

देश में वायु प्रदूषण का संकट एक बार फिर गहराने लगा है। 20 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि देश के 266 शहरों में से करीब 46.2 फीसदी में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है।
बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 310 पर पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। यहां महज 24 घंटे में एक्यूआई 62 अंक बढ़ गया। वहीं मध्य प्रदेश के पीथमपुर में भी हवा बिगड़कर 309 के स्तर पर पहुंच गई।
उत्तर प्रदेश के हापुड़, ग्रेटर नोएडा, खोरा और बरौत सहित कई शहरों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है।
राजधानी दिल्ली में भी प्रदूषण ने फिर जोर पकड़ा है। यहां एक्यूआई एक दिन में 40 अंक बढ़कर 179 पर पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में यह 109 से बढ़कर 120 दर्ज किया गया।
आंकड़ों के मुताबिक, देश में साफ हवा वाले शहरों की संख्या में पिछले दिन के मुकाबले 23.3 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की संख्या सात से बढ़कर 12 हो गई।
इसके उलट, मदिकेरी में एक्यूआई महज 21 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे कम रहा। कुल मिलाकर, ये आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में हवा की सेहत बिगड़ रही है और प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 20 अक्टूबर 2026 को देश में एक बार फिर बल्लभगढ़ सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 310 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (19 अक्टूबर) को बल्लभगढ़ में सूचकांक 248 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 62 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बल्लभगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बल्लभगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,950 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बल्लभगढ़ की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 14.7 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 139 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 179 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 40 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 109 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 120 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 11 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 अक्टूबर 2026 को 266 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 8.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 45.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 46.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 23.3 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 0.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। वहीं आज 12 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती 7 रिकॉर्ड की गई थी।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पीथमपुर (309) दूसरे जबकि हापुड़ (230) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह टोंक चौथे स्थान पर है। ग्रेटर नोएडा (229) – खोरा (228) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बरौत (227) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हिंगोली (221), हनुमानगढ़ (217) और मानेसर (215) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (हापुड़, ग्रेटर नोएडा, खोरा, बरौत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बल्लभगढ़, पीथमपुर, हापुड़, टोंक, खोरा, बरौत, हिंगोली, हनुमानगढ़, मानेसर, गजरौला, चरखी दादरी, भावनगर, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, खैरथल, जालंधर, गुरुग्राम, दिल्ली, मंडी गोबिंदगढ़, मुजफ्फरनगर, कानपुर, धुले, खुर्जा, अंकलेश्वर, यमुनानगर, भिवाड़ी, नोएडा, जलना, करनाल, अररिया, सवाई माधोपुर, कोटा, बागपत, मालेगांव, चित्तौड़गढ़, नागपुर, सागर, राजकोट, लखनऊ, मंडीखेड़ा, पाली, वातवा, उज्जैन, धारूहेड़ा, पानीपत, मेरठ, जींद, आगरा, रोहतक, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), मुरादाबाद, पिंपरी-चिंचवाड़, झालावाड़, चंद्रपुर, प्रतापगढ़, अजमेर, डूंगरपुर, बारां, नासिक, राजसमंद, मेहसाणा, विशाखापत्तनम, मोतिहारी और मुंबई आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बीकानेर, हिसार, मंडीदीप, बुलंदशहर, दौसा, पारादीप, अगरतला, अहमदाबाद, सीकर, सिरसा, ग्वालियर, फतेहपुर सीकरी, करौली, नागौर, कुरुक्षेत्र, सासाराम, बद्दी, नारनौल, भरतपुर, वाराणसी, बेलापुर, फतेहाबाद, चुरू, फरीदाबाद, गांधीनगर, अहमदनगर, जोधपुर, झुंझुनू, भोपाल, जालोर, हावड़ा, जैसलमेर, कैथल, अंबाला, बरेली, भिवंडी, भीलवाड़ा, भिवानी, गोरखपुर, बर्नीहाट (मेघालय), सूरत, मथुरा, सिरोही, मीरा-भायंदर, रायचूर, छपरा, जलगांव, लुधियाना, नयागढ़, नेल्लोर और पुणे आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 8.6 फीसदी यानी 23 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चित्तूर, देहरादून, गंगटोक, हावेरी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मैसूरु, नाहरलागुन, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, शिवमोगा और तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, कटक, दमोह, दरभंगा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कारवार, खन्ना, कोहिमा, कोलार, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, महाद, मैहर, मंगुराहा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकूला, परभणी, पटियाला, पटना, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, राउरकेला आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 109 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अंबाला, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बरेली, बाड़मेर, बेलापुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, गोरखपुर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हिसार, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कानपुर, करौली, करनाल, खैरथल, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नारनौल, नासिक, नयागढ़, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पानीपत, पारादीप, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायचूर, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सूरत, उज्जैन, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम और यमुनानगर शामिल हैं।
इसी तरह बरौत, भावनगर, चरखी दादरी, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, खोरा, मानेसर और टोंक में स्थिति खराब जबकि बल्लभगढ़ (310) और पीथमपुर (309) में बेहद खराब दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 266 में से 23 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 120 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 19 अक्टूबर को यह आंकड़ा 119 दर्ज किया गया था।
109 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 310 दर्ज किया गया, जोकि ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (19 अक्टूबर) को बल्लभगढ़ में सूचकांक 248 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 62 अंकों का भारी उछाल आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 139 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 179 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 40 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 109 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 120 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 11 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 20 अक्टूबर को टोंक (230) चौथे स्थान पर है, वहीं पीथमपुर (309) दूसरे, जबकि हापुड़ तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 145, गाजियाबाद में 202, गुवाहाटी में 76, गुरूग्राम में 184, नोएडा में 161, ग्रेटर नोएडा में 229 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 133, चेन्नई में 56, चंडीगढ़ में 57, हैदराबाद में 71, जयपुर में 120 और पटना में 95 दर्ज किया गया।
देश के जिन 23 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बेतिया, बक्सर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, देहरादून, गंगटोक, हावेरी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मैसूरु, नाहरलागुन, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, शिवमोगा और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं।
वहीं अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, कटक, दमोह, दरभंगा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कारवार, खन्ना, कोहिमा, कोलार, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, महाद, मैहर, मंगुराहा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकूला, परभणी, पटियाला, पटना, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सतारा, सतना, शामली, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, सोनीपत, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, सुआकाती, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उडुपी, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन और यादगीर आदि 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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