

देश में वायु प्रदूषण का दबाव अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गया। 07 अक्टूबर 2026 के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि छोटे और औद्योगिक शहरों में हवा तेजी से खराब हो रही है।
बहादुरगढ़ 285 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां एक दिन में एक्यूआई 108 अंक बढ़ा और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 17 गुना अधिक रहा।
बहादुरगढ़ के बाद अगरतला (242), पीथमपुर (239), अहमदाबाद (226), मानेसर (212) और मंडीदीप (208) सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
हालांकि, दिल्ली-एनसीआर में कुछ राहत दिखाई दी। दिल्ली का एक्यूआई 179 से घटकर 136 और गाजियाबाद का 238 से गिरकर 145 पर आ गया।
इसके बावजूद हरियाणा के चार शहर—बहादुरगढ़, मानेसर, पानीपत और गुरुग्राम—देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में रहे।
सीपीसीबी के 252 शहरों के आंकड़ों में 29 शहरों की हवा बेहतर, 134 की संतोषजनक और 83 शहरों की मध्यम श्रेणी में रही। बहादुरगढ़ समेत कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 प्रदूषण प्रमुख चिंता बने हुए हैं।
आंकड़े संकेत देते हैं कि देश में प्रदूषण का भूगोल बदल रहा है और अब छोटे, औद्योगिक तथा तेजी से विकसित होते शहर भी साफ हवा की बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 07 अक्टूबर 2026 को देश में बहादुरगढ़ सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 285 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (06 अक्टूबर) को बहादुरगढ़ में सूचकांक 177 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 108 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बहादुरगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बहादुरगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,700 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बहादुरगढ़ की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 17.8 गुणा खराब है।
इससे पहले कल गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 238 पर पहुंच गया था। हालांकि आज 93 अंकों के भारी सुधार के साथ गाजियाबाद में सूचकांक घटकर 145 पर आ गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 179 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 136 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 43 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
आज भी सरकारी आंकड़ों में फरीदाबाद का जिक्र नहीं है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 07 अक्टूबर 2026 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 11.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 53.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 35.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 31.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 11.7 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती पांच से बढ़कर छह पर आ गई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अगरतला (242) दूसरे जबकि पीथमपुर (239) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह अहमदाबाद (226) चौथे स्थान पर है। मानेसर (212) – मंडीदीप (208) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पानीपत (197) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चंद्रपुर (179), बड़ौत (175), गुरुग्राम (174) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (बहादुरगढ़, मानेसर, पानीपत और गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बहादुरगढ़, मानेसर, चंद्रपुर, बड़ौत, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, मुंगेर, डोंबिवली, भिवाड़ी, तालचेर, नांदेड़, मेरठ, चरखी दादरी, मोदीनगर, गांधीनगर, पुणे, गुम्मिडीपूंडी, डूंगरपुर, सूरत, हावड़ा, कोलकाता, उज्जैन और अररिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं अगरतला, पीथमपुर, अहमदाबाद, मंडीदीप, पानीपत, बागपत, श्री गंगानगर, वातवा, बेगूसराय, सतारा, बद्दी, गाजियाबाद, सवाई माधोपुर, सहरसा, पारादीप, टोंक, हिंगोली, दिल्ली, ग्वालियर, हिसार, रोहतक, फतेहपुर सीकरी, जयपुर, नोएडा, पिंपरी-चिंचवाड़, नारनौल, उदयपुर, बर्नीहाट (मेघालय), कुरुक्षेत्र, वडोदरा, खैरथल, विशाखापत्तनम, सिरसा, दौसा, मंडी गोबिंदगढ़, रायरंगपुर, अंबाला, पाली, अंकलेश्वर, भोपाल, बेलापुर, बारीपदा, मालेगांव, बारां, बिलीपाड़ा, बूंदी, छपरा, देवास, कैथल, गजरौला, मुजफ्फरनगर, हल्दिया, मेहसाणा, बुलंदशहर, जबलपुर, भावनगर, कोटा, चूरू और धुले आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 11.5 फीसदी यानी 29 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, कलबुर्गी, करनाल, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नागांव, नाहरलागुन, पंचकुला, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, सिलीगुड़ी, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 134 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें हापुड़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मथुरा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, परभणी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 83 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंबाला, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, बद्दी, बागपत, बारां, बड़ौत, बारीपदा, बेगूसराय, बेलापुर, भावनगर, भिवाड़ी, भोपाल, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, एलूर, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हल्दिया, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, कैथल, खैरथल, खोरा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लेह, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नोएडा, पाली, पानीपत, पारादीप, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रायरंगपुर, रोहतक, सहरसा, सतारा, सवाई माधोपुर, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।
वहीं देश में आज बहादुरगढ़ (285), अगरतला (242), पीथमपुर (239), अहमदाबाद (226), मानेसर (212) और मंडीदीप (208) में स्थिति खराब है। इन शहरों में सूचकांक 200 से ऊपर दर्ज किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से 29 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 134 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 06 अक्टूबर को यह आंकड़ा 131 दर्ज किया गया था।
83 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बहादुरगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 285 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (06 अक्टूबर) को बहादुरगढ़ में सूचकांक 177 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 108 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 238 पर पहुंच गया था। हालांकि आज 93 अंकों के भारी सुधार के साथ गाजियाबाद में सूचकांक घटकर 145 पर आ गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 179 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 136 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 43 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
आज भी सरकारी आंकड़ों में फरीदाबाद का जिक्र नहीं है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 अक्टूबर को अहमदाबाद (226) चौथे स्थान पर है, वहीं अगरतला (242) दूसरे, जबकि पीथमपुर (239) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 133, गाजियाबाद में 145, गुवाहाटी में 70, गुरूग्राम में 174, नोएडा में 129, ग्रेटर नोएडा में 89 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 91 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 80, चेन्नई में 63, चंडीगढ़ में 61, हैदराबाद में 73, जयपुर में 129 और पटना में 84 दर्ज किया गया।
देश के जिन 29 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में बदलापुर, बांसवाड़ा, बरेली, बेतिया, बिहार शरीफ, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, कलबुर्गी, करनाल, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नागांव, नाहरलागुन, पंचकुला, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, सिलीगुड़ी, तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बालासोर, बल्लभगढ़, बारबिल, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, दमोह, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मथुरा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, परभणी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार और यादगीर आदि 134 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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