

एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत वेस्ट टू एनर्जी संयंत्रों के लिए संशोधित दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर तैयार कर अदालत में पेश करे।
सीपीसीबी ने बताया कि नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, इसलिए पुराने इंसिनरेशन आधारित गाइडलाइंस की समीक्षा जरूरी है। इस मामले में अगली सुनवाई 21 मई 2026 को होनी है।
वहीं एक अन्य मामले में मयूर विहार स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के नियमों के अनुसार काम न करने और आसपास दुर्गंध फैलने की शिकायत पर एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड को जांच के आदेश दिए हैं।
आरोप है कि प्लांट में बदबू रोकने के लिए विंड बैरियर नहीं लगाया गया और खुली कन्वेयर बेल्ट से दुर्गंध बढ़ रही है।
यह प्लांट आवासीय इलाके के बेहद करीब होने से लोगों को परेशानी हो रही है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को निर्देश दिया है कि वह कचरे से ऊर्जा (वेस्ट टू एनर्जी) संयंत्रों से जुड़ी नई गाइडलाइंस को अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर पेश करे। इस मामले में अगली सुनवाई 21 मई 2026 को होनी है।
10 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान सीपीसीबी के वकील ने अदालत को बताया कि जनवरी 2026 में नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 नोटिफाई किए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।
वकील ने अदालत को बताया कि पहले सीपीसीबी ने म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट इंसिनरेशन-बेस्ड वेस्ट टू एनर्जी प्लांट्स पर गाइडलाइंस बनाई थी और राज्यों से इस पर टिप्पणियां मांगी थीं। हालांकि, नए नियम लागू होने के बाद अब इन दिशानिर्देशों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
सीपीसीबी ने ट्रिब्यूनल को आश्वासन दिया कि यह प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट्स को लेकर प्रदूषण नियंत्रण, मानकों के पालन और पर्यावरणीय प्रभावों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
मानकों पर खरा नहीं मयूर विहार का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, एनजीटी ने मांगा जवाब
मयूर विहार में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के नियमों के मुताबिक काम न करने की शिकायत पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को जांच करने का निर्देश दिया है। शिकायत में आरोप है कि यह प्लांट निर्धारित मानकों के अनुसार काम नहीं कर रहा है।
एनजीटी के समक्ष बताया गया है कि दुर्गंध रोकने के लिए प्लांट में अब तक कोई विंड बैरियर नहीं लगाया गया है।
साथ ही, कन्वेयर बेल्ट खुली होने के कारण भी बदबू फैल रही है। चिंता की बात यह है कि यह ट्रीटमेंट प्लांट एक आवासीय कॉलोनी के मुख्य गेट से मात्र 10 से 15 मीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे स्थानीय निवासियों को परेशानी हो रही है।
एनजीटी ने 10 फरवरी 2026 को कहा कि दिल्ली जल बोर्ड इन सभी पहलुओं की जांच करेगा और अपनी जवाबी हलफनामा दाखिल करते समय इन बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब देगा।
इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होनी है।