बढ़ते शिकार और जलवायु परिवर्तन के कारण खतरे में हैं व्हेल शार्क

अंतरराष्ट्रीय व्हेल शार्क दिवस: समुद्र की सबसे बड़ी मछली व्हेल शार्क, अनोखे धब्बों से पहचान; बढ़ते शिकार, पर्यटन और जलवायु परिवर्तन के बीच संरक्षण जरूरी, वैज्ञानिकों के सामने अब भी कई रहस्य
व्हेल शार्क समुद्र की सबसे बड़ी मछली है, जो 18 मीटर तक लंबी हो सकती है और बेहद शांत स्वभाव रखती है।
व्हेल शार्क समुद्र की सबसे बड़ी मछली है, जो 18 मीटर तक लंबी हो सकती है और बेहद शांत स्वभाव रखती है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • व्हेल शार्क समुद्र की सबसे बड़ी मछली है, जो 18 मीटर तक लंबी हो सकती है और बेहद शांत स्वभाव रखती है।

  • इसके शरीर पर बने सफेद या पीले धब्बे हर व्हेल शार्क में अलग होते हैं, जिससे उनकी पहचान आसानी से होती है।

  • व्हेल शार्क हजारों किलोमीटर की यात्रा करती हैं और भोजन की तलाश में समुद्र के कई हिस्सों में पहुंचती हैं।

  • मछली पकड़ने के जाल, जहाजों की टक्कर, पर्यटन और जलवायु परिवर्तन व्हेल शार्क के लिए लगातार बढ़ते खतरे बन रहे हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के बावजूद व्हेल शार्क संकट में हैं, इसलिए उनके आवास, भोजन और प्राकृतिक जीवन की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

हर साल 30 अगस्त को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय व्हेल शार्क दिवस मनाया जाता है। इस दिन समुद्र की सबसे बड़ी मछली व्हेल शार्क के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है। अपने विशाल आकार, अनोखे शरीर और शांत स्वभाव के कारण व्हेल शार्क समुद्री दुनिया के सबसे आकर्षक जीवों में शामिल है। हालांकि, आकार में बड़ी होने के बावजूद यह इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है।

18 मीटर तक लंबी होती है व्हेल शार्क

व्हेल शार्क दुनिया की सबसे बड़ी मछली है। इसकी लंबाई करीब 18 मीटर तक पहुंच सकती है और कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भी बड़े नमूने हो सकते हैं। इसके नाम में भले ही ‘व्हेल’ शब्द है, लेकिन यह व्हेल नहीं बल्कि शार्क की एक प्रजाति है।

व्हेल शार्क की पहचान उसके शरीर पर बने खूबसूरत सफेद या पीले रंग के धब्बों से आसानी से की जा सकती है। इसका शरीर धूसर, नीला या भूरा दिखाई देता है और उस पर बने धब्बे रात के तारों भरे आसमान जैसे लगते हैं। मेडागास्कर में इसे ‘मारोकिंताना’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘कई सितारे’।

हर व्हेल शार्क का अलग पहचान चिह्न

व्हेल शार्क के शरीर पर बने धब्बों का पैटर्न हर शार्क में अलग होता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इन पैटर्न की मदद से अलग-अलग व्हेल शार्क की पहचान कर सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए ऐसी कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसे मूल रूप से अंतरिक्ष की तस्वीरों में तारों के समूहों की पहचान करने के लिए विकसित किया गया था। इस तकनीक से वैज्ञानिक अलग-अलग व्हेल शार्क पर नजर रख सकते हैं और उनके सफर का अध्ययन कर सकते हैं।

हजारों किलोमीटर का सफर

व्हेल शार्क बेहद प्रवासी जीव हैं। वैज्ञानिकों ने इनके लंबे सफर को ट्रैक किया है। एक व्हेल शार्क के करीब 13 हजार किलोमीटर तक एक दिशा में सफर करने का रिकॉर्ड मिला है। यह यात्रा लगभग 37 महीनों में पूरी हुई।

समुद्र में कुछ खास जगहों पर हर साल बड़ी संख्या में व्हेल शार्क एकत्र होती हैं। इन स्थानों को ‘एग्रीगेशन साइट’ कहा जाता है। यहां कई बार सैकड़ों व्हेल शार्क एक साथ दिखाई देती हैं। मछलियों और दूसरे समुद्री जीवों के अंडे देने के समय पानी में भोजन की मात्रा बढ़ जाती है। इसी कारण व्हेल शार्क इन स्थानों पर पहुंचती हैं।

पानी छानकर खाती है भोजन

इतने बड़े आकार के बावजूद व्हेल शार्क बड़े समुद्री जीवों का शिकार नहीं करती। यह एक फिल्टर फीडर है और मुख्य रूप से प्लवक तथा छोटे समुद्री जीवों को खाती है।

व्हेल शार्क अपने बड़े मुंह से पानी को अंदर खींचती है। इसके बाद पानी को गलफड़ों में मौजूद विशेष संरचनाओं से छाना जाता है और भोजन शरीर के अंदर रह जाता है। कई बार यह पानी में लगभग सीधी खड़ी होकर भी भोजन करती दिखाई देती है।

वैज्ञानिकों के सामने अब भी बड़ा रहस्य

व्हेल शार्क के बारे में काफी जानकारी जुटाई जा चुकी है, लेकिन वैज्ञानिकों के सामने अभी भी कई सवाल हैं। इनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये शार्क अपने बच्चों को जन्म देने के लिए आखिर कहां जाती हैं।

व्हेल शार्क जीवित बच्चों को जन्म देती हैं और एक बार में करीब 300 तक बच्चे पैदा कर सकती हैं। लेकिन इनके प्रजनन और बच्चों के शुरुआती जीवन से जुड़े स्थानों के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है।

संरक्षण के बावजूद खतरा बरकरार

व्हेल शार्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण मिला हुआ है और इसे सीआईटीईएस तथा सीएमएस जैसे समझौतों के तहत सुरक्षा प्राप्त है। इसके बावजूद यह प्रजाति खतरे में है। कई क्षेत्रों में अतीत में इनके मांस के लिए बड़े पैमाने पर शिकार किया गया है।

आज व्हेल शार्क से जुड़ा पर्यटन भी तेजी से बढ़ रहा है। अगर पर्यटन जिम्मेदारी से नहीं किया जाए तो यह इन विशाल जीवों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। पर्यटकों की नावों से टकराने और गोताखोरों के बहुत करीब जाने से व्हेल शार्क का प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित हो सकता है। कुछ बड़े एक्वेरियमों में इन्हें कैद करके भी रखा जाता है।

मछली पकड़ने और जलवायु परिवर्तन का असर

मछली पकड़ने के दौरान व्हेल शार्क गलती से जाल में फंस सकती हैं। समुद्र में छोड़े गए पुराने जाल और मछली पकड़ने के उपकरण भी इनके लिए खतरा बन सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन भी एक नई चुनौती है। समुद्र का तापमान बढ़ने से भोजन की तलाश में व्हेल शार्क नए और ठंडे इलाकों की ओर जा सकती हैं। इससे उनके व्यस्त समुद्री मार्गों के करीब पहुंचने और जहाजों से टकराने का खतरा बढ़ सकता है।

व्हेल शार्क समुद्र की एक अनमोल और शांत विशालकाय मछली है। इसके जीवन के बारे में अभी बहुत कुछ जानना बाकी है। इसलिए इनके आवासों की रक्षा, जिम्मेदार पर्यटन, सुरक्षित मछली पकड़ने की व्यवस्था और समुद्र को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय व्हेल शार्क दिवस हमें याद दिलाता है कि समुद्र के इन ‘कई सितारों’ को बचाना हमारी भी जिम्मेदारी है।

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