

दिल्ली में 17 जनवरी 2026 को वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 तक पहुंच गया, जिसके साथ ही वो देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया।
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,400 फीसदी अधिक है। दिल्ली की हवा में पीएम2.5 कणों की अधिकता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में दिल्ली की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 30 गुणा खराब है।
17 जनवरी 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 22.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 75.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 253 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (394) दूसरे जबकि नोएडा (388) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 364 अंकों के साथ धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है।
गुरुग्राम- भिवाड़ी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 360 और 354 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (332) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बल्लभगढ़ (326), मंडीदीप (322), मानेसर (319) भी शामिल हैं।
आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) और हरियाणा के चार शहर (गुरुग्राम, बल्लभगढ़, धारूहेड़ा, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 17 जनवरी 2026 को देश में दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 400 रिकॉर्ड किया गया। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 354 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 46 अंकों का इजाफा हुआ है। हालांकि वहां अभी भी वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।
रुझानों में सामने आया है कि दिल्ली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
दिल्ली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,400 फीसदी अधिक है। गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में दिल्ली की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 30 गुणा खराब है।
कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 376 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 18 अंकों के उछाल के साथ गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 394 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब से खराब श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 जनवरी 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 22.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 75.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 26.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 5.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 10.3 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है, जोकि चिंता का विषय है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 75 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 253 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (394) दूसरे जबकि नोएडा (388) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 364 अंकों के साथ धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम- भिवाड़ी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 360 और 354 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (332) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बल्लभगढ़ (326), मंडीदीप (322), मानेसर (319) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) और हरियाणा के चार शहर (गुरुग्राम, बल्लभगढ़, धारूहेड़ा, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, बद्दी, चरखी दादरी, पानीपत, मुजफ्फरनगर, बागपत, नारनौल, बिलीपाड़ा, सिवान, हाजीपुर, लखनऊ, यमुना नगर, फरीदाबाद, सिंगरौली, पटना, सहरसा, तालचेर, बिहार शरीफ, बालासोर, करनाल, गुम्मिडीपूंडी, चंडीगढ़, कोलकाता, हावड़ा, कोटा, समस्तीपुर, वातवा, मेरठ, बूंदी, विशाखापत्तनम, चित्तौड़गढ़, कानपुर, कैथल, देहरादून, हिसार, प्रयागराज, बुलंदशहर, बारीपदा, पंचकुला, जींद, ग्वालियर, कोल्लम, बीकानेर, बहादुरगढ़, कुरुक्षेत्र, आसनसोल, मुंगेर, बोइसर, जालंधर, नाहरलागुन, भीलवाड़ा, मोतिहारी, राजगीर, कटनी, बेलापुर, जालोर, बक्सर, गुवाहाटी, सूरत, राउरकेला, झालावाड़, जयपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, मंडीदीप, सवाई माधोपुर, अंकलेश्वर, टोंक, आगरा, नागौर, धनबाद, बेगूसराय, चूरू, कल्याण, झुंझुनू, हनुमानगढ़, क्योंझर, कुंजेमुरा, श्री गंगानगर, वाराणसी, पटियाला, जैसलमेर, अलवर, फतेहाबाद, खन्ना, अहमदनगर, अजमेर, भिवंडी, सुआकाती, नयागढ़, भागलपुर, बारां, मंगुराहा, पलवल, औरंगाबाद बिहार), लुधियाना, नांदेड़, सिलीगुड़ी, ब्रजराजनगर, सिरोही, जलगांव, मुंबई, बदलापुर, रतलाम, आरा, पुडुकोट्टई, बांसवाड़ा, धारवाड़, महाड, प्रतापगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 2.1 फीसदी यानी महज चार शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कलबुर्गी, शिलांग आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 55 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बिलासपुर, छपरा, चित्तूर, दावनगेरे, देवास, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, मंडी गोबिंदगढ़, मिलुपारा, मैसूर, नासिक, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 136 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चूरू, कोयंबटूर, कुड्डालोर, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, करूर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुकोट्टई, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तिरुमाला, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, विरार, यादगीर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 32 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बालासोर, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चित्तौड़गढ़, कटक, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, हाजीपुर, हावड़ा, कानपुर, करनाल, कोलकाता, कोटा, लखनऊ, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, पटना, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सिवान, तालचेर, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं अंगुल, बद्दी, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मंडीदीप, मानेसर, नोएडा, पानीपत में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से महज पांच शहरों में हवा 'बेहतर' है। 55 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 16 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 75 दर्ज किया गया था।
136 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज दिल्ली (400) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 46 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके बावजूद अभी भी दिल्ली में वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है।
कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 376 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 18 अंकों के उछाल के साथ गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 394 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता आज भी बेहद खराब है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण के स्तर में उछाल आया है, जहां सूचकांक 253 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 17 जनवरी को धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (394) दूसरे, जबकि नोएडा (388) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 194, गाजियाबाद में 394, गुवाहाटी में 169, गुरूग्राम में 360, नोएडा में 388, ग्रेटर नोएडा में 332 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 110 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 261, चेन्नई में 108, चंडीगढ़ में 220, हैदराबाद में 86, जयपुर में 163 और पटना में 236 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन पांच शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कलबुर्गी, शिलांग शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), बाड़मेर, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, भिवानी, बिलासपुर, छपरा, चित्तूर, दावनगेरे, देवास, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, मंडी गोबिंदगढ़, मिलुपारा, मैसूर, नासिक, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, तुमडीह, वापी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 55 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
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