

मार्च 2026 की शुरुआत में ही हिमाचल प्रदेश में भीषण लू दर्ज की गई, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे जल्दी है। यह घटना 2024 के मुकाबले करीब 74 दिन पहले सामने आई, जो गर्मी के बदलते पैटर्न की ओर इशारा करती है।
वहीं तटीय आंध्र प्रदेश में भी सबसे जल्दी लू दर्ज की गई, जो यह दिखाता है कि देश के कई हिस्सों में अब लू पहले से ज्यादा जल्द शुरू होने लगी है।
हिमाचल प्रदेश में इस बार गर्मी ने रिकॉर्ड शुरुआत की है। राज्य में 6 मार्च 2026 को लू से भीषण लू जैसी स्थिति दर्ज की गई। पिछले पांच वर्षों में यह पहली मौका है जब मार्च के पहले सप्ताह में ही इतनी तेज गर्मी देखने को मिली है।
हैरानी की बात यह है कि हिमालयी राज्य में शुरू हुआ यह असामान्य गर्मी का सिलसिला करीब 2,000 किलोमीटर दूर तटीय आंध्र प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है, जो इस बदलाव के व्यापक असर की ओर इशारा करता है।
पिछले वर्षों की तुलना में जल्दी शुरू हुआ लू का कहर
आंकड़ों से साफ है कि इस बार गर्मी सामान्य से कहीं पहले दस्तक दे चुकी है। 2025 में हिमाचल प्रदेश में लू करीब एक महीने बाद 6 अप्रैल को शुरू हुई थी। 2024 में राज्य में पहली लू की घटना 19 मई को दर्ज की गई, जो 2026 के मुकाबले करीब 74 दिन देर से थी।
वहीं 2023 में पूरे साल लू नहीं पड़ी। इससे पहले 2022 में लू की शुरुआत 16 मार्च को हुई थी, यानी इस साल की तुलना में करीब 10 दिन बाद गर्मी ने दस्तक दी थी। लेकिन इन सबके उलट 2026 में यह 6 मार्च को ही शुरू हो गई, जो पिछले वर्षों के मुकाबले काफी पहले है।
सामान्य से 8 से 12 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान
इतनी जल्दी और तीखी लू का पड़ना इस बात की ओर इशारा है कि हिमालयी क्षेत्रों में चरम गर्मी के समय और पैटर्न में बदलाव हो रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, जब किसी स्थान का अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है, तो उसे लू कहा जाता है। वहीं जब तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा बढ़ जाता है, तो स्थिति भीषण लू की श्रेणी में पहुंच जाती है।
आईएमडी के मुताबिक, 6 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से 8 से 12 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 5 डिग्री या उससे ज्यादा ऊपर रहा।
तटीय इलाकों में भी जल्दी शुरू हो रही गर्मी
भारत में आमतौर पर लू की शुरुआत तटीय राज्यों से होती है। लेकिन पिछले दो वर्षों से इन इलाकों में भी गर्मी असामान्य रूप से जल्दी पड़ने लगी है।
उदाहरण के तौर पर, आईएमडी के ‘कोंकण और गोवा’ मौसम उपखंड में 2025 में 25 फरवरी को ही लू दर्ज की गई, जो सर्दियों के दौरान अब तक की सबसे जल्दी सामने आई लू की घटना थी। वहीं 2026 में इसी क्षेत्र, जिसमें गोवा और महाराष्ट्र के तटीय जिले शामिल हैं, में 5 मार्च को देश की पहली लू की घटना दर्ज की गई। इसके ठीक एक दिन बाद हिमाचल प्रदेश में लू से लेकर भीषण लू जैसे हालात बन गए।
इसी तरह गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ के तटीय इलाकों में भी 2022 में 11 मार्च और 2024 में 21 मार्च को अलग-अलग स्थानों पर लू की घटनाएं दर्ज की गई। गौरतलब है कि डाउन टू अर्थ 2022 से लू सहित दूसरी चरम मौसमी घटनाओं पर नजर रख रहा है और इसके लिए भारत में चरम मौसमी घटनाओं का एक इंटरैक्टिव डेटाबेस भी तैयार किया गया है।
आंध्र प्रदेश में भी बदलता पैटर्न
इस डेटाबेस के विश्लेषण से पता चला है कि पिछले पांच में से तीन साल - 2022, 2024 और 2025 में देश की पहली लू की घटना पश्चिमी तटीय इलाकों में दर्ज की गई। इनमें गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र शामिल हैं, जो आईएमडी के क्षेत्रीय वर्गीकरण के मुताबिक ‘सेंट्रल रीजन’ में आते हैं।
2023 में देश की पहली लू की घटना 3 मार्च को तटीय कर्नाटक में दर्ज की गई, जो आईएमडी के दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र में आता है। इसके बाद 8 मार्च को गोवा और 11 मार्च को गुजरात में लू की घटनाएं दर्ज की गई।
वहीं 2026 में दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र में एक बार फिर लू जल्दी शुरू हो गई। इस बार 8 मार्च को तटीय आंध्र प्रदेश में लू की घटना दर्ज की गई, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे जल्दी है।
राज्य में इससे पहले 2022 में 8 जून, 2023 में 14 अप्रैल और 2024 में 4 अप्रैल को लू की पहली घटना दर्ज की गई थी। जबकि 2025 में यहां लू की कोई घटना दर्ज नहीं हुई।
देखा जाए तो यह मौसमी बदलाव काफी अहम है। 2022 के मुकाबले 2026 में लू करीब 92 दिन, यानी लगभग तीन महीने पहले ही दस्तक दे चुकी है। वहीं 2023 की तुलना में यह 37 दिन और 2024 के मुकाबले करीब 28 दिन पहले दर्ज की गई।
किसानों के लिए जारी हुई चेतावनी
भीषण गर्मी और लू के सामान्य से पहले आने को देखते हुए राज्य सरकारों ने किसानों के लिए मौसम संबंधी सलाह जारी की है, ताकि फसलों को गर्मी के असर से बचाया जा सके। आईएमडी की सलाह के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में किसानों को गेहूं और शुरुआती सब्जियों की सुरक्षा के लिए सिंचाई करने को कहा गया है।
साथ ही पॉलीहाउस में उगाई जा रही शिमला मिर्च और टमाटर की फसलों में पर्याप्त हवादारी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है, ताकि बढ़ती गर्मी से फसलों को नुकसान न पहुंचे।
वहीं आंध्र प्रदेश में किसानों को मक्का, मूंगफली और दलहनी फसलों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है, ताकि फसलों में नमी बनी रहे। इसके साथ ही सूखे और धूप वाले मौसम में मल्चिंग या हल्की सिंचाई के जरिए खड़ी फसलों में मिट्टी की नमी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
मार्च की शुरुआत में ही तापमान का तेजी से बढ़ना इस बात का संकेत है कि भारत में गर्मी की चरम घटनाएं पहले से अधिक जल्दी और तीव्र हो सकती हैं, जो आने वाले समय में खेती, जल संसाधनों और लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।