सांसों पर संकट: चरखी दादरी में हवा 'जहरीली', दिल्ली-फरीदाबाद में मामूली राहत

चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • 18 मई 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि हरियाणा का चरखी दादरी देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 317 दर्ज किया गया। यह स्तर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है और बीते 24 घंटों में यहां प्रदूषण 48 अंक बढ़ा है।

  • हालात इतने गंभीर हैं कि चरखी दादरी की हवा में मौजूद पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 2,000 फीसदी अधिक पहुंच गया है।

  • रिपोर्ट बताती है कि चरखी दादरी और देश के सबसे साफ शहर मदिकेरी (एक्यूआई 15) के बीच प्रदूषण का अंतर 21 गुणा है। प्रदूषण की सूची में बुलंदशहर (281), सिंगरौली (250), ग्रेटर नोएडा (236), मेरठ और गाजियाबाद भी शीर्ष पर रहे।

  • खास बात यह है कि सबसे प्रदूषित 10 शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर शामिल हैं।

  • राजधानी दिल्ली और फरीदाबाद में हल्की राहत दर्ज की गई है, लेकिन दोनों शहरों की हवा अब भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

  • 227 शहरों के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि करीब 41 फीसदी शहरों की हवा चिंताजनक है, जबकि केवल 11.5 फीसदी शहरों में हवा साफ रही। यह तस्वीर बताती है कि देश के बड़े हिस्से में सांस लेना अब भी जोखिम भरा बना हुआ है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 18 मई 2026 को देश में चरखी दादरी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 317 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 269 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 48 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 21 गुणा खराब है।

वहीं कल सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 278 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 250 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 28 अंकों का सुधार आया है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 174 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 173 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में एक अंक का मामूली सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 183 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 171 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 18 मई 2026 को 227 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 11.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 47.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 40.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 8.3 फीसदी का उछाल आया है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 10 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 6.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बुलंदशहर (281) दूसरे जबकि सिंगरौली (250) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (236) चौथे स्थान पर है। मेरठ- गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 233 और 212 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

भिवाड़ी (204) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बल्लभगढ़ (201), सीकर (199) और बर्नीहाट (असम) (194) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, मेरठ और गाजियाबाद) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, बल्लभगढ़, बर्नीहाट (असम), हाजीपुर, धारूहेड़ा, जींद, अंबाला, काशीपुर, कैथल, मंगुराहा, बहादुरगढ़, बिलीपाड़ा, यमुना नगर, खन्ना, तिरुपति, वातवा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बुलंदशहर, सिंगरौली, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, भिवाड़ी, सीकर, नोएडा, दिल्ली, सवाई माधोपुर, फरीदाबाद, पानीपत, लखनऊ, बागपत, मुजफ्फरनगर, जयपुर, कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, चूरू, कटनी, आगरा, भरतपुर, हापुड़, मेहसाणा, झुंझुनू, टोंक, खुर्जा, पाली, भीलवाड़ा, बीकानेर, जैसलमेर, धौलपुर, कानपुर, बेगूसराय, बारां, नांदेड़, जोरापोखर, रतलाम, झांसी, मुरादाबाद, पटियाला, चित्तौड़गढ़, फतेहाबाद, पटना, लुधियाना, प्रतापगढ़, वडोदरा, भावनगर, बाड़मेर, उदयपुर, अलवर, रोहतक, अमृतसर, कोटा, वाराणसी, फिरोजाबाद, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, झालावाड़, वृंदावन, बारबिल, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 11.5 फीसदी यानी 26 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, कुड्डालोर, गुवाहाटी, हल्दिया, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पेरुंदुरई, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, शिवसागर, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, देहरादून, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गडग, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालौर, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कटिहार, किशनगंज, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, राउरकेला, सागर, सहरसा, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 85 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अलवर, अंबाला, अमृतसर, अंगुल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, काशीपुर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नांदेड़, नोएडा, पाली, पानीपत, परभणी, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रतलाम, रोहतक, सवाई माधोपुर, सीकर, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, वृंदावन, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बुलंदशहर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, सिंगरौली में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं चरखी दादरी (317) में स्थिति बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 227 में से 26 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 108 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 17 मई को यह आंकड़ा 120 दर्ज किया गया था।

85 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 317 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 269 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 48 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज चरखी दादरी वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

कल सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 278 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 250 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 28 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 174 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 173 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में एक अंक का मामूली सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 183 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 171 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 18 मई को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं बुलंदशहर (281) दूसरे, जबकि सिंगरौली (250) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 157, गाजियाबाद में 212, गुवाहाटी में 45, गुरूग्राम में 157, नोएडा में 181, ग्रेटर नोएडा में 236 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 54 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 166, चेन्नई में 94, चंडीगढ़ में 81, हैदराबाद में 74, जयपुर में 161 और पटना में 111 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 26 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, बगलकोट, बैरकपुर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, गुवाहाटी, हल्दिया, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पेरुंदुरई, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, शिवसागर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, देहरादून, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गडग, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालौर, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कटिहार, किशनगंज, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, राउरकेला, सागर, सहरसा, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोलापुर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम आदि 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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