

हरियाणा एक बार फिर प्रदूषण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभरा है। 21 जून 2026 को सरकारी आंकड़ों के अनुसार सोनीपत देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 208 दर्ज किया गया।
चिंता की बात यह है कि यहां हवा में मौजूद पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से करीब 1,250 फीसदी अधिक है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर शामिल हैं।
हालांकि दिल्ली में प्रदूषण में हल्का सुधार दर्ज किया गया, लेकिन फरीदाबाद में हवा और खराब हुई है।
राहत की बात यह है कि देश के अधिकांश शहरों में हवा संतोषजनक बनी हुई है और खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या में पिछले 24 घंटों के दौरान उल्लेखनीय कमी आई है।
वहीं रूपनगर ने सबसे बड़ा बदलाव दिखाते हुए एक दिन पहले 'खराब' श्रेणी से निकलकर सीधे 'बेहतर' श्रेणी में जगह बना ली। यह रिपोर्ट बताती है कि प्रदूषण का संकट अभी टला नहीं है और हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई शहरों में साफ हवा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 21 जून 2026 को देश में सोनीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 208 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 221 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 13 अंकों आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सोनीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सोनीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,250 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 18 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सोनीपत की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 11.5 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल रूपनगर में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 265 तक पहुंच गया था। वहीं आज 217 अंकों के भारी सुधार के साथ रूपनगर में सूचकांक 48 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के साथ आज वायु गुणवत्ता सीधे खराब से बेहतर श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 132 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 5 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में एक बार फिर वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 107 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 141 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 34 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 21 जून 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 17.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 62.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 19.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से दो फीसदी की कमी आई है। इसी तरफ खराब हवा वाले शहरों की संख्या में कल से करीब 66.7 फीसदी का गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मेरठ (194) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (180) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम (172) – भिवानी (170) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बागपत (167) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पानीपत (165), पंचगांव (164) और गाजियाबाद (161) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (सोनीपत, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, भिवानी, पानीपत और पंचगांव) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सोनीपत, गुरुग्राम, भिवानी, पानीपत, पंचगांव, नारनौल, तालचेर, वापी, बहादुरगढ़, चरखी दादरी, मानेसर, जींद, काशीपुर, सहरसा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं मेरठ, बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, बद्दी, फरीदाबाद, मुजफ्फरनगर, नोएडा, आगरा, दिल्ली, पाली, अंगुल, मुरादाबाद, भिवाड़ी, अंबाला, बीकानेर, बाड़मेर, छपरा, फतेहाबाद, धनबाद, कैथल, करनाल, सिंगरौली, उदयपुर, अगरतला, बारबिल, जैसलमेर, वातवा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 17.8 फीसदी यानी 44 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, भिवंडी, बूंदी, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, धुले, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, कल्याण, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोप्पल, मदिकेरी, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, सांगली, शिवसागर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मथुरा, मेहसाणा, मिलुपारा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 48 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अंबाला, अंगुल, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, बाड़मेर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, चरखी दादरी, छपरा, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हापुड़, जैसलमेर, जींद, कैथल, करनाल, काशीपुर, लखनऊ, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, सहरसा, सिंगरौली, श्री गंगानगर, तालचेर, उदयपुर, वापी, वातवा आदि शामिल हैं।
इसी तरह सोनीपत (208) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से 44 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 154 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 20 जून को यह आंकड़ा 152 दर्ज किया गया था।
48 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सोनीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 208 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 221 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 13 अंकों की गिरावट आई है।
इससे पहले कल रूपनगर में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 265 तक पहुंच गया था। वहीं आज 217 अंकों के भारी सुधार के साथ रूपनगर में सूचकांक 48 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के साथ आज वायु गुणवत्ता सीधे खराब से बेहतर श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 132 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 5 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में एक बार फिर वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 107 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 141 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 34 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 21 जून को ग्रेटर नोएडा (172) चौथे स्थान पर है, वहीं मेरठ (194) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (180) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 84, गाजियाबाद में 161, गुवाहाटी में 76, गुरूग्राम में 172, नोएडा में 138, ग्रेटर नोएडा में 172 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 53 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 112, चेन्नई में 72, चंडीगढ़ में 81, हैदराबाद में 59, जयपुर में 74 और पटना में 96 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 44 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, अंबरनाथ, अंकलेश्वर, आसनसोल, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, बूंदी, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, धुले, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, कल्याण, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोप्पल, मदिकेरी, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, सांगली, शिवसागर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा, विरार, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मथुरा, मेहसाणा, मिलुपारा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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