

ओजोन प्रदूषण के तीखे उछाल ने 19 मार्च को अंगुल को देश का सबसे जहरीला शहर बना दिया, जहां एक्यूआई 303 के साथ हालात ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गए, यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से करीब चार गुना अधिक है।
इसके उलट पंपोर में महज 14 के एक्यूआई के साथ देश की सबसे साफ हवा दर्ज की गई, जो अंगुल से 21 गुना बेहतर स्थिति को दर्शाती है।
राहत की बात यह रही कि दिल्ली और फरीदाबाद में 24 घंटों के भीतर उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ, लेकिन प्रदूषण अभी भी सुरक्षित सीमाओं से काफी ऊपर बना हुआ है।
देशभर में तस्वीर मिली-जुली रही, जहां आधे से अधिक शहरों में हवा संतोषजनक है, वहीं करीब एक-तिहाई शहर अब भी प्रदूषण की चपेट में हैं, जो लगातार बदलते वायु संकट की गंभीरता को उजागर करता है।
विश्लेषण के मुताबिक 19 मार्च 2026 को देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल सरकारी आंकड़ों में अंगुल का जिक्र नहीं था।
रुझानों में सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना पंपोर से करें तो वहां स्थिति 21 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में मंडी गोबिंदगढ़ की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 285 दर्ज किया गया। हालांकि आज 177 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 108 पर पहुंच गया है। मतलब कि सिंगरौली में वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 232 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 137 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 95 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 100 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 213 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 164 पर पहुंच गया। इसका मतलब कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 19 मार्च 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 12.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 54.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 32.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 6.3 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 22.2 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 18.2 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 68.4 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (231) दूसरे जबकि कटक (228) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बारां (224) चौथे स्थान पर है। बहादुरगढ़-हाजीपुर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 216 और 213 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्वालियर (205) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सवाई माधोपुर (195), मंडीदीप (192) और बुलंदशहर (176) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्य प्रदेश के तीन शहर (सिंगरौली, ग्वालियर, मंडीदीप) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बहादुरगढ़, हाजीपुर, मंडीदीप, बुलंदशहर, नंदेसरी, फरीदाबाद, मुजफ्फरपुर, गुरुग्राम, वातवा, गाजियाबाद, नोएडा, यमुना नगर, भागलपुर, सोनीपत, रोहतक, नारनौल, लखनऊ, महाद, चरखी दादरी, बेलापुर, धारूहेड़ा, आरा, मोतिहारी, मंडी गोबिंदगढ़, भिवाड़ी, करनाल आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिंगरौली, टोंक, पीथमपुर, बठिंडा, अहमदाबाद, गांधीनगर, अंकलेश्वर, ग्रेटर नोएडा, झालावाड़, कोटा, पाली, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, नागौर, देवास, बूंदी, गया, छपरा, सिरसा, अजमेर, पिंपरी-चिंचवाड़, सहरसा, वडोदरा, धनबाद, बारबिल, डूंगरपुर, आगरा, बांसवाड़ा, जयपुर, मालेगांव, उज्जैन, करौली, मेहसाणा, झांसी, कटनी, सासाराम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 12.4 फीसदी यानी महज 30 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, हल्दिया, हुबली, जालंधर, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, लातूर, मदिकेरी, मैसूरु, नाहरलागुन, नेल्लोर, पंपोर, पंचकुला, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, शिलांग आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 132 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें भिवानी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालौर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 72 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बांसवाड़ा, बारबिल, बठिंडा, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, बूंदी, चरखी दादरी, छपरा, दौसा, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, डूंगरपुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, इंदौर, जयपुर, झालावाड़, झांसी, करौली, करनाल, कटनी, कोटा, लखनऊ, महाद, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेहसाणा, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागौर, नंदेसरी, नारनौल, नोएडा, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रोहतक, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सिरसा, सोनीपत, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वातवा, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 6 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बहादुरगढ़, बारां, कटक, ग्वालियर, हाजीपुर, सिंगरौली शामिल हैं। इसी तरह अंगुल (303) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से महज 30 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 132 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 18 मार्च को यह आंकड़ा 108 दर्ज किया गया था।
72 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 पर पहुंच गया। वहीं कल सरकारी आंकड़ों में अंगुल का जिक्र नहीं था।
इससे पहले कल मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रिकॉर्ड की गई थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 285 तक पहुंच गया। वहीं आज मंडी गोबिंदगढ़ में एक्यूआई 108 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से सूचकांक में 177 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 232 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 137 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 95 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 100 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 213 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 164 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 19 मार्च को बारां चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (231) दूसरे, जबकि कटक (228) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 205, गाजियाबाद में 148, गुवाहाटी में 59, गुरूग्राम में 154, नोएडा में 136, ग्रेटर नोएडा में 148 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 60 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 125, चेन्नई में 42, चंडीगढ़ में 78, हैदराबाद में 65, जयपुर में 106 और पटना में 140 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 30 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बागलकोट, बैरकपुर, भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, हल्दिया, हुबली, जालंधर, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, लातूर, मदिकेरी, मैसूरु, नाहरलागुन, नेल्लोर, पंपोर, पंचकुला, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, शिलांग, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी शामिल हैं।
वहीं अकोला, अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बरेली, बाड़मेर, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भिवंडी, भिवानी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालौर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उडुपी, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 132 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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