अंगुल में बढ़ते ओजोन से 300 के पार पहुंचा एक्यूआई, बर्नीहाट-सिंगरौली में स्थिति खराब

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया
बढ़ते प्रदूषण से बिगड़े हालात, बीमार, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना हुआ दुश्वार; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण से बिगड़े हालात, बीमार, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना हुआ दुश्वार; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • ओडिशा के अंगुल में बढ़ते ओजोन के चलते 24 घंटे में एक्यूआई 227 अंक उछलकर 303 पहुंच गया। इसके साथ ही अंगुल देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जबकि मदिकेरी की हवा सबसे साफ है। बर्नीहाट और सिंगरौली भी प्रदूषण में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

  • राहत की बात यह रही कि दिल्ली और फरीदाबाद समेत कई शहरों में प्रदूषण घटा है और देश के ज्यादातर शहरों में हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में बनी हुई है, लेकिन कई शहरों में पीएम2.5, पीएम10 और ओजोन प्रदूषण अभी भी चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है।

विश्लेषण के मुताबिक 01 अप्रैल 2026 को देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल ओडिशा के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 76 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 227 अंकों का भारी उछाल आया है। 

रुझानों में सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 18 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 171 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 113 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 58 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 176 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 133 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 01 अप्रैल 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 10.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 70.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 19.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 34.2 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 21.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से 22 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 60 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।            

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बर्नीहाट (मेघालय) (269) दूसरे जबकि सिंगरौली (254) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (200) चौथे स्थान पर है। हाजीपुर-टोंक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 198 और 192 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

मंडी गोबिंदगढ़ (191) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पीथमपुर (178), ब्यासनगर (177) और श्री गंगानगर (173) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उड़ीसा के दो शहर (अंगुल, ब्यासनगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बल्लभगढ़, हाजीपुर, मंडी गोबिंदगढ़, पीथमपुर, ब्यासनगर, सोनीपत, यमुना नगर, भिवानी, परभणी, फरीदाबाद, अररिया, तालचेर, कन्नूर, पटना, बर्नीहाट (असम), समस्तीपुर, मेरठ, रोहतक आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बर्नीहाट (मेघालय), सिंगरौली, कटक, बिलीपाड़ा, देवास, बद्दी, गाजियाबाद, जलगांव, तुमडीह, मुजफ्फरनगर, मिलुपारा, बीकानेर, दिल्ली, भिवाड़ी, मालेगांव, वाराणसी, कुंजेमुरा, नयागढ़, धनबाद, कटनी, कटिहार आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 10.1 फीसदी यानी महज 25 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, चामराजनगर, डिंडीगुल, फिरोजाबाद, गंगटोक, हुबली, जालंधर, कोहिमा, मदिकेरी, मैहर, मंगलौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 174 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, देहरादून, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 46 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अररिया, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बालासोर, बल्लभगढ़, बारबिल, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), कटक, दिल्ली, देवास, धनबाद, फरीदाबाद, गाजियाबाद, हाजीपुर, जयपुर, जलगांव, झालावाड़, कन्नूर, कटिहार, कटनी, कुंजेमुरा, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, नागौर, नयागढ़, परभणी, पटना, पीथमपुर, रोहतक, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, तुमडीह, वाराणसी, यमुना नगर शामिल हैं।

इसी तरह बर्नीहाट (मेघालय), सिंगरौली में वायु गुणवत्ता ‘खराब’, जबकि अंगुल (303) में बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 248 में से महज 25 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 174 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 31 मार्च को यह आंकड़ा 143 दर्ज किया गया था।

46 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 दर्ज किया गया। वहीं कल अंगुल में सूचकांक 76 रिकॉर्ड किया गया। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 227 अंकों का इजाफा हुआ है। 

इससे पहले कल देश में (30 मार्च) को बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 264 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां वायु गुणवत्ता में 64 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 171 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 113 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 58 अंकों का सुधार हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 176 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 133 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।     

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 01 अप्रैल को बल्लभगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (मेघालय) (269) दूसरे, जबकि सिंगरौली (254) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 87, गाजियाबाद में 130, गुवाहाटी में 75, गुरूग्राम में 94, नोएडा में 94, ग्रेटर नोएडा में 78 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 66, चेन्नई में 55, चंडीगढ़ में 65, हैदराबाद में 79, जयपुर में 113 और पटना में 116 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 25 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबरनाथ, बगलकोट, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, डिंडीगुल, फिरोजाबाद, गंगटोक, हुबली, जालंधर, कोहिमा, मदिकेरी, मैहर, मंगलौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, देहरादून, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नोएडा, पाली, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पेरुंदुरई,

पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वातवा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 174 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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