स्वच्छ पुरी की दिशा में बड़ा कदम, कचरा प्रबंधन को लेकर बड़ी पहल की तैयारी

हलफनामे में सामने आया है कि पुरी में प्रस्तावित मेगा मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी रोजाना 100 टन सूखे कचरे की प्रोसेसिंग करेगी, जबकि 3.9 लाख मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट की बायो-माइनिंग पहले ही पूरी हो चुकी है
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • पुरी में कचरा प्रबंधन को नई दिशा देने के लिए नगरपालिका बलियापांडा डंपिंग यार्ड में 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाली मेगा मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी स्थापित करने की तैयारी कर रही है।

  • हलफनामे के मुताबिक, यहां जमा 3.9 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे की बायो-माइनिंग पूरी कर क्षेत्र को साफ कर दिया गया है।

  • ओडिशा सरकार ऑयल इंडिया के सहयोग से पुरी-कोणार्क समेत राज्य में सात कम्प्रेस्ड बायोगैस संयंत्र लगाने की योजना पर भी काम कर रही है।

  • साथ ही पर्यटन के कारण बढ़ रहे मिश्रित कचरे के रोजाना निपटान के लिए अलग प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है, जिससे पुरी को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।

ओडिशा के पुरी में कचरा प्रबंधन को लेकर एक बड़ी पहल की तैयारी हो रही है। पुरी नगरपालिका बलियापांडा डंपिंग यार्ड के साफ किए गए हिस्से में एक मेगा मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) स्थापित करने की योजना बना रही है।

यह संयंत्र हर दिन 100 टन सूखे कचरे को प्रोसेस करने में सक्षम होगा। इसके लिए तैयार किया गया प्रस्ताव (ड्राफ्ट आरएफपी) 23 दिसंबर 2025 को आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेज दिया गया है। यह जानकारी 11 फरवरी 2026 को पुरी के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दायर हलफनामे में सामने आई है।

राज्य में सात बायोगैस संयंत्रों की योजना

हलफनामे में यह भी बताया गया कि ओडिशा सरकार, ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से राज्य में गीले कचरे के प्रसंस्करण के लिए सात कम्प्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की पहल पर काम कर रही है। इनमें पुरी-कोणार्क क्लस्टर भी शामिल है।

इसके लिए लगभग 10 एकड़ भूमि चिन्हित कर ली गई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक

बलियापांडा डंपिंग यार्ड के चारों ओर सुरक्षा के लिए सीमा दीवार निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। अब तक 449 मीटर लम्बी दीवार का कंस्ट्रक्शन हो चुका है, जबकि अतिरिक्त 200 मीटर का कार्य जारी है। निर्माण में देरी का कारण सीमांकन के दौरान उत्पन्न विवाद बताया गया है।

3.9 लाख मीट्रिक टन कचरे की पूरी हो चुकी है बायो-माइनिंग

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां लम्बे समय से जमा 3,91,904 मीट्रिक टन कचरे (लेगेसी वेस्ट) की बायो-माइनिंग पूरी कर ली गई है और क्षेत्र को साफ कर दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पुरी नगरपालिका ने ‘स्वच्छ सवारियों’ के माध्यम से घर-घर जाकर कचरा एकत्र करने को प्राथमिकता दी है। इस योजना के तहत सूखा कचरा मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी केंद्रों में भेजा जा रहा है, जबकि गीला कचरा प्रोसेसिंग के लिए माइक्रो कम्पोस्टिंग केंद्रों में भेजा जाता है।

हालांकि, पर्यटकों के ज्यादा आने की वजह से, सार्वजनिक स्थानों पर से मिश्रित कचरा भी बड़ी मात्रा में एकत्र किया जा रहा है।

मिश्रित कचरे के निपटान के लिए अलग इकाई

नगरपालिका ने स्पष्ट किया है कि ताजा मिश्रित कचरे को बलियापांडा यार्ड के एक छोटे हिस्से में रखा जा रहा है। इसे रोजाना प्रोसेस करने और भविष्य में फिर से लेगेसी वेस्ट की समस्या न बनने देने के लिए एक विशेष एजेंसी के माध्यम से नई प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। यह कदम आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव के निर्देश पर उठाया जा रहा है।

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इस संबंध में एजेंसी के चुनाव के लिए ड्राफ्ट रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार कर 30 दिसंबर 2025 को शहरी विकास विभाग को भेजा गया था। विभाग ने 27 जनवरी 2026 को कुछ सुझाव देकर संशोधित प्रस्ताव दोबारा भेजने को कहा। इसके बाद संशोधित आरएफपी 4 फरवरी 2026 को पुनः जमा कर दी गई है।

पुरी में मेगा रिकवरी फैसिलिटी और बायोगैस संयंत्रों की यह योजना शहर को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अगर यह परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो पर्यटन नगरी पुरी में कचरा प्रबंधन की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

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