हरियाणा पर प्रदूषण की मार: सोनीपत सबसे प्रदूषित, 276 एक्यूआई, मदिकेरी की हवा सबसे साफ

01 जुलाई 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि जहां करीब 32.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 47.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि 19.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं
हरियाणा पर प्रदूषण की मार: सोनीपत सबसे प्रदूषित, 276 एक्यूआई, मदिकेरी की हवा सबसे साफ
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सारांश
  • हरियाणा एक बार फिर देश के प्रदूषण संकट का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 1 जुलाई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सोनीपत 276 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां सिर्फ 24 घंटों में प्रदूषण 61 अंक बढ़ गया।

  • स्थिति इतनी गंभीर है कि वहां पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से करीब 1700 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर शामिल रहे, जो राज्य में बिगड़ती वायु गुणवत्ता की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।

  • हालांकि पानीपत, दिल्ली और फरीदाबाद में पिछले दिन की तुलना में कुछ सुधार दर्ज किया गया, लेकिन इन शहरों की हवा अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं कही जा सकती। दूसरी ओर, कर्नाटक का मदिकेरी 13 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां की हवा सोनीपत की तुलना में 21 गुणा से अधिक बेहतर रही।

  • देशभर के 244 शहरों के आंकड़ों से यह भी सामने आया कि 32.8 फीसदी शहरों में हवा बेहतर और 47.5 फीसदी में संतोषजनक रही, जबकि लगभग 20 फीसदी शहर अब भी मध्यम से खराब श्रेणी में हैं।

  • यह तस्वीर बताती है कि मानसून के बावजूद उत्तर भारत के कई हिस्सों में प्रदूषण अब भी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 01 जुलाई 2026 को देश में सोनीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 276 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। कल सोनीपत में एक्यूआई 215 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 61 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि सोनीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

सोनीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,700 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सोनीपत की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 21.2 गुणा खराब है।

कल देश में पानीपत में प्रदूषण सबसे ज्यादा था, जब एक्यूआई 317 दर्ज किया गया। हालांकि आज पानीपत में 85 अंकों के भारी सुधार के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक 232 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 177 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 132 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 45 अंकों का सुधार आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 199 दर्ज किया गया था, जो आज 135 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 64 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 01 जुलाई 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 32.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 47.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 19.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 13.7 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। दूसरी तरह मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 18 फीसदी की कमी आई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में 16.7 फीसदी की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में धनबाद (260) दूसरे जबकि चरखी दादरी (239) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पानीपत (232) चौथे स्थान पर है। जींद (219) –  करनाल (211) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

खोरा (203) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (199), बहादुरगढ़ (197) और बक्सर (197) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर (सोनीपत, चरखी दादरी, पानीपत, जींद, करनाल, गुरुग्राम, और बहादुरगढ़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सोनीपत, धनबाद, चरखी दादरी, जींद, करनाल, खोरा, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, बक्सर, भिवाड़ी, सिरसा, हिसार, नारनौल, भिवानी, चुरू, धारूहेड़ा, बीकानेर, फरीदाबाद, दिल्ली, जालंधर, खैरथल, आगरा, मंडीखेड़ा, यमुना नगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं पानीपत, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, बल्लभगढ़, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, अंबाला, भावनगर, गाजियाबाद, हनुमानगढ़, कुरुक्षेत्र, नोएडा, झुंझुनू, बद्दी, पाली, वातवा, अजमेर, पटियाला, रोहतक आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 32.8 फीसदी यानी 80 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बदलापुर, बागलकोट, बरेली, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कामगलुरु, दमोह, देहरादून, धुले, डोंबिवली, गडग, हल्दिया, हिंगोली, हुबली, जबलपुर, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, काशीपुर, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कुंजमुरा, लातूर, मदिकेरी, महाद, मंडीदीप, मंगलौर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दौसा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जलना, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़ आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 41 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अजमेर, अंबाला, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बाड़मेर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बक्सर, चुरू, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, हिसार, जैसलमेर, जालंधर, झुंझुनू, खैरथल, कुरुक्षेत्र, मंडीखेड़ा, मानेसर, नारनौल, नोएडा, पाली, पटियाला, रोहतक, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, श्रीगंगानगर, सुआकाती, तालचेर, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह चरखी दादरी, धनबाद, जींद, करनाल, खोरा, पानीपत, सोनीपत में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 244 में से 80 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 116 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 30 जून को यह आंकड़ा 102 दर्ज किया गया था।

41 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज सोनीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 276 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 215 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 61 अंकों की भारी बढ़ोतरी हुई है।    

कल देश में पानीपत में प्रदूषण सबसे ज्यादा था, जब एक्यूआई 317 दर्ज किया गया। हालांकि आज पानीपत में 85 अंकों के भारी सुधार के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक 232 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 177 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 132 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 45 अंकों का सुधार आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 199 दर्ज किया गया था, जो आज 135 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 64 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 01 जुलाई को पानीपत (232) चौथे स्थान पर है, वहीं धनबाद (260) दूसरे, जबकि चरखी दादरी (239) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 56, गाजियाबाद में 116, गुवाहाटी में 88, गुरूग्राम में 199, नोएडा में 114, ग्रेटर नोएडा में 151 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 36 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 56, चेन्नई में 58, चंडीगढ़ में 53, हैदराबाद में 51, जयपुर में 92 और पटना में 59 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 80 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बरेली, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कामगलुरु, दमोह, देहरादून, धुले, डोंबिवली, गडग, हल्दिया, हिंगोली, हुबली, जबलपुर, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, काशीपुर, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कुंजमुरा, लातूर, मदिकेरी, महाद, मंडीदीप, मंगलौर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सतारा, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उज्जैन, उलहासनगर, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आरा, आसनसोल, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बरबिल, बारीपाड़ा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दौसा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जलना, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, श्रीनगर, सूरत, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि 116 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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