हवा में बढ़ता जहर: प्रदूषित शहरों में पहले पायदान पर अगरतला, फतेहपुर सीकरी से पारादीप तक बिगड़े हालात

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 153 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 174 पर पहुंच गया।
बढ़ते प्रदूषण से बिगड़े हालात, बीमार, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना हुआ दुश्वार; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण से बिगड़े हालात, बीमार, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना हुआ दुश्वार; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 26 अक्टूबर 2026 को देश के 266 शहरों में से करीब 48.5 फीसदी में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है।

  • अगरतला में प्रदूषण ने सबसे ज्यादा छलांग लगाई, जहां एक्यूआई एक दिन में 117 अंक बढ़कर 264 पर पहुंच गया। इसके साथ ही शहर देश में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में पहले पायदान पर पहुंच गया।

  • फतेहपुर सीकरी 256 के एक्यूआई के साथ दूसरे और सवाई माधोपुर 237 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। पारादीप, श्री गंगानगर, खैरथल और गजरौला समेत कई अन्य शहरों में भी हवा जहरीली बनी हुई है।

  • राजधानी दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा है। यहां एक्यूआई 153 से बढ़कर 174 पर पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में मामूली सुधार के साथ यह 124 से घटकर 117 दर्ज किया गया। इसके उलट, राजस्थान के खैरथल में 40 अंकों के सुधार के बावजूद एक्यूआई 230 रहा, जो खराब वायु गुणवत्ता को दर्शाता है।

  • आंकड़े बताते हैं कि देश के केवल 20 शहरों में हवा साफ रही, जबकि 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक और 116 में मध्यम दर्ज की गई। वहीं, खराब हवा वाले शहरों की संख्या एक दिन में सात से बढ़कर 13 हो गई।

  • गंगटोक में एक्यूआई महज 20 दर्ज किया गया, जो अगरतला की तुलना में हवा की गुणवत्ता में बड़ा अंतर दिखाता है। ये आंकड़े बताते हैं कि वायु प्रदूषण अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में भी लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 26 अक्टूबर 2026 को देश में अगरतला सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (25 अक्टूबर) को अगरतला में सूचकांक 147 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 117 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि अगरतला की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

अगरतला में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 480 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अगरतला की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 13.2 गुणा खराब है।

इससे पहले कल खैरथल में एक्यूआई 270 दर्ज किया गया। हालांकि आज 40 अंकों के सुधार के साथ खैरथल में सूचकांक घटकर 230 पर पहुंच गया है। मतलब कि सुधार के बावजूद वहां वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 153 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 174 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 21 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 124 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 117 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 7 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 26 अक्टूबर 2026 को 266 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 7.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 48.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 25.9 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 0.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से कोई नहीं आया है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। वहीं आज 13 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती 7 रिकॉर्ड की गई थी।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में फतेहपुर सीकरी (256) दूसरे जबकि सवाई माधोपुर (237) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पारादीप (235) चौथे स्थान पर है। श्री गंगानगर (235) – खैरथल (230) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

गजरौला (225) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में अंगुल (224), मंडीदीप (219) और खोरा (213) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (फतेहपुर सीकरी, गजरौला, खोरा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि फतेहपुर सीकरी, सवाई माधोपुर, श्री गंगानगर, खैरथल, गजरौला, मथुरा, राजमहेंद्रवरम, गुम्मिडीपूंडी, हाजीपुर, भावनगर, ग्वालियर, भिवाड़ी, हनुमानगढ़, मंडीखेड़ा, बड़ौत, करौली, दिल्ली, मोतिहारी, पानीपत, बहादुरगढ़, कोटा, नोएडा, गुरुग्राम, उज्जैन, अररिया, भोपाल, जालंधर, बागपत, मेरठ, बद्दी, गांधीनगर, कानपुर, सोनीपत, यमुना नगर, मेहसाणा, विशाखापत्तनम, महाड, गाजियाबाद, चंद्रपुर, मालेगांव, तिरुमाला, वातवा, अंबाला, मुजफ्फरनगर, अंकलेश्वर, आगरा, डूंगरपुर, पुणे, मोदीनगर, मानेसर, पिंपरी-चिंचवाड़, बल्लभगढ़, लुधियाना, कैथल, नागपुर, पाली, हापुड़, अलवर, मुंबई, मुजफ्फरपुर और सागर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं अगरतला, पारादीप, मंडीदीप, खोरा, बर्नीहाट (मेघालय), वृंदावन, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, टोंक, पीथमपुर, अहमदाबाद, धौलपुर, बीकानेर, तालचेर, नागौर, जोधपुर, भरतपुर, सतारा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, ग्रेटर नोएडा, खुर्जा, जालोर, नारनौल, श्रीकाकुलम, झुंझुनू, वाराणसी, भीलवाड़ा, बेलापुर, जैसलमेर, झालावाड़, बाड़मेर, सासाराम, उदयपुर, चरखी दादरी, सीकर, दौसा, इंदौर, ठाणे, प्रयागराज, वडोदरा, भिवंडी, बारां, फरीदाबाद, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, जयपुर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), सूरत, सिरसा, कटनी, अजमेर, जलगांव, जलना, अहमदनगर, अमृतसर, अंबरनाथ, मुरादाबाद, छपरा और हिसार आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 7.5 फीसदी यानी 20 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बरेली, बेतिया, बक्सर, चामराजनगर, गंगटोक, हावेरी, क्योंझर, किशनगंज, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, नागांव, पंचकूला, राजगीर, सहरसा, शिलांग, शिवमोगा, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कटक, दमोह, दरभंगा, दावणगेरे, देहरादून, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गडग, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, झांसी, जींद, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कारवार, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, मधुबनी, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बारां, बड़ौत, बाड़मेर, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हिसार, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कैथल, कानपुर, करौली, कटनी, खुर्जा, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नारनौल, नोएडा, पाली, पानीपत, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, रतलाम, सागर, सासाराम, सतारा, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्रीकाकुलम, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुमाला, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुना नगर शामिल हैं।

इसी तरह अगरतला, अंगुल, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गुम्मिडीपूंडी, खैरथल, खोरा, मंडीदीप, मथुरा, पारादीप, राजमहेंद्रवरम, सवाई माधोपुर और श्री गंगानगर में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 266 में से 20 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 117 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 25 अक्टूबर को यह आंकड़ा 118 दर्ज किया गया था।

116 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज अगरतला में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (25 अक्टूबर) को अगरतला में सूचकांक 147 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 117 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल खैरथल में एक्यूआई 270 दर्ज किया गया। हालांकि आज 40 अंकों के सुधार के साथ खैरथल में सूचकांक घटकर 230 पर पहुंच गया है। मतलब कि सुधार के बावजूद वहां वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 153 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 174 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 21 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 124 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 117 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 7 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 26 अक्टूबर को पारादीप (235) चौथे स्थान पर है, वहीं फतेहपुर सीकरी (256) दूसरे, जबकि सवाई माधोपुर (237) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 188, गाजियाबाद में 142, गुवाहाटी में 84, गुरूग्राम में 156, नोएडा में 157, ग्रेटर नोएडा में 146 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 105 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 117, चेन्नई में 80, चंडीगढ़ में 67, हैदराबाद में 73, जयपुर में 116 और पटना में 97 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 20 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बरेली, बेतिया, बक्सर, चामराजनगर, गंगटोक, हावेरी, क्योंझर, किशनगंज, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, नागांव, पंचकूला, राजगीर, सहरसा, शिलांग, शिवमोगा, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भिवानी, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कटक, दमोह, दरभंगा, दावणगेरे, देहरादून, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गडग, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, झांसी, जींद, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कारवार, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, मधुबनी, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सतना, शामली, सिलचर, सिलीगुड़ी, सीतामढ़ी, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सुआकाती, टेन्सा, थूथुकुडी, तुमडीह, उल्हासनगर, विजयवाड़ा और विरार आदि 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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