बीकानेर की हवा में घुला प्रदूषण, 24 घंटे में 82 अंक बढ़ा एक्यूआई; देश में सबसे खराब रही हवा

29 सितम्बर 2026 को देश में बीकानेर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 227 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 29 सितम्बर 2026 को देश के शहरों में वायु प्रदूषण के बदलते रुझानों के बीच बीकानेर सबसे प्रदूषित शहर बनकर सामने आया।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, बीकानेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 227 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है। खास बात यह है कि एक दिन पहले वहां एक्यूआई 145 था, यानी महज 24 घंटे में इसमें 82 अंकों का उछाल आया।

  • बीकानेर की हवा में पीएम10 प्रदूषक हावी रहा। इसके विपरीत कर्नाटक का मदिकेरी 17 के एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा।

  • देश के 252 शहरों के आंकड़ों से पता चलता है कि 39 शहरों में हवा ‘बेहतर’, 170 में ‘संतोषजनक’ और 42 शहरों में ‘मध्यम’ श्रेणी में रही। एक दिन में साफ हवा वाले शहरों की संख्या 29.1 फीसदी घटी, जबकि मध्यम श्रेणी वाले शहरों की संख्या 44.8 फीसदी बढ़ी।

  • गुम्मिडीपूंडी, बिलीपाड़ा और पलवल समेत कई शहरों में भी प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहा। दिल्ली में एक्यूआई 56 से बढ़कर 71 हुआ, जबकि फरीदाबाद में 110 से घटकर 97 दर्ज किया गया।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 29 सितम्बर 2026 को देश में बीकानेर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 227 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (28 सितम्बर) को बीकानेर में सूचकांक 145 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 82 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि बीकानेर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

बीकानेर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बीकानेर की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 13.4 गुणा खराब है।

इससे पहले देश में गुम्मिडीपूंडी की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 174 रिकॉर्ड किया गया। लेकिन आज 22 अंकों के उछाल के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 196 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 56 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 71 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 15 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 110 दर्ज किया गया था, जो आज 13 अंकों के सुधार के साथ घटकर 97 पर पहुंच गया है। मतलब कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 29 सितम्बर 2026 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 67.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 17.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 29.1 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 10.4 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 44.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुम्मिडीपूंडी (196) दूसरे जबकि बिलीपाड़ा (160) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पलवल (159) चौथे स्थान पर है। बर्नीहाट (मेघालय) (149) – गोरखपुर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पाली (147) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में कटक (143), अगरतला (136) और टोंक (135) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (बीकानेर, पाली, टोंक) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, गोरखपुर, तालचेर, पानीपत, हावड़ा और मेहसाणा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बीकानेर, बिलीपाड़ा, पलवल, बर्नीहाट (मेघालय), पाली, अगरतला, टोंक, नागौर, पीथमपुर, मंडीदीप, सीकर, कुंजेमुरा, टेन्सा, कटनी, मंडी गोबिंदगढ़, वातवा, चंद्रपुर, चुरू, अंबरनाथ, ब्रजराजनगर, खोरा, छपरा, बारीपदा, विशाखापत्तनम, अहमदाबाद, जोधपुर, उदयपुर, बद्दी, कोलकाता, अजमेर, सासाराम और झुंझुनू आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 15.5 फीसदी यानी 39 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिवानी, चामराजनगर, चंडीगढ़, देहरादून, धौलपुर, धुले, फिरोजाबाद, गंगटोक, हापुड़, कलबुर्गी, क्योंझर, कोल्हापुर, लातूर, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मानेसर, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, नयागढ़, पंचकुला, पटियाला, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, समस्तीपुर, सांगली, सिलीगुड़ी, सोलापुर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 170 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावेरी, हिंगोली, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, कोटा आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 41 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अजमेर, अंबरनाथ, अंगुल, बद्दी, बारीपदा, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, छपरा, चुरू, कटक, एलूर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, हावड़ा, झुंझुनू, जोधपुर, कटनी, खोरा, कोलकाता, कुंजेमुरा, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, नागौर, पाली, पलवल, पानीपत, पीथमपुर, सासाराम, सीकर, तालचेर, टेन्सा, टोंक, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।

वहीं बीकानेर (227) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से 39 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 170 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 28 सितम्बर को यह आंकड़ा 154 दर्ज किया गया था।

42 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज बीकानेर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 227 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (28 सितम्बर) को बीकानेर में सूचकांक 145 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 82 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

इससे पहले देश में गुम्मिडीपूंडी की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 174 रिकॉर्ड किया गया। लेकिन आज 22 अंकों के उछाल के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 196 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 56 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 71 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 15 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 110 दर्ज किया गया था, जो आज 13 अंकों के सुधार के साथ घटकर 97 पर पहुंच गया है। मतलब कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 29 सितम्बर को पलवल (159) चौथे स्थान पर है, वहीं गुम्मिडीपूंडी (196) दूसरे, जबकि बिलीपाड़ा (160) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 70, गाजियाबाद में 88, गुवाहाटी में 71, गुरूग्राम में 89, नोएडा में 88, ग्रेटर नोएडा में 93 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 80, चेन्नई में 91, चंडीगढ़ में 28, हैदराबाद में 59, जयपुर में 97 और पटना में 92 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 39 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, बदलापुर, बठिंडा, बीड, बेतिया, भिवानी, चामराजनगर, चंडीगढ़, देहरादून, धौलपुर, धुले, फिरोजाबाद, गंगटोक, हापुड़, कलबुर्गी, क्योंझर, कोल्हापुर, लातूर, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मानेसर, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, नयागढ़, पंचकुला, पटियाला, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, समस्तीपुर, सांगली, सिलीगुड़ी, सोलापुर, तिरुवनंतपुरम, उडुपी और विरार शामिल हैं।

वहीं आगरा, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावेरी, हिंगोली, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, कोटा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मालेगांव, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, नोएडा, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, रूपनगर, सागर, सहरसा, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, यादगीर और यमुना नगर आदि 170 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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