प्रदूषण की गिरफ्त में भारत: पीथमपुर में 286 पर पहुंचा एक्यूआई, दिल्ली में भी जहरीली हुई हवा

28 अक्टूबर को देश के 265 शहरों के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि करीब आधे शहरों की हवा चिंताजनक है, जबकि महज 11.3 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) द्वारा जारी नई रिपोर्ट के मुताबिक, 92 दिनों के पूरे मानसून के दौरान दिल्ली में सिर्फ एक दिन हवा ‘बेहतर’ श्रेणी में रही, जबकि इस दौरान राजधानी में अच्छी बारिश हुई। फोटो: विकास चौधरी/ सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) द्वारा जारी नई रिपोर्ट के मुताबिक, 92 दिनों के पूरे मानसून के दौरान दिल्ली में सिर्फ एक दिन हवा ‘बेहतर’ श्रेणी में रही, जबकि इस दौरान राजधानी में अच्छी बारिश हुई। फोटो: विकास चौधरी/ सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • 28 अक्टूबर 2026 को देश की हवा में प्रदूषण का खतरा और गहरा गया।

  • सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, 265 शहरों में से करीब 48.3 फीसदी यानी लगभग आधे शहरों में वायु गुणवत्ता चिंताजनक रही, जबकि महज 30 शहरों में हवा साफ दर्ज की गई।

  • मध्य प्रदेश का पीथमपुर 286 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां एक ही दिन में सूचकांक 87 अंक बढ़ गया। वहां हवा में पीएम10 कणों का दबदबा रहा और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 530 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • राजधानी दिल्ली में भी हालात बिगड़े हैं। यहां एक्यूआई 197 से बढ़कर 229 पर पहुंच गया, जिससे हवा मध्यम से खराब श्रेणी में आ गई।

  • वहीं, गुम्मिडीपूंडी में प्रदूषण घटने के बावजूद एक्यूआई 238 बना रहा। देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में खोरा, पानीपत, पंचगांव और बल्लभगढ़ भी शामिल रहे। खास बात यह है कि दस सबसे प्रदूषित शहरों में चार हरियाणा के हैं।

  • आंकड़े बताते हैं कि 23 शहरों में हवा खराब रही, जबकि एक दिन पहले ऐसे शहरों की संख्या 12 थी। दूसरी ओर, मिजोरम की राजधानी आइजोल में एक्यूआई महज 17 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे साफ हवा का संकेत है।

  • ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का संकट केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं, बल्कि देश के अनेक छोटे-बड़े शहरों की सांसों पर भारी पड़ रहा है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 28 अक्टूबर 2026 को देश में पीथमपुर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 286 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (27 अक्टूबर) को पीथमपुर में सूचकांक 199 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 87 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पीथमपुर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पीथमपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 530 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पीथमपुर की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 16.8 गुणा खराब है।

इससे पहले कल गुम्मिडीपूंडी में एक्यूआई 285 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 47 अंकों के सुधार के साथ गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक घटकर 238 पर पहुंच गया। मतलब कि सुधार के बावजूद वहां वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 197 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 229 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 32 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 122 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 126 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 4 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 अक्टूबर 2026 को 265 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 11.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 40.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 48.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 57.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 5.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 19 फीसदी से अधिक की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं आज 23 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती 12 रिकॉर्ड की गई थी।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में खोरा (277) दूसरे जबकि पानीपत (274) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पंचगांव (265) चौथे स्थान पर है। बल्लभगढ़ (264) – किऊल (263) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

भिवाड़ी (253) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बीकानेर (253), कैथल (246) और नोएडा (246) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (पानीपत, पंचगांव, बल्लभगढ़, कैथल) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि खोरा, पानीपत, पंचगांव, बल्लभगढ़, किऊल, कैथल, नोएडा, फतेहपुर सीकरी, गुम्मिडीपूंडी, बागपत, दिल्ली, मानेसर, खैरथल, बड़ौत, गुरुग्राम, गजरौला, मेरठ, ग्वालियर, जींद, हनुमानगढ़, कोटा, जमुई, सवाई माधोपुर, खन्ना, सिवान, मथुरा, मुजफ्फरनगर, खुर्जा, अंबाला, लुधियाना, अररिया, बहादुरगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, आगरा, मंडीखेड़ा, कुरुक्षेत्र, बेगूसराय, चरखी दादरी, हाजीपुर, यमुनानगर, जालंधर, फतेहाबाद, धारूहेड़ा, गोरखपुर, सोनीपत, धुले, पटना, मोदीनगर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), पूर्णिया, समस्तीपुर, बठिंडा, मंगुराहा, पुणे, डूंगरपुर और हापुड़ आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं पीथमपुर, भिवाड़ी, बीकानेर, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, श्री गंगानगर, बर्नीहाट (मेघालय), वृंदावन, टोंक, बुलंदशहर, चित्तौड़गढ़, सिरसा, जालौर, सासाराम, भरतपुर, झुंझुनू, अंकलेश्वर, बूंदी, अहमदाबाद, नागौर, पाली, जोधपुर, अमृतसर, सीकर, चुरू, सतारा, हिसार, नारनौल, भीलवाड़ा, देवास, मालेगांव, महाड, वाराणसी, वातवा, उदयपुर, फरीदाबाद, मंडीदीप, दौसा, भोपाल, धौलपुर, बेलापुर, भिवंडी, लखनऊ, पटियाला, गया, भिवानी, चेन्नई, जैसलमेर, बाड़मेर, पिंपरी-चिंचवाड़, मुरादाबाद, सूरत, रोहतक, बेंगलुरु, कल्याण, नासिक, कटनी, बद्दी, राजसमंद, जोरापोखर, रायचूर और छपरा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 11.3 फीसदी यानी 30 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बांसवाड़ा, बारीपदा, बेतिया, भिलाई, भुवनेश्वर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, कटक, दमोह, कलबुर्गी, करनाल, क्योंझर, कोरबा, कुंजेमुरा, लेह, मदिकेरी, मिलुपारा, नागांव, नयागढ़, ओंगोल, पंचकूला, रायरंगपुर, ऋषिकेश, राउरकेला आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 107 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बक्सर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, दरभंगा, दावणगेरे, देहरादून, धारवाड़, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जलना, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, कारवार, काशीपुर, कटिहार, किशनगंज, कोहिमा, कोलार, कोल्हापुर, कोलकाता, कुरनूल, लातूर, मछलीपट्टनम, मैहर, मंगलौर, मेहसाणा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पारादीप, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायबरेली, रायपुर, राजगीर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सतना, शामली आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 105 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अंबाला, अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गया, गोरखपुर, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, जमुई, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नागौर, नारनौल, नासिक, पाली, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायचूर, राजसमंद, रोहतक, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोनीपत, सूरत, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वाराणसी, वातवा, वृंदावन और यमुनानगर शामिल हैं।

इसी तरह बागपत, बल्लभगढ़, बड़ौत, भिवाड़ी, बीकानेर, दिल्ली, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, कैथल, खैरथल, खोरा, किऊल, मानेसर, मेरठ, नोएडा, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर और श्री गंगानगर में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 265 में से 30 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 107 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को यह आंकड़ा 113 दर्ज किया गया था।

105 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पीथमपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 286 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (27 अक्टूबर) को पीथमपुर में सूचकांक 199 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 87 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल गुम्मिडीपूंडी में एक्यूआई 285 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 47 अंकों के सुधार के साथ गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक घटकर 238 पर पहुंच गया। मतलब कि सुधार के बावजूद वहां वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 197 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 229 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 32 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 122 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 126 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 4 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 अक्टूबर को पंचगांव (265) चौथे स्थान पर है, वहीं खोरा (277) दूसरे, जबकि पानीपत (274) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 178, गाजियाबाद में 210, गुवाहाटी में 79, गुरूग्राम में 203, नोएडा में 246, ग्रेटर नोएडा में 220 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 90 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 118, चेन्नई में 115, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 65, जयपुर में 122 और पटना में 119 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 30 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बांसवाड़ा, बारीपदा, बेतिया, भिलाई, भुवनेश्वर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, कटक, दमोह, कलबुर्गी, करनाल, क्योंझर, कोरबा, कुंजेमुरा, लेह, मदिकेरी, मिलुपारा, नागांव, नयागढ़, ओंगोल, पंचकूला, रायरंगपुर, ऋषिकेश, राउरकेला, सुआकाती, टेन्सा, त्रिशूर और विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बैरकपुर, बीड, भागलपुर, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बोइसर, बक्सर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, दरभंगा, दावणगेरे, देहरादून, धारवाड़, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जलना, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, कारवार, काशीपुर, कटिहार, किशनगंज, कोहिमा, कोलार, कोल्हापुर, कोलकाता, कुरनूल, लातूर, मछलीपट्टनम, मैहर, मंगलौर, मेहसाणा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पारादीप, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायबरेली, रायपुर, राजगीर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सतना, शामली, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सीतामढ़ी, शिवसागर, सोलापुर, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा और विरार आदि 107 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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