प्रदूषण की मार: पानीपत में 366 पर पहुंचा एक्यूआई, डब्ल्यूएचओ मानकों से 2,300 फीसदी अधिक प्रदूषण

रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (पानीपत, करनाल, गुरुग्राम, बल्लभगढ़, सोनीपत) शामिल हैं।
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में हवा की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जहां अधिकांश शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, वहीं पानीपत में एक्यूआई 366 तक पहुंच गया, जो बेहद खराब श्रेणी में दर्ज किया गया।

  • यह आंकड़ा एक दिन पहले के मुकाबले 159 अंकों के भारी उछाल को दर्शाता है। शहर में पीएम2.5 के महीन कणों का दबदबा है, जिसके चलते प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से करीब 2,300 फीसदी अधिक पहुंच गया है।

  • चिंता की बात यह भी है कि देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर—पानीपत, करनाल, गुरुग्राम, बल्लभगढ़ और सोनीपत—शामिल हैं, जो राज्य में बिगड़ती वायु गुणवत्ता की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।

  • दूसरी ओर, अरुणाचल प्रदेश का नाहरलागुन देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 17 दर्ज किया गया।

  • हालांकि 246 शहरों के विश्लेषण में अधिकांश शहरों की हवा संतोषजनक रही, लेकिन खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 133 फीसदी की वृद्धि यह संकेत देती है कि प्रदूषण का संकट तेजी से गहराता जा रहा है। दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा है, जबकि फरीदाबाद में मामूली सुधार दर्ज किया गया।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 28 जून 2026 को देश में पानीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। कल पानीपत में एक्यूआई 207 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 159 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पानीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में नाहरलागुन की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पानीपत की तुलना नाहरलागुन से करें तो वहां स्थिति 21 गुणा खराब है।

कल देश में  मोदीनगर में प्रदूषण सबसे ज्यादा था, जब एक्यूआई 261 दर्ज किया गया। हालांकि आज मोदीनगर 24 अंकों के उछाल के साथ आज वायु गुणवत्ता सूचकांक 285 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 130 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 152 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 22 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 181 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 173 पर पहुंच गया। इसके साथ ही आठ अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 जून 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 21.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 59.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 19.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 17.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 5.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 11.4 फीसदी की कमी आई है। हालांकि दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में 133 फीसदी का उछाल आया है जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मोदीनगर (285) दूसरे जबकि बागपत (237) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह करनाल (233) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम– मेरठ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बल्लभगढ़ (209) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सोनीपत (209), धनबाद (193) और गाजियाबाद (193) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (पानीपत, करनाल, गुरुग्राम, बल्लभगढ़, सोनीपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, मोदीनगर, करनाल, गुरुग्राम, मेरठ, बल्लभगढ़, सोनीपत, फरीदाबाद, भिवानी, खोरा, बक्सर, जींद, बहादुरगढ़, चरखी दादरी, मानेसर, वातवा, बर्नीहाट मेघालय), हाजीपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बागपत, धनबाद, गाजियाबाद, नोएडा, अंबाला, मुजफ्फरनगर, ग्रेटर नोएडा, कुरुक्षेत्र, दिल्ली, बद्दी, कैथल, बुलंदशहर, मुरादाबाद, फतेहाबाद, विशाखापत्तनम, छपरा, भिवाड़ी, रोहतक, अंगुल, पटियाला, चूरू, सीकर, देहरादून, बीकानेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 21.5 फीसदी यानी 53 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बूंदी, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, धौलपुर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, लातूर, मदिकेरी, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, रायपुर, रामनगर, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 146 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मथुरा, मेहसाणा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नारनौल आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 39 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अंबाला, अंगुल, बद्दी, बहादुरगढ़, बारां, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, बक्सर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, छपरा, चूरू, कटक, देहरादून, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हाजीपुर, जींद, कैथल, खोरा, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पटियाला, रोहतक, सीकर, सिलीगुड़ी, तालचेर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।

इसी तरह बागपत, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, करनाल, मेरठ, मोदीनगर, सोनीपत में स्थिति खराब दर्ज की गई है। वहीं पानीपत (366) में स्थिति बेहद खराब दर्ज की गई है।   

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से 53 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 146 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 जून को यह आंकड़ा 154 दर्ज किया गया था।

39 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पानीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 366 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। इससे पहले कल पानीपत में एक्यूआई 207 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 159 अंकों की भारी बढ़ोतरी हुई है।    

कल देश में  मोदीनगर में प्रदूषण सबसे ज्यादा था, जब एक्यूआई 261 दर्ज किया गया। हालांकि आज मोदीनगर 24 अंकों के उछाल के साथ आज वायु गुणवत्ता सूचकांक 285 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 130 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 152 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 22 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 181 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 173 पर पहुंच गया। इसके साथ ही आठ अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 जून को करनाल (233) चौथे स्थान पर है, वहीं मोदीनगर (285) दूसरे, जबकि बागपत (237) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 69, गाजियाबाद में 193, गुवाहाटी में 80, गुरूग्राम में 213, नोएडा में 182, ग्रेटर नोएडा में 169 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 78, चेन्नई में 61, चंडीगढ़ में 56, हैदराबाद में 58, जयपुर में 100 और पटना में 83 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 53 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), बैरकपुर, भिलाई, भोपाल, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, धौलपुर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, लातूर, मदिकेरी, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, रायपुर, रामनगर, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सतारा, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, उल्हासनगर, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मथुरा, मेहसाणा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंपोर, पंचगांव, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिलचर, सिंगरौली, सिरोही, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 146 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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