देश में लू का बढ़ता खतरा, पांच दिन की भीषण गर्मी से 30 हजार अतिरिक्त मौतों की आशंका

भीषण गर्मी से बढ़ा मौतों का खतरा, अध्ययन में दावा- पांच दिन की हीटवेव से देशभर में 30 हजार अतिरिक्त मौतों की आशंका, गरीब राज्यों पर सबसे ज्यादा असर
उत्तर प्रदेश में पांच दिन की गर्मी के दौरान 8100 अतिरिक्त मौतों का अनुमान, शोधकर्ताओं ने जताई गंभीर चिंता।
उत्तर प्रदेश में पांच दिन की गर्मी के दौरान 8100 अतिरिक्त मौतों का अनुमान, शोधकर्ताओं ने जताई गंभीर चिंता।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • अध्ययन में कहा गया है कि एक दिन की भीषण गर्मी से देशभर में 3400 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं, उत्तर भारत सबसे अधिक प्रभावित।

  • पांच दिन की हीटवेव से भारत में करीब 30 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान, गरीब राज्यों पर सबसे ज्यादा असर दिखा।

  • उत्तर प्रदेश में पांच दिन की गर्मी के दौरान 8100 अतिरिक्त मौतों का अनुमान, शोधकर्ताओं ने जताई गंभीर चिंता।

  • राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 45 डिग्री से ऊपर तापमान, हीटवेव को लेकर स्वास्थ्य खतरा बढ़ा।

  • शोधकर्ताओं ने कहा, आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों में गर्मी से मौतों का खतरा ज्यादा, केंद्र से विशेष सहायता की मांग।

देश में लगातार बढ़ रही गर्मी अब गंभीर चिंता का विषय बन गई है। हाल ही में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि भारत में एक दिन की भीषण गर्मी से करीब 3400 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। वहीं अगर लू यानी हीटवेव लगातार पांच दिन तक जारी रहे तो यह आंकड़ा लगभग 30 हजार तक पहुंच सकता है। यह अध्ययन ‘फ्रंटियर्स इन एनवायरनमेंटल हेल्थ’ नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

क्या है अतिरिक्त मौतें

शोध में “एक्सेस डेथ” यानी अतिरिक्त मौतों का जिक्र किया गया है। इसका मतलब है कि किसी विशेष समय में सामान्य दिनों की तुलना में जितनी ज्यादा मौतें होती हैं, उन्हें अतिरिक्त मौतें कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी शरीर पर बुरा असर डालती है और इससे कई लोगों की जान चली जाती है, खासकर बुजुर्गों, मजदूरों और गरीब तबके के लोगों की।

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पांच दिन की हीटवेव से हालात और गंभीर

शोधकर्ताओं ने भारत के कई जिलों के आंकड़ों का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि यदि पांच दिन तक लगातार हीटवेव रहे तो देश में करीब 30 हजार अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। अध्ययन के अनुसार उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत के कई हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

इस समय भी देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। गर्म हवाओं के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।

स्रोत: फ्रंटियर्स इन एनवायरनमेंटल हेल्थ

उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित

अध्ययन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। पांच दिन की हीटवेव के दौरान यहां लगभग 8100 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने का खतरा है।

शोधकर्ताओं ने अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे शहरों का भी जिक्र किया है। इन शहरों में एक ही गर्मी की घटना के दौरान 250 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरों में सीमेंट और कंक्रीट के कारण गर्मी और अधिक बढ़ जाती है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पाती।

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गरीब राज्यों पर ज्यादा असर

अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन राज्यों में आर्थिक स्थिति कमजोर है, वहां गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात मिलकर देश की कुल अतिरिक्त मौतों का 66 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जबकि देश की अर्थव्यवस्था में इनकी हिस्सेदारी केवल 29 प्रतिशत है।

शोध पत्र में शोधकर्ताओं के हवाले से कहा गया है कि गरीब राज्यों के पास गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। वहां लोगों के पास एयर कंडीशनर, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और ठंडे रहने की सुविधाएं कम हैं। यही कारण है कि इन इलाकों में मौतों का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।

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सरकार को उठाने होंगे बड़े कदम

वैज्ञानिकों ने कहा है कि सरकार को अब लू या हीटवेव को गंभीर आपदा की तरह लेना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को ज्यादा प्रभावित राज्यों को विशेष आर्थिक सहायता देनी चाहिए। साथ ही अस्पतालों में गर्मी से बीमार होने वाले मरीजों के लिए बेहतर व्यवस्था करनी होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में ज्यादा पेड़ लगाने, पानी की व्यवस्था सुधारने और मजदूरों के काम के समय में बदलाव जैसे कदम उठाने की जरूरत है। गांवों और गरीब इलाकों में लोगों को गर्मी से बचने के तरीकों के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।

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जलवायु परिवर्तन बन रहा बड़ी वजह

शोध में बढ़ती गर्मी के पीछे जलवायु परिवर्तन को बड़ी वजह बताया है। दुनिया भर में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हर साल गर्मी पहले से ज्यादा तेज हो रही है और हीटवेव की घटनाएं बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। बढ़ती गर्मी न केवल लोगों की सेहत पर असर डालेगी, बल्कि खेती, रोजगार और देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाएगी।

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