

देश में महज 24 घंटों के भीतर वायु गुणवत्ता की तस्वीर तेजी से बदल गई है। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार 12 जुलाई 2026 को ग्रेटर नोएडा 335 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जहां प्रदूषण का स्तर एक दिन में 129 अंक बढ़कर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गया।
वहीं दिल्ली में भी एक्यूआई 140 से बढ़कर 261 हो गया, जबकि फरीदाबाद में भी प्रदूषण बढ़ने के संकेत मिले।
इसके विपरीत, कल सबसे प्रदूषित रहा जैसलमेर 138 अंकों के सुधार के बावजूद 252 के एक्यूआई के साथ अब भी ‘खराब’ श्रेणी में बना हुआ है।
सबसे साफ हवा आइजोल में दर्ज की गई, जहां एक्यूआई केवल 15 रहा। विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि देश के 251 शहरों में से केवल 42 शहरों की हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि करीब एक-तिहाई शहरों में वायु गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई।
उत्तर प्रदेश के चार शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। रुझान यह भी बताते हैं कि अधिकांश प्रभावित शहरों में पीएम10 और पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म कण प्रदूषण की मुख्य वजह बने हुए हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 12 जुलाई 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 335 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (11 जुलाई) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 206 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 129 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 640 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 22.3 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में जैसलमेर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 390 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 138 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 252 दर्ज किया गया है। मतलब की वहां स्थिति बेहद खराब से खराब हो गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 140 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 261 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 121 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 11 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 155 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 184 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 29 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 12 जुलाई 2026 को 251 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 16.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 32.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 8.7 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 14.7 फीसदी की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 21.7 फीसदी का उछाल देखा गया। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 320 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में आरा (330) दूसरे जबकि बुलंदशहर (306) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पंचगांव (305) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद–हापुड़ (281) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बीकानेर (280) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में कैथल (278), जींद (271) और फतेहाबाद (267) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, गाजियाबाद और हापुड़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि आरा, पंचगांव, कैथल, जींद, मेरठ, भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, मानेसर, बहादुरगढ़, मोदीनगर, फरीदाबाद, रोहतक, करनाल, तालचेर, अलवर, नारनौल, गुवाहाटी, धारूहेड़ा, खैरथल, खोरा, पंचकुला, जयपुर, आगरा, पटना आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, बीकानेर, फतेहाबाद, पानीपत, दिल्ली, नोएडा, जैसलमेर, अंबाला, हिसार, सिरसा, बद्दी, मुजफ्फरनगर, बल्लभगढ़, हनुमानगढ़, श्री गंगानगर, कुरुक्षेत्र, चूरू, बाड़मेर, पटियाला, विशाखापत्तनम, तिरुमाला, भिवाड़ी, मथुरा, विरार, अमरावती (आंध्रप्रदेश), झुंझुनू, मंडी गोबिंदगढ़, बागपत, बठिंडा, छपरा, खुर्जा, बिलाईपाड़ा, टोंक, दौसा, किशनगंज, सुआकाती, ब्यासनगर, ग्वालियर, कटनी, कटक, जोधपुर, जोरापोखर, अंगुल, जालंधर, नागौर, जालौर, पाली, रायबरेली, वातवा, मंडीदीप, बांसवाड़ा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 16.7 फीसदी यानी 42 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बिहार शरीफ, बोइसर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गडग, हिंगोली, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, लातूर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मैहर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, प्रयागराज, पुडुचेरी, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लखनऊ, लुधियाना, मदुरै, महाड, मालेगांव, मंगलौर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नेल्लोर, पलवल, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सतना आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 56 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंगुल, बागपत, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बाड़मेर, बठिंडा, भिवाड़ी, बिलाईपाड़ा, ब्यासनगर, छपरा, चूरू, कटक, दौसा, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, जयपुर, जालंधर, जालौर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, करनाल, कटनी, खैरथल, खोरा, खुर्जा, किशनगंज, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मथुरा, मोदीनगर, नागौर, नारनौल, पाली, पंचकुला, पटियाला, पटना, रायबरेली, रोहतक, सिलीगुड़ी, श्री गंगानगर, सुआकाती, तालचेर, तिरुमाला, टोंक, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह अंबाला, बद्दी, बहादुरगढ़, भिवानी, बीकानेर, चरखी दादरी, दिल्ली, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गुरुग्राम, हापुड़, हिसार, जैसलमेर, जींद, कैथल, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पानीपत, सिरसा में स्थिति खराब, जबकि ग्रेटर नोएडा (335), आरा (330), बुलंदशहर (306) और पंचगांव (305) में बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 251 में से 42 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 128 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 11 जुलाई को यह आंकड़ा 150 दर्ज किया गया था।
56 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 335 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (11 जुलाई) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 206 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 129 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में जैसलमेर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 390 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 138 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 252 दर्ज किया गया है। मतलब की वहां स्थिति बेहद खराब से खराब हो गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 140 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 261 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 121 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 155 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 184 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 29 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 12 जुलाई को पंचगांव (305) चौथे स्थान पर है, वहीं आरा (330) दूसरे, जबकि बुलंदशहर (306) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 110, गाजियाबाद में 281, गुवाहाटी में 139, गुरूग्राम में 252, नोएडा में 258, ग्रेटर नोएडा में 335 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 58 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 91, चेन्नई में 92, चंडीगढ़ में 96, हैदराबाद में 57, जयपुर में 108 और पटना में 103 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 42 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अररिया, भिलाई, बिहार शरीफ, बोइसर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गडग, हिंगोली, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, लातूर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मैहर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, प्रयागराज, पुडुचेरी, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, ठाणे, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बालासोर, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लखनऊ, लुधियाना, मदुरै, महाड, मालेगांव, मंगलौर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नेल्लोर, पलवल, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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