदीनगर 147, नोएडा 140, कटक 137, हिसार 134, मंडी गोबिंदगढ़ 133 और अंबाला 130 के साथ देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहरों का होना भी राज्य में प्रदूषण के दबाव को रेखांकित करता है।

  • हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में हवा की स्थिति में सुधार भी दर्ज हुआ। भिवाड़ी में एक्यूआई एक दिन पहले के 214 से गिरकर 94 पर पहुंच गया, जबकि दिल्ली में यह 98 से घटकर 94 रहा। इसके बावजूद फरीदाबाद का एक्यूआई 123 से घटकर 110 होने के बाद भी ‘मध्यम’ श्रेणी में बना रहा।

  • 233 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि 68 शहरों में हवा ‘बेहतर’, 134 में ‘संतोषजनक’ और 29 शहरों में ‘मध्यम’ रही, जबकि लेह और पानीपत में स्थिति ‘खराब’ दर्ज की गई। एक दिन के अंतर में साफ हवा वाले शहरों की संख्या में 13.9 फीसदी की कमी, जबकि मध्यम श्रेणी वाले शहरों में करीब 32 फीसदी की वृद्धि हुई।

  • ये आंकड़े बताते हैं कि देश में वायु प्रदूषण का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कहीं महीन पीएम2.5 कण हावी हैं, तो कहीं पीएम10, ओजोन और अन्य प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

  • पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक बदलती यह तस्वीर इस बात का संकेत है कि स्वच्छ हवा की चुनौती अब किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 16 सितम्बर 2026 को देश में लेह सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (15 सितम्बर) को लेह में प्रदूषण का स्तर 205 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 95 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि लेह की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

लेह में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 550 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर लेह की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 17.6 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में भिवाड़ी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 214 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 120 अंकों के भारी सुधार के साथ भिवाड़ी में सूचकांक घटकर 94 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां वायु गुणवत्ता आज खराब से संतोषजनक हो गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 98 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 94 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 4 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-16 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 123 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 110 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 13 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 16 सितम्बर 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 29.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 57.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 13.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 13.9 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है। 

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (263) दूसरे जबकि खन्ना (174) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह जींद (165) चौथे स्थान पर है। मोदीनगर (147) – नोएडा (140) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

कटक (137) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हिसार (134), मंडी गोबिंदगढ़ (133) और अंबाला (130) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (पानीपत, जींद, हिसार, अंबाला) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, खन्ना, जींद, यमुनानगर, फरीदाबाद, रोहतक, गया, पीथमपुर और चरखी दादरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं लेह, मोदीनगर, नोएडा, कटक, मंडी गोबिंदगढ़, अंबाला, ग्रेटर नोएडा, बागपत, कैथल, जोरापोखर, श्रीगंगानगर, खैरथल, चेन्नई, फतेहाबाद, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, अगरतला, बिलाईपाड़ा और दौसा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 29.2 फीसदी यानी 68 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में देहरादून, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गंगटोक, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, इंदौर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कोल्हापुर, कोटा, लातूर, मदिकेरी, मथुरा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायपुर, राजगीर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 134 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, छाल, चिक्कमगलुरु, चूरू, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, गजरौला, गाजियाबाद, गुंटूर, गुरुग्राम, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, झांसी, झुंझुनू, कडप्पा, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 29 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अंबाला, बागपत, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, चरखी दादरी, चेन्नई, कटक, दौसा, एलूर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गया, ग्रेटर नोएडा, हिसार, जींद, जोरापोखर, कैथल, खैरथल, खन्ना, मंडी गोबिंदगढ़, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पीथमपुर, रोहतक, श्री गंगानगर, टोंक और यमुनानगर शामिल हैं।

वहीं पानीपत (263) और लेह (300) में स्थिति 'खराब' दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से 68 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 134 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 15 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 128 दर्ज किया गया था।

29 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज लेह में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (15 सितम्बर) को लेह में प्रदूषण का स्तर 205 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 95 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

इससे पहले कल देश में भिवाड़ी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 214 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 120 अंकों के भारी सुधार के साथ भिवाड़ी में सूचकांक घटकर 94 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां वायु गुणवत्ता आज खराब से संतोषजनक हो गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 98 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 94 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 4 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है। 

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 123 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 110 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 13 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 16 सितम्बर को जींद (165) चौथे स्थान पर है, वहीं पानीपत (263) दूसरे, जबकि खन्ना (174) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 48, गाजियाबाद में 99, गुवाहाटी में 50, गुरूग्राम में 75, नोएडा में 140, ग्रेटर नोएडा में 126 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 39 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 63, चेन्नई में 106, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 57, जयपुर में 61 और पटना में 78 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 68 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अमरावती (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारां, बारीपाड़ा, बीड, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बोइसर, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, दमोह, देहरादून, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गंगटोक, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, इंदौर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कोल्हापुर, कोटा, लातूर, मदिकेरी, मथुरा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सीकर, सिरोही, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, उल्हासनगर और विरार शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, छाल, चिक्कमगलुरु, चूरू, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, गजरौला, गाजियाबाद, गुंटूर, गुरुग्राम, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, झांसी, झुंझुनू, कडप्पा, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंगेर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंचकुला, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रूपनगर, सागर, सहरसा, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिवमोगा, सिलचर, सिरसा, शिवसागर, सोनीपत, सूरत, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यादगीर आदि 134 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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