

पहाड़ों की साफ-सुथरी हवा के लिए पहचाना जाने वाला लेह इस समय प्रदूषण की मार झेल रहा है।
24 अगस्त को 239 शहरों में सबसे खराब वायु गुणवत्ता लेह में दर्ज की गई, जहां एक्यूआई 187 रहा। यह पिछले दिन के 207 से कम जरूर है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा की तुलना में यहां प्रदूषण का स्तर अब भी 4,500 फीसदी अधिक है।
लेह की हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड का दबदबा चिंता बढ़ा रहा है।
दूसरी ओर देश की राजधानी दिल्ली में भी हवा बिगड़ी और एक्यूआई 96 से बढ़कर 111 हो गया। फरीदाबाद में भी प्रदूषण बढ़कर 135 पहुंच गया।
भागलपुर, अंबाला और टोंक जैसे शहर भी सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में ऊपर रहे। कुल मिलाकर 35 शहरों में हवा मध्यम श्रेणी में पहुंच चुकी है।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। 87 शहरों में एक्यूआई 50 या उससे कम रहा और मदिकेरी 12 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा। आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि प्रदूषण का संकट अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 24 अगस्त 2026 को एक बार फिर देश में लेह सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 187 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (23 अगस्त) लेह में सूचकांक 207 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 20 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि लेह की हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
लेह में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 4,500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 12 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर लेह की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 15.5 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 111 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 15 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-24 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 133 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 135 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 2 अंक के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 24 अगस्त 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 36.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 14.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। वहीं दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 13.3 फीसदी की गिरावट आई है। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भागलपुर (172) दूसरे जबकि अंबाला (160) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह टोंक (140) चौथे स्थान पर है। खोरा (139) – नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पलवल (139) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवानी (138), फरीदाबाद (135) और मानेसर (133) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (अंबाला, पलवल, भिवानी, फरीदाबाद, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भागलपुर, खोरा, फरीदाबाद, मानेसर, चरखी दादरी, खैरथल, बड़ौत, पानीपत, जींद, दिल्ली, बर्नीहाट (असम), गुरुग्राम और मुजफ्फरनगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं अंबाला, टोंक, नोएडा, पलवल, भिवानी, पीथमपुर, वातवा, छपरा, नारनौल, श्री गंगानगर, सिवान, जोरापोखर, अजमेर, गांधीनगर, भिवाड़ी, चित्तौड़गढ़, ग्रेटर नोएडा, अलवर और जोधपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 36.4 फीसदी यानी 87 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बालासोर, बरबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बीड, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दौसा, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, एलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, जलगांव, झांसी, कडप्पा, करौली, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मैहर, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बुलंदशहर, बूंदी, चेन्नई, चित्तूर, चूरू, दमोह, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हुबली, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कारवार, कटनी, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सासाराम आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 35 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अजमेर, अलवर, अंबाला, बड़ौत, भागलपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, खैरथल, खोरा, लेह, मानेसर, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पलवल, पानीपत, पीथमपुर, सिलीगुड़ी, सिवान, श्री गंगानगर, टोंक और वातवा आदि शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 87 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 117 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 23 अगस्त को भी यह आंकड़ा 114 दर्ज किया गया था।
35 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर लेह में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 187 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (23 अगस्त) लेह में सूचकांक 207 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 20 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 111 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 15 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 133 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 135 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 2 अंक के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 24 अगस्त को टोंक (140) चौथे स्थान पर है, वहीं भागलपुर (172) दूसरे, जबकि अंबाला (160) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 58, गाजियाबाद में 86, गुवाहाटी में 39, गुरूग्राम में 108, नोएडा में 139, ग्रेटर नोएडा में 102 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 45, चेन्नई में 78, चंडीगढ़ में 45, हैदराबाद में 45, जयपुर में 97 और पटना में 69 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 87 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बीड, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दौसा, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, एलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, जलगांव, झांसी, कडप्पा, करौली, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मैहर, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सांगली, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, वृंदावन और यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भावनगर, भोपाल, बीकानेर, बुलंदशहर, बूंदी, चेन्नई, चित्तूर, चूरू, दमोह, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हुबली, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कारवार, कटनी, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिलचर, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, श्रीकाकुलम, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और यमुना नगर आदि 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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