

आंध्र प्रदेश के 17 शहरी स्थानीय निकायों से प्रतिदिन 822 एमएलडी से अधिक सीवेज निकल रहा है, जबकि मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता पर्याप्त नहीं होने से 219 एमएलडी का बड़ा गैप बना हुआ है।
आरोप है कि बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट या आंशिक रूप से ट्रीट किया गया सीवेज नदियों और जल स्रोतों में पहुंच रहा है। इस गैप को भरने के लिए निर्माणाधीन और प्रस्तावित एसटीपी परियोजनाओं पर काम चल रहा है, साथ ही रियल टाइम पॉल्यूशन मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया जा रहा है।
यह कार्रवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद तेज हुई है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार राज्य में सीवेज ट्रीटमेंट की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
आंध्र प्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की मौजूदा क्षमता राज्य में पैदा हो रहे सीवेज को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एपीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट में यह गंभीर स्थिति सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 17 शहरी स्थानीय निकायों में उत्पन्न हो रहे सीवेज और स्थापित एसटीपी की क्षमता के बीच प्रतिदिन कुल 21.9 करोड़ लीटर (219.43 एमएलडी) से ज्यादा का बड़ा अंतर पाया गया है। यह जानकारी पब्लिक हेल्थ एंड म्युनिसिपल इंजीनियरिंग विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ द्वारा आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई है।
इससे साफ होता है कि मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता उत्पन्न हो रहे सीवेज को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में रिपोर्ट के मुताबिक सीवेज के प्रभावी प्रबंधन के लिए मौजूदा प्लांट की क्षमता बढ़ाने और नए एसटीपी बनाने की जरूरत है।
रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गई है कि इन 17 घनी आबादी वाले शहरी स्थानीय निकायों से करीब 822.58 एमएलडी सीवेज पैदा हो रहा है, जो नदियों और जल स्रोतों के आसपास स्थित हैं। बाकी नई बनी छोटी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में एसटीपी निर्माण का काम जारी है, जबकि कुछ शहरों में अंडरग्राउंड ड्रेनेज कार्य चलने के कारण सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
कैसे भरा जाएगा यह गैप?
इंजीनियर-इन-चीफ के अनुसार 219.43 एमएलडी के इस गैप को भरने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है। इसके अनुसार 11 शहरों में 175.92 एमएलडी की कमी को उन ट्रीटमेंट प्लांट से पूरा किया जाएगा जो अभी निर्माणाधीन हैं। इन प्लांट्स की कुल क्षमता 284.47 एमएलडी है।
इसी तरह 46.68 एमएलडी गैप उन प्लांट्स भरा जाएगा जो अभी टेंडर के चरण में हैं। बाकी 6 शहरों में 43.51 एमएलडी की कमी को अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की योजना के तहत नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर पूरा किया जाएगा।
पब्लिक हेल्थ विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ ने रिपोर्ट में जानकारी दी है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की निगरानी के लिए रियल टाइम पॉल्यूशन मॉनिटरिंग सिस्टम (आरटीपीएमएस) लगाया जा रहा है। उनके मुताबिक 17 में से 8 शहरी स्थानीय निकायों में आरटीपीएमएस कनेक्टिविटी स्थापित हो चुकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अपने पिछले आदेश में दर्ज किया था कि 15 में से 6 शहरों में यह सिस्टम लगाया गया था। इसके बाद एक और शहर एलुरु में सिस्टम लगने से यह संख्या बढ़कर 7 हो गई है। इसके अलावा तेनाली में भी हाल ही में आरटीपीएमएस लगाया गया है। वहीं भीमावरम में इससे जुड़े उपकरण खरीदे जा रहे हैं और वो जल्द लगाए जाएंगे।
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 1 मार्च 2026 को इस मामले में पब्लिक हेल्थ विभाग को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा था। इसके जवाब में 18 मार्च 2026 को विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों को निर्देश दिया कि मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में तुरंत आरटीपीएमएस लगाया जाए।
एनजीटी के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह रिपोर्ट 24 मार्च 2026 एनजीटी में दाखिल की गई है। इस रिपोर्ट को एनजीटी द्वारा 20 जनवरी 2026 और 31 जुलाई 2025 को दिए आदेश पर अदालत में प्रस्तुत किया गया है।
बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 25 जनवरी 2024 को ईनाडू में छपी खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह मामला दर्ज किया है। इसमें बताया गया कि आंध्र प्रदेश की अलग-अलग नदियों जैसे कृष्णा, गोदावरी, स्वर्णमुखी, नागावली, तुंगभद्रा, कुंडू में लिक्विड वेस्ट डाला जा रहा है। अधिकांश सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अधूरे हैं, इसलिए, बिना ट्रीट या आंशिक रूप से ट्रीट किया हुआ कचरा नदियों में डाला जा रहा है, जबकि विशाखापट्टनम में यह समुद्र में छोड़ा जा रहा है।
रिपोर्ट से साफ है कि आंध्र प्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में यदि जल्द नए एसटीपी न बनाए गए और मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं लगाया गया, तो नदियों और जल स्रोतों में प्रदूषण और बढ़ सकता है।