

देश में वायु प्रदूषण का संकट अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है।
18 फरवरी 2026 को बिहार का हाजीपुर देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 291 दर्ज किया गया और महज 24 घंटे में प्रदूषण स्तर 56 अंकों तक बढ़ गया।
हाजीपुर की हवा में ओजोन का दबदबा है और प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 380 फीसदी अधिक पहुंच चुका है।
दूसरी ओर विरार देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 36 रिकॉर्ड हुआ।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 238 शहरों के आंकड़ों से पता चलता है कि सिर्फ 1.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है, जबकि 54.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
दिल्ली और गाजियाबाद में कुछ सुधार के बावजूद हवा अभी भी ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। रिपोर्ट बताती है कि प्रदूषण का दायरा तेजी से फैल रहा है और छोटे शहर भी अब गंभीर खतरे की जद में आ चुके हैं।
विश्लेषण के मुताबिक 18 फरवरी 2026 को देश में बिहार का हाजीपुर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 291 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 17 फरवरी को हाजीपुर में एक्यूआई 235 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 56 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि हाजीपुर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
हाजीपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 380 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में विरार की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 36 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर हाजीपुर की तुलना विरार से करें तो वहां स्थिति आठ गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 276 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 30 अंकों के सुधार के साथ प्रदूषण का स्तर घटकर 246 पर पहुंच गया है। मतलब कि सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके बावजूद आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 249 दर्ज किया गया था, जो 18 फरवरी को 35 अंकों के सुधार के साथ घटकर 214 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 18 फरवरी 2026 को 238 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 1.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 43.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 54.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 20 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 19.5 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 20 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 44.4 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 166 (+5) दर्ज किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में रूपनगर (272) दूसरे जबकि यमुना नगर (271) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 264 अंकों के साथ कटक चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-ब्यासनगर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 264 और 263 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भिवाड़ी (261) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हापुड़ (258), ग्रेटर नोएडा (247), गाजियाबाद (246) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन (हापुड़, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) और हरियाणा के दो शहर (यमुना नगर, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रूपनगर, यमुना नगर, गुरुग्राम, भिवाड़ी, हापुड़, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, मंडी गोबिंदगढ़, मुजफ्फरनगर, नोएडा, मेरठ, बालासोर, मंडीदीप, दिल्ली, वडोदरा, बागपत, अंगुल, गुम्मिडीपूंडी, सुआकाती, चरखी दादरी, बद्दी, नाहरलागुन, मानेसर, भुवनेश्वर, करनाल, गया, काशीपुर, एलूर, पटना, वातवा, फरीदाबाद, तिरुवनंतपुरम, गुवाहाटी, लखनऊ, कोलकाता, पुणे, रोहतक, सहरसा, गांधीनगर, हावड़ा, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचगांव, सूरत, पानीपत, लुधियाना, राजमहेंद्रवरम, बेगूसराय, सोनीपत, जैसलमेर, मुरादाबाद, कानपुर, नागपुर, बर्नीहाट, भिवानी, आसनसोल, भोपाल, नागांव, मुजफ्फरपुर, जलगांव, मोतिहारी, कैथल, बेंगलुरु, किशनगंज, इंदौर, सांगली, जलना, धुले, जींद, आगरा, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), दुर्गापुर, हल्दिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, सिंगरौली, तालचेर, विशाखापत्तनम, बारबिल, अहमदाबाद, पीथमपुर, नयागढ़, मालेगांव, रतलाम, चंद्रपुर, पिंपरी-चिंचवाड़, उदयपुर, अमरावती (आंधप्रदेश), बुलंदशहर, धनबाद, बीकानेर, डूंगरपुर, महाड, अलवर, सिलीगुड़ी, बाड़मेर, बदलापुर, मंगुराहा, नासिक, तुमकुरु, भिवंडी, टोंक, कुंजेमुरा, उल्हासनगर, अंकलेश्वर, बांसवाड़ा, गोरखपुर, प्रतापगढ़, ब्रजराजनगर, चेन्नई, जालोर, चूरू, धारवाड़, पटियाला, कन्नूर, सिरोही, रामनगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 1.7 फीसदी यानी महज चार शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, दमोह, शिलांग, विरार आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 104 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बिलासपुर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, दौसा, देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, ग्वालियर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, लातूर, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरसा, सिवान, सोलापुर, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 104 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अमरावती (आंधप्रदेश), अंबाला, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बांसवाड़ा, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, बेंगलुरु, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चूरू, धनबाद, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, इंदौर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालोर, जींद, कैथल, कन्नूर, कानपुर, करनाल, काशीपुर, किशनगंज, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मानेसर, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नयागढ़, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रतलाम, रोहतक, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तिरुवनंतपुरम, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वातवा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 26 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, ब्यासनगर, कटक, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हाजीपुर, हापुड़, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, रूपनगर, सिंगरौली, तालचेर, वडोदरा, यमुना नगर शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 238 में से महज चार शहरों में हवा 'बेहतर' है। 104 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 17 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 87 दर्ज किया गया था।
104 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज हाजीपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 291 पर पहुंच गया। इससे पहले कल हाजीपुर में एक्यूआई 235 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 56 अंकों का इजाफा हुआ है।
कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 276 दर्ज किया गया था। जहां आज 30 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 246 पर पहुंच गया। मतलब कि आज भी गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली में 18 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 249 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 214 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 35 अंकों का सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,300 फीसदी अधिक खराब है।
दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में कल जहां एक्यूआई 161 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 166 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 18 फरवरी को कटक चौथे स्थान पर है, वहीं रूपनगर (272) दूसरे, जबकि यमुना नगर (271) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 99, गाजियाबाद में 246, गुवाहाटी में 162, गुरूग्राम में 264, नोएडा में 232, ग्रेटर नोएडा में 247 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 70 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 162, चेन्नई में 105, चंडीगढ़ में 95, हैदराबाद में 89, जयपुर में 92 और पटना में 171 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन चार शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, दमोह, शिलांग, विरार शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बारां, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, बिलासपुर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, दौसा, देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, ग्वालियर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, लातूर, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरसा, सिवान, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुमाला, उज्जैन, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 104 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
240 शहरों में महज पांच की हवा साफ, गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब