नए साल में भी पुरानी मुसीबत: 2026 के पहले दिन दिल्ली की हवा देश में सबसे जहरीली

01 जनवरी 2026 को देश में दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 380 दर्ज किया गया
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • दिल्ली में 01 जनवरी 2026 को वायु गुणवत्ता सूचकांक 380 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक प्रदूषित रहा।

  • दिल्ली की हवा में पीएम2.5 कणों की अधिकता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक प्रदूषण स्तर के साथ, दिल्ली की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

  • दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 30 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर दिल्ली की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 12 गुणा खराब है।

  • 01 जनवरी 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 1.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 21.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 77.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 234 रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में नोएडा (367) दूसरे जबकि गाजियाबाद (356) तीसरे स्थान पर है।

  • इसी तरह 352 अंकों के साथ ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है। बागपत-पानीपत में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 349 और 347 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

  • चित्तूर (339) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बालासोर (337), धारूहेड़ा (331) और बारीपदा (319) भी शामिल हैं। आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बागपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 01 जनवरी 2026 को देश में दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 380 रिकॉर्ड किया गया। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 373 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में सात अंकों का इजाफा हुआ है।

हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' बनी हुई है। रुझानों में सामने आया है कि दिल्ली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

दिल्ली से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 30 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर दिल्ली की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 12 गुणा खराब है।

कल देश में नोएडा की हवा सबसे खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 दर्ज किया गया था। आज 15 अंकों के सुधार के साथ नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 367 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां आज वायु गुणवत्ता गंभीर से बेहद खराब श्रेणी में है।       

गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 01 जनवरी 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 1.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 21.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 77.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 25 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 13.3 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 2.4 फीसदी की गिरावट आई है।

दूसरी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो उनकी गिनती में कल से 16 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह बेहद खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो उनकी गिनती में कल से 25 फीसदी का इजाफा रिकॉर्ड किया गया, जोकि चिंता का विषय है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 234 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में नोएडा (367) दूसरे जबकि गाजियाबाद (356) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 352 अंकों के साथ ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है। बागपत-पानीपत में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 349 और 347 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

चित्तूर (339) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बालासोर (337), धारूहेड़ा (331) और बारीपदा (319) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के दो (बालासोर, बारीपदा) और उत्तर प्रदेश के चार शहर (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बागपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, बागपत, पानीपत, चित्तूर, बालासोर, धारूहेड़ा, बारीपदा, मेरठ, देहरादून, बद्दी, गुरुग्राम, जींद, तालचेर, कुरुक्षेत्र, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, इंदौर, राजमहेंद्रवरम, अंगुल, कोल्लम, करनाल, बुलंदशहर, हावड़ा, ब्यासनगर, बैरकपुर, सुआकाती, ग्वालियर, हापुड़, खुर्जा, पंचकुला, तिरुमाला, कोलकाता, चंडीगढ़, सिंगरौली, आसनसोल, जैसलमेर, हल्दिया, पीथमपुर, टोंक, भोपाल, भिवाड़ी, कोटा, अमरावती (आंध्रप्रदेश), फरीदाबाद, बारबिल, झालावाड़, दुर्गापुर, हाजीपुर, बल्लभगढ़, गुम्मिडीपूंडी, सोनीपत, बूंदी, मुजफ्फरनगर, यमुना नगर, नागपुर, गांधीनगर, समस्तीपुर, जयपुर, मानेसर, सीकर, सिवान, बहादुरगढ़, प्रयागराज आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं क्योंझर, धनबाद, मंडीदीप, नारनौल, रतलाम, बेगूसराय, हनुमानगढ़, किशनगंज, बिलीपाड़ा, पटियाला, श्री गंगानगर, तुमडीह, औरंगाबाद (बिहार), सिरसा, ब्रजराजनगर, बारां, कल्याण, रायरंगपुर, सूरत, सहरसा, धुले, चुरू, अलवर, नयागढ़, झुंझुनू, मालेगांव, सांगली, अमृतसर, उल्हासनगर, वातवा, बदलापुर, चंद्रपुर, सवाई माधोपुर, अमरावती (महाराष्ट्र), भिवंडी, अकोला, अजमेर, अंकलेश्वर, बिलासपुर, सासाराम, टेन्सा, मंगुराहा, जलना, पलवल आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 1.3 फीसदी यानी महज तीन शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में आइजोल, दमोह, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 51 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बरेली, बेलापुर, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालोर, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, पुडुचेरी, रायपुर आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 124 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बहादुरगढ़, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, छाल, चित्तौड़गढ़, चुरू, कोयंबटूर, दौसा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलूर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, हनुमानगढ़, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, करूर, काशीपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोरबा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नयागढ़, पाली, पलवल, परभनी, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सवाई माधोपुर, शिलांग, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तिरुपति, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, यादगीर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 42 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंगुल, आसनसोल, बल्लभगढ़, बारबिल, बैरकपुर, भिवाड़ी, भोपाल, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, धनबाद, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जैसलमेर, झालावाड़, करनाल, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, मंडीदीप, मुजफ्फरनगर, नागपुर, पंचकुला, पीथमपुर, राजमहेंद्रवरम, सिंगरौली, सोनीपत, सुआकाती, तिरुमाला, टोंक, यमुना नगर शामिल हैं।

इसी तरह आज देश के 20 शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। इन शहरों में बद्दी, बागपत, बालासोर, बारीपदा, भुवनेश्वर, चित्तूर, कटक, देहरादून, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, जींद, कुरुक्षेत्र, मेरठ, नोएडा, पानीपत, तालचेर, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से महज तीन शहरों में हवा 'बेहतर' है। 51 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 31 दिसंबर 2025 को यह आंकड़ा 45 दर्ज किया गया था।

124 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज दिल्ली (380) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 390 के करीब पहुंच गया। इसके साथ ही आज भी दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ बनी हुई है। हालांकि कल से प्रदूषण में सात अंकों  का इजाफा जरूर हुआ है।  

गौरतलब है कि कल देश में नोएडा की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी। जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 15 अंकों के सुधार के साथ नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 367 पर पहुंच गया। मतलब कि आज नोएडा में स्थिति बेहद खराब बनी हुई है।

फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। आज फरीदाबाद में एक्यूआई 234 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि आज भी फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 01 जनवरी को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं नोएडा (367) दूसरे, जबकि गाजियाबाद (356) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 269, गाजियाबाद में 356, गुवाहाटी में 72, गुरूग्राम में 312, नोएडा में 367, ग्रेटर नोएडा में 352 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 90 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 165, चेन्नई में 79, चंडीगढ़ में 259, हैदराबाद में 98, जयपुर में 193 और पटना में 172 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन तीन शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, दमोह, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बरेली, बेलापुर, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालोर, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, पुडुचेरी, रायपुर, रूपनगर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, श्रीनगर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, वृंदावन आदि 51 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

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