भिवानी बना देश का सबसे जहरीली हवा वाला शहर, बारिश के बाद दिल्ली-फरीदाबाद में सुधरी हवा

भिवानी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,640 फीसदी अधिक है
भिवानी बना देश का सबसे जहरीली हवा वाला शहर, बारिश के बाद दिल्ली-फरीदाबाद में सुधरी हवा
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सारांश
  • देश में प्रदूषण के समीकरण लगातार बदल रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा 29 मई 2026 को जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि हरियाणा का भिवानी देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 262 दर्ज किया गया।

  • हालात इतने खराब हैं कि यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से 1,640 फीसदी ज्यादा पहुंच गया है।

  • भिवानी की हवा में पीएम2.5 जैसे बेहद खतरनाक महीन कण पूरी तरह हावी हैं, जो सांस और दिल की बीमारियों का बड़ा कारण बन सकते हैं।

  • दूसरी तरफ केरल का तिरुवनंतपुरम देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 16 रिकॉर्ड किया गया। यानी भिवानी की हवा वहां के मुकाबले 16 गुना ज्यादा जहरीली है।

  • हालांकि बारिश और मौसम में बदलाव के बाद दिल्ली-एनसीआर को राहत मिली है। दिल्ली में एक्यूआई 207 से घटकर 123 और फरीदाबाद में 255 से घटकर 152 पर पहुंच गया।

  • देशभर के 227 शहरों के आंकड़ों में सामने आया कि करीब एक-तिहाई शहर अब भी खराब या मध्यम प्रदूषण की चपेट में हैं। राजस्थान के पांच शहर देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जो बढ़ते धूल और कण प्रदूषण की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 29 मई 2026 को देश में भिवानी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 262 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल भिवानी में सूचकांक 257 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 5 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि भिवानी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

भिवानी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,640 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में तिरुवनंतपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर भिवानी की तुलना तिरुवनंतपुरम से करें तो वहां स्थिति 16 गुणा खराब है।

वहीं कल ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 329 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 221 अंकों के भारी सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 108 पर पहुंच गया है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में भारी गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 207 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 123 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 84 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।   

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 255 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 152 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 29 मई 2026 को 227 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 17.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 33.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.9 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 3.7 फीसदी का उछाल आया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 9.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 46.7 फीसदी का कमी दर्ज हुई है, जोकि राहत की खबर है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भीलवाड़ा (256) दूसरे जबकि विरार (233) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बीकानेर (231) चौथे स्थान पर है। बाड़मेर (230)- सिरोही (226) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

उदयपुर (221) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में कैथल (210), बद्दी (200) और पानीपत (194) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के पांच शहर (भीलवाड़ा, बीकानेर, बाड़मेर, सिरोही और उदयपुर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भिवानी, विरार, कैथल, बद्दी, गाजियाबाद, फरीदाबाद, बर्नीहाट (असम), पंचकुला, गुम्मिडीपूंडी, करनाल, अंबाला, खन्ना, मानेसर, नारनौल, जालंधर, कोटा, धारूहेड़ा, धौलपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं भीलवाड़ा, बीकानेर, बाड़मेर, सिरोही, उदयपुर, पानीपत, कुरुक्षेत्र, चित्तौड़गढ़, सीकर, बर्नीहाट (मेघालय), नागौर, सिंगरौली, सवाई माधोपुर, जोधपुर, प्रतापगढ़, मंडीदीप, पटियाला, टोंक, पाली, यमुना नगर, जैसलमेर, विशाखापत्तनम, जयपुर, करौली, पीथमपुर, वातवा, जोरापोखर, बल्लभगढ़, फतेहाबाद, झुंझुनू, मुजफ्फरनगर, चेन्नई, अजमेर, बांसवाड़ा, अमृतसर, हनुमानगढ़, देवास, जालोर, भोपाल, गुरुग्राम, भिवाड़ी, गांधीनगर, दौसा, मेहसाणा, रतलाम, झालावाड़, अलवर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 17.1 फीसदी यानी 39 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दुर्गापुर, गंगटोक, गुवाहाटी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, नागांव, नाहरलागुन, नंदेसरी, पंपोर, पेरुंदुरई, पुणे, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, सांगली, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 112 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तूर, कुड्डालोर, दमोह, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, गडग, गया, गोरखपुर, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झांसी, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पंचगांव, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सतना, शिवमोगा आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 68 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अजमेर, अलवर, अंबाला, अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, भिवाड़ी, भोपाल, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, दौसा, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, करौली, करनाल, खन्ना, कोटा, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, नागौर, नांदेड़, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रतलाम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में बाड़मेर, भीलवाड़ा, भिवानी, बीकानेर, कैथल, सिरोही, उदयपुर, विरार में स्थिति ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 227 में से 39 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 112 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 28 मई को यह आंकड़ा 108 दर्ज किया गया था।

68 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज भिवानी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 262 दर्ज किया गया। इससे पहले कल भिवानी में सूचकांक 257 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 5 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही आज भी भिवानी में वायु गुणवत्ता 'खराब' बनी हुई है।      

वहीं कल ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 329 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 221 अंकों के भारी सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 108 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में भारी गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 207 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 123 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 84 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।    

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 255 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 152 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 29 मई को बीकानेर (231) चौथे स्थान पर है, वहीं भीलवाड़ा (256) दूसरे, जबकि विरार (233) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 92, गाजियाबाद में 159, गुवाहाटी में 42, गुरूग्राम में 108, नोएडा में 131, ग्रेटर नोएडा में 108 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 78, चेन्नई में 116, चंडीगढ़ में 103, हैदराबाद में 70, जयपुर में 129 और पटना में 90 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 39 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, बगलकोट, बरेली, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भिलाई, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दुर्गापुर, गंगटोक, गुवाहाटी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, नागांव, नाहरलागुन, नंदेसरी, पंपोर, पेरुंदुरई, पुणे, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, सांगली, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरबिल, बारीपाड़ा, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तूर, कुड्डालोर, दमोह, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, गडग, गया, गोरखपुर, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झांसी, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पंचगांव, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा आदि 112 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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